
Nikhil Kumar
Ranchi: झारखंड में सड़क-पुल और भवनों के निर्माण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं. लगभग 1800 करोड़ की ऐसी योजनाएं अब जांच के दायरे में हैं. इनमें से ज्यादातर योजनाएं पूर्व की सरकार के कार्यकाल की हैं. कहीं काम की गुणवत्ता खराब है, तो कहीं करोड़ों की लागत से हुआ निर्माण जमींदोज हो गया.
राज्य की शान समझा जाने वाला नया विधानसभा भवन और निर्माणाधीन हाइकोर्ट भवन में हुई गड़बड़ियां अब एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच के दायरे में हैं.
उधर एनएच 23 और एनएच 75 की फोरलेनिंग के काम की भी जांच और ऑडिट करायी जा रही है. जांच में गड़बड़ियां प्रमाणित हुईं तो अफसरों-इंजीनियरों व ठेकेदारों पर गाज गिरनी तय है. इसकी आंच में कई बड़े नेता भी आ सकते हैं.
इसे भी पढ़ें :झारखंड का वांटेड सुधीर दूबे पंजाब से गिरफ्तार!
कई बार उठा है विधानसभा भवन की खामियों का मामला
नये विधानसभा भवन का पूरा परिसर 39 एकड़ में फैला है. 465 करोड़ की लागत से इसे बनाया गया है. काम रामकृपाल कंस्ट्रक्शन ने कराया है. 2019 में इसका उद्घाटन हुआ था. इस नये भवन में विधानसभा के कई सत्र भी आयोजित हो चुके हैं. नया विधानसभा भवन बनने के साथ ही इसमें आग लग गयी थी. सभावेशम के सारी कुर्सी-मेज जल गयी थी.
भवन को भी क्षति हुई थी. लाखों का नुकसान हुआ. विधानसभा के कड़े रूख के बाद भवन निर्माण विभाग ने कुर्सी-मेज, टेबुल को बदलवाये. नये रूप से डिजाइन फिर किया गया.
विधानसभा सचिवालय को हैंडओवर करने के बाद एक बार छज्जा गिरा व दो बार फॉल्स सीलिंग भी गिर गयी. अब महालेखाकार ने भी इस भवन में बेवजह के खर्चे पर चिंता जतायी है.
अब सीएम हेमंत सोरेन ने वित्तीय अनियमितता और खराब गुणवत्ता की शिकायत पर पूरे मामले की जांच एसीबी से कराने का आदेश दिया है. एसीबी विधानसभा भवन के निर्माण में वित्तीय अनियमितता के साथ-साथ इसके तकनीकी पहलुओं की भी जांच करेगा.
बता दें कि विधानसभा भवन की खामियों पर कई बार राज्य के मुख्ममंत्री और पक्ष-विपक्ष के विधायकों ने विधानसभा सत्रों के दौरान ही सवाल खड़े किए हैं.
इसे भी पढ़ें :Jharkhand : एक बार फिर बस किराया बढ़ाने की तैयारी
हाइकोर्ट भवन का काम पूरा भी नहीं हुआ, बैठ गयी जांच
एचईसी के कुटे में 165 एकड़ में फैले नये हाइकोर्ट भवन का निर्माण कार्य भी अब जांच के दायरे में हैं. हालांकि, पैसों की कमी की वजह से इसका काम अभी पूरा नहीं हुआ है. भवन अभी निर्माणधीन ही है.
इस भवन के लिए आरंभ में 365 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गयी थी. बाद में इसका इस्टीमेट घटाकर 265 करोड़ का टेंडर हुआ. काम शुरू होने के बाद अचानक जजों के चेंबर की संरचना में बदलाव किया गया. भवन के कई हिस्सों के डिजाइन में बदलाव के बाद इसकी लागत 697 करोड़ तक पहुंच गयी.
इस बड़ी राशि में सरकार से भी अनुमति नहीं ली गयी, न ही नया टेंडर हुआ. मामले में जनहित याचिका दायर हुई, जिसमें कहा गया कि ठेका कंपनियों व इंजीनियरों की मिलीभगत से सारी वित्तीय अनियमितता हुई.
इसे भी पढ़ें :GOOD NEWS : रेल यात्री ध्यान दें, गरीब रथ, ताज एक्सप्रेस सहित 32 ट्रेनें फिर से दौड़ेंगी पटरी पर
पिस्का मोड़ से पलमा और बीजूपाड़ा-कुडू रोड का मामला
पिस्का मोड़ से पलमा और बीजूपाड़ा-कुडू रोड के निर्माण में गड़बड़ी भी जांच के दायरे में है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लातेहार के नेतरहाट जाने के क्रम में सड़क की क्वालिटी पर सवाल उठाया था.
सीएम ने दोनों सड़कों की राइडिंग क्वालिटी भी सुधारने को कहा है, ताकि आवागमन बेहतर हो. सड़क समतल नहीं होने पर उन्होंने अफसरों पर कड़ी नाराजगी भी जतायी थी.
हालांकि, ये दोनों सड़कें झारखंड सरकार के अधीन नहीं है. नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इन्हें बनवाया है. सीएम के कड़े रुख के बाद एनएचएआई ने नेशनल हाइवे 23 के पिस्का मोड़ से इटकी के पहले पलमा व पिस्का मोड़ से बीजूपाड़ा-कुडू सेक्शन सड़क की गुणवत्ता की जांच के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट कराने का काम प्रारंभ किया है.
एनएचएआई ने खराब सड़क बनाने के लिए जिम्मेवार लोगों पर जवाबदेही तय करते कार्रवाई का आदेश दिया है. इंजीनियरों से जवाब-तलब किया है.
सड़क की राइडिंग सुधारने पर भी काम होगा. दिलचस्प बात यह है कि इनमें एक सड़क पिस्का मोड़ से पलमा एनएच 23 तक की सड़क का निर्माण रामकृपाल कंस्ट्रक्शन ने ही कराया है.
इसे भी पढ़ें :सेमीअंडरग्राउंड बिन इंस्टालेशन कार्यक्रम: साजिश के तहत जनप्रतिनिधियों को नहीं बुलाने का मेयर ने लगाया आरोप
2019 में ही बनीं दोनों सड़कें
पिस्का मोड़ से पलमा तक की सड़क लगभग 26 किमी तक बनायी गयी है. इस सड़क की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. कंक्रीट बेस्ड सड़क पर खराब राइडिंग क्वालिटी के कारण वाहनों का आवागमन काफी सुगम नहीं है.
इस सड़क को मेसर्स आर.के. कंस्ट्रक्शन ने बनवाया है. वहीं,पिस्का मोड़ से बीजूपाड़ा तक की सड़क का निर्माण ज्वाइंट वेंचर के जरिये हुआ है. बीजूपाड़ा से कुडू तक की सड़क भी 150 करोड़ से अधिक लागत में बनी है.
तीनों सेक्शन को मिलाकर 600 करोड़ से अधिक खर्च हुआ है. 2019 में ही ये सड़कें बनकर तैयार हो गयी थीं, जिनका उद्घाटन केंद्रीय पथ एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने किया था.
एक माह पूर्व धंसा कांची पुल, चल रही जांच
एक माह पहले कांची नदी पर लंबा पुल भी धंस गया. इस पुल को मेसर्स एन पांडेय ने बनवाया था. ग्रामीण विकस विशेष प्रमंडल ने इसका काम निकाला. यास तूफान आने के बाद कांची नदी में पानी का तेज बहाव हुआ और यह पुल धंस गया.
पुल करीब 13 करोड़ की लागत से तीन साल पहले ही बना. इस मामले में मुख्यमंत्री ने पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी. कमेटी अभी जांच कर रही है. मामले में इंजीनियरों व ठेकेदार पर कार्रवाई होनी तय है.
इसे भी पढ़ें :बुंडू में अवैध बालू उत्खनन को लेकर छापामारी, कई गाड़ियां जब्त




