
Rana Pratap Singh
Ranchi: झारखंड सरकार में तृतीय वर्ग के पद में सरकार की विभिन्न विभागों में समायोजित हुए सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के पेड मैनेजरों को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. हाई कोर्ट ने एसीपी/एमएसीपी लाभ के लिए प्रार्थियों की पिछली सेवाओं की गणना करने का निर्देश पारित किया है. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रौशन की कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए इन सेवानिवृत कर्मियों की सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के पेड मैनेजर की पिछली सेवाओं को जोड़ते हुए एसीपी/एमएसीपी का लाभ देने का आदेश दिया है. हाई कोर्ट ने कृष्णकांत मुखर्जी, विद्यासागर प्रसाद सहित कई प्रार्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है. पूर्व में भी कोर्ट ने उनकी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके पेंशन के मामले में भी पेड मैनेजर की पिछली सेवाओं की गणना करते हुए पेंशन देने का आदेश दिया था.
दरअसल, प्रार्थी 1975 -85 के दरमियान सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक में पेड मैनेजर के रूप में कार्यरत थे, सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के आलोक में वर्ष 2003 में इनका समायोजन झारखंड सरकार के तृतीय वर्ग के कर्मियों के रूप में विभिन्न विभागों में हुआ था. बाद में ये कर्मी वर्ष 2009-10 में सेवानिवृत हो गए थे. इनकी ओर से पेंशन के लिए 10 साल पूरा नहीं होने का हवाला देते हुए अपने पिछले सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के पेड मैनेजर की सेवाओं की गणना करने को लेकर एक याचिका दाखिल की गई थी. जिस पर कोर्ट ने आदेश दिया था कि उनकी पिछली पेड मैनेजर की सेवाओं को गणना करते हुए इनका पेंशन भुगतान किया जाए.
इसके बाद प्रार्थियों की ओर से फिर से हाइकोर्ट में याचिका दाखिल कर एसीपी/एमएसीपी का लाभ के लिए भी अपनी पुरानी सेवाओं ( पेड मैनेजर) की गणना करने का आग्रह किया गया. जिस पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा की चुकी प्रार्थियों के पेंशन के लिए उनकी पिछली सेवाओं की गणना की जा सकती है तो सिद्धांतत: सरकार मानती है कि उनकी पीछे की सेवा की गणना की जा सकती है. ऐसे में प्रार्थियों को एसीपी/एमएसीपी का लाभ देने के लिए भी पिछली सेवाओं ( पेड मैनेजर) की गणना की जाए. कोर्ट ने यह आदेश सुनाते हुए प्रार्थियों की याचिका स्वीकृत कर ली.




