Business

#BharatPetroleumCorporationLimited, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया सहित कई सरकारी कंपनियों का होगा निजीकरण, प्लान तैयार

NewDelhi : केंद्र सरकार कई सरकारी कंपनियों भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड आदि का निजीकरण करने को तैयार है. खबरों के अनुसार दिवाली से पहले इसका प्रारूप तैयार कर लिया जायेगा. नयी पॉलिसी के तहत नीति आयोग और विनिवेश व पब्लिक असेट मैनेजमेंट विभाग (दीपम) को नोडल विभाग बना दिया गया है.

दीपम की भूमिका बढ़ने के बाद अब जिन मंत्रालयों के अंदर यह कंपनियां आती हैं, उनकी किसी तरह की कोई भूमिका नहीं रहेगी. दीपम, नीति आयोग के साथ मिलकर के उन कंपनियों को देखेगा, जिनमें सरकार अपनी हिस्सेदारी घटा सकती है. वहीं दीपम विभाग के सचिव विनिवेश के लिए बने अंतर-मंत्रालय समूह के उपाध्यक्ष बनाये गये हैं।

विनिवेश पर हुई सचिवों की बैठक में कुल आठ सचिव शामिल थे. इनमें दीपम, कानून सचिव, रेवेन्यू सेक्रेटरी, एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी, कॉरपोरेट अफेयर सेक्रेटरी भी शामिल हुए

इसे भी पढ़ें :  CBDT चेयरमैन पर आरोप- पद सुनिश्चित करने के लिए विपक्षी नेता पर की कार्रवाई

विनिवेश का पूरा चरण चार से पांच माह में पूरा हो जायेगा

अधिकारियों के अनुसार जिन कंपनियों में सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचेगी, उनकी दो चरणों में बोली लगेगी. जानकारी के अनुसार पहले चरण में एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) मंगाया जायेगा. दूसरे चरण में वित्तीय बोलियां मांगी जायेंगी. जान लें कि पहले चरण के लिए सरकार इच्छुक कंपनियों के साथ बैठक और रोड शो भी करेगी. विनिवेश का पूरा चरण चार से पांच माह में पूरा हो जायेगा.

जिन कंपनियों में सरकार अपनी हिस्सेदारी को बेचने जा रही है, उनमें प्रमुख तेल मार्केटिंग कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) भी शामिल है. इसके अलावा भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल), कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकोर) और शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया शामिल हैं.

कंटेनर कॉरपोरेशन  में 30 फीसदी हिस्सा बेचने को मंजूरी दी गयी है.   इसके अलावा सरकार टीएचडीसी और नीपको में अपनी हिस्सेदारी एनटीपीसी को बेचने जा रही है.

इसे भी पढ़ें : #Moblynching : श्याम बेनेगल ने कहा, पीएम मोदी को हमारा पत्र महज अपील था,  प्राथमिकी दर्ज करने का क्या मतलब?

बीपीसीएल का नेटवर्थ 55 हजार करोड़ रुपये

बीपीसीएल का नेटवर्थ फिलहाल 55 हजार करोड़ रुपये है. इससे सरकार का लक्ष्य 65 हजार करोड़ रुपये की उगाही करने का है. इसके लिए ससंद से भी मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी. पिछले साल सरकार ने ओएनजीसी पर एचपीसीएल के अधिग्रहण के लिए दबाव डाला था.

इसके बाद संकट में फंसे आईडीबीआई बैंक के लिए निवेशक नहीं मिलने पर सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में एलआईसी को बैंक का अधिग्रहण करने को कहा था. सरकार विनिवेश प्रक्रिया के तहत संसाधन जुटाने के लिये एक्सचेंज ट्रेडिड फंड (ईटीएफ) का भी सहारा लेती आयी है.

इस विनिवेश के बाद सरकार एयर इंडिया के विनिवेश के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) का प्रारुप तैयार कर सकती है. इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बने मंत्रियों का समूह एक पखवाड़े में फैसला लेगा. सरकार एयर इंडिया की 30 हजार करोड़ रुपये की उधारी को अपने ऊपर लेगी. ईओआई से निवेशकों को पूरी तरह से पारदर्शिता मिलने की बात कही गयी है.

इसे भी पढ़ें : #PMModi #FascistGovernment चला रहे हैं, कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्दरमैया का आरोप

Related Articles

Back to top button