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जटिल प्रकिया के कारण झारखंड के कई आंदोलनकारी सम्मान से थे वंचितः सीएम

Ranchi: लंबे आंदोलन और शहादत के बाद राज्य मिला है. जब गुरुजी (शिबू सोरेन) ने अलग राज्य की मांग शुरू की तब लोग हंसी उड़ाते थे कहते थे अलग राज्य नहीं बन पायेगा. कई लोगों ने पूरे परिवार को आंदोलन मे न्यौछावर कर दिया. राज्य मिला जब पीछे मुड़के देखा तो वीरान जगह पर खड़े थे. राज्य निर्माण के बाद से ही आंदोलनकारी को सम्मान मिलने की चर्चा होती थी लेकिन ठोस पहल नहीं हो सका. हालांकि करीब 2000 हजार आंदोलकारियों को सम्मान दिया गया. राज्य के अधिकतर आंदोलनकारी सम्मान से वंचित थे. क्योंकि राज्य के हर वर्ग, हर जगह के लोगों ने आंदोलन में हिस्सा लिया था.

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चिन्हित करने की प्रकिया जटिल थी, अब नये तरीके से आंदोलनकारियों को चिन्हित किया गया. उक्त बातें सीएम हेमंत सोरेन ने आंदोलनकारियों के चिन्हितीकरण के शुभारंभ के अवसर पर बोल रहे थे. प्रोजेक्ट भवन स्थित सभागार में आंदोलकारियों को चिन्हितीकरण का शुभारंभ किया गया, इस अवसर पर पूर्व सीएम शिबू सोरेन बतौर मुख्य अतिथि ने लोगो का अनावरण किया. कार्यक्रम में झारखंड आंदोलनकारी आयोग के अध्यक्ष दुर्गा उरांव, विधायक राजेश कच्छप, सुदीप्त सोनू, मंत्री बादल पत्रलेख, मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, विनय चौबे सहित कई गणमान्य उपस्थित थे. कार्यक्रम में करीब 500 आंदोलनकारी और उनके परिजन पहुंचे थे.

प्राइवेट स्कूल जैसी पढ़ाई होगी मॉडल स्कूल में

सीएम ने कार्यक्रम में कहा कि राज्य में 5000 मॉडल स्कूल का निर्माण किया जायेगा. जिला स्तर पर कार्य चल भी रहा है. जो पढ़ाई डीएवी और डीपीएस जैसे स्कूलों में होते हैं वही पढ़ाई मॉडल स्कूलों में भी होगी. निजी स्कूल की तर्ज पर पठन-पाठन के संसाधन उपलब्ध कराया जायेगा. ताकि गरीब परिवार से आने वाले बच्चों को भी समेकित शिक्षा का अवसर मिल सकेगा. इन स्कूलों को स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, स्टेम लैब समेत पठन-पाठन के विभिन्न अत्याधुनिक संसाधनों से लैस किया जाएगा.

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केंद्र दे बकाया तो राज्य हैदराबाद, बैंगलूरु जैसा होगा विकसित

कार्यक्रम में सीएम ने केंद्र पर भी निशाना साधा उन्होंने कहा कि राज्य के खनिज संपदा से देश चल रहा है. यहां के लोग बुरी स्थिति में हैं. आजादी के बाद से आजतक केंद्र सरकार पर बकाया है. 1.36 लाख करोड़ केंद्र पर बकाया है. हालाकि हजार बारह करोड़ मिला भी है. केंद्र सरकार इस राशि का ब्याज भी दे दे तो राज्य को बैंगलुरु और हैदराबाद जैसा बना देंगे. सत्ता पर ऐसे लोग काबिज रहे जो राज्य को लूट का अड्डा बना दिया. राज्य के विकास से मतलब नहीं रहा. सारे पाप इनलोगों ने किया और मेरे मत्थे मढ़ दिये. पहले खनिज संपदा पर केद्र का हक होता था और बचा खुचा हमलोगों को मिलता था. अब ऐसा नहीं होगा. हमने ऐसे कानून बनाये हैं कि वो लोग बचा खुचा खायेंगे. उन्होंने कहा सरकार बनने के बाद कोरोना झोली में आया बाबजूद विकास के रफ्तार बढ़ाये गये, लेकिन संवैधानिक संस्था रोकने में जुटी है. हमलोगों को पीछे धकेलना चाहती है.

आंदोलनकारियों और आश्रितों को मिलेगा लाभ

पुलिस फायरिंग या जेल में मृत या दिव्यांग हुए आंदोलनकारियों के आश्रित परिवार के एक सदस्य को राज्य सरकार के तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय पदों पर सीधी नियुक्ति करेगी. अन्य आदोनकारियों के एक आश्रित के लिये तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय पदो पर सरकारी नियुक्ति में पांच प्रतिशत का क्षैतिज आरक्षण का लाभ दिया जायेगा. जेल में संयमन एवं मृत्यु होने पर आंदोलनकारी या उनके एक आश्रित को जीवनकाल तक सम्मान पेंशन दिया जायेगा.

इसके तहत जेल में तीन माह से कम रहने पर 3500 रुपये प्रतिमाह, तीन माह से छः माह के बीच रहने पर 5000 रुपये प्रतिमाह और छः माह से अधिक रहने पर 7000 रुपये प्रतिमाह का लाभ दिया जायेगा. झारखंड आंदोलन में योगदान देने वाले सभी लोग एवं उनके आश्रित, आश्रित की श्रेणी में संबंधित आंदोलनकारी की पत्नी, पुत्री, अविवाहित पुत्री, पुत्र की विधवा पत्नी, आंदोलनकारी महिला के पति, आंदोलनकारी के पौत्र, पौत्री इसके पात्र होंगे. लाभुक आंदोलनकारी चिन्हितीकरण आयोग के राज्य स्तरीय कार्यालय और संबंधित जिला उपायुक्त का कार्यालय में इसके लिये आवेदन करेंगे.

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