
Deepak
Ranchi : झारखंड में अब मलेरिया और डायरिया से होनेवाली मौत कम हो रही है. 2016 में जहां मलेरिया और इंसेफेलाइटिस तथा जापानी इंसेफेलाइटिस से कुल 20 मौतें हुई थीं. वह 2017-18 में कम हो गयी है. अब राज्य में डायरिया और टायफायड जैसी बीमारियों से आक्रांत मरीजों को सरकारी अस्पतालों में ही दवाईयों की खुराक से ठीक कर दिया जा रहा है.
नेशनल हेल्थ पॉलिसी 2018 की मध्यावधि रिपोर्ट में कहा गया है कि झारखंड में अब भी वेक्टर बोर्न डीजिज (मच्छर तथा पानी में पनपनेवाले कीड़ों) से होनेवाली बीमारी के बारे में लोग काफी अनभिज्ञ हैं.
शहरी इलाकों में तो चिकित्सा की बेहतर सुविधाएं मौजूद हैं, पर गांवों में अशिक्षा और बीमारियों के बारे में अधूरा ज्ञान लोगों को मलेरिया, चिकेनगुनिया, डेंगू, कालाजार और इंसेफेलाइटिस से ग्रसित कर रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार, वेक्टर वोर्न डिजीज का वार्षिक सूचकांक देश ही नहीं झारखंड में भी सबसे अधिक यानी 3.78 प्रतिशत है. इसके बारे में और जागरुकता फैलाने की जरूरत है.
लोगों को यह बताने की आवश्यकता है कि जमे हुए पानी में कैसे मच्छरों की प्रजातियां पनपति हैं और घरों तक पहुंचती हैं. लोगों को आज भी मच्छरदानी का बेहतर और समुचित उपयोग की जानकारी नहीं है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अपर्याप्त जानकारी की वजह से ही अधिक से अधिक लोग इन बीमारियों के शिकार हो रहे हैं.
कमोबेश यही स्थिति डायरिया की भी है. डायरिया से अब मौत नहीं हो रही है. 2016 में जहां मलेरिया से 51,091 पुरुष पीड़ित हुए, वहीं इनकी संख्या 2017 में 49,654 ही रही.
2016 में मलेरिया से ग्रसित महिलाओं की संख्या 43,657 रही, जो 2017 में घटकर 41,672 रह गयी. इन दोनों वर्षों में एक भी मौत मलेरिया से नहीं हुई.
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सरकार का मिशन 2030 इन रोगों से मुक्त करना
राज्य सरकार ने 2030 तक झारखंड को कालाजार और जापानी इंसेफेलाइटिस से मुक्त कराने का निर्णय लिया है. राज्य में मलेरिया के सबसे अधिक प्रभावित जिले 15 हैं.
इनमें राजधानी रांची, गुमला, सिमडेगा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसांवा, साहेबगंज, गोड्डा, दुमका, लातेहार, पाकुड़, लोहरदगा, जामताड़ा, गढ़वा और धनबाद शामिल हैं. कालाजार से प्रभावित जिलों में साहेबगंज, दुमका और पाकुड़ शामिल है.
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राज्य में चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ी
राज्य में लोगों के बेहतर इलाज के लिए चिकित्सकों की संख्या बढ़ी है. 2004 में जहां एक चिकित्सक 22,936 मरीजों का इलाज करते थे. वहीं 2016 में एक चिकित्सक 20,376 मरीजों तक पहुंचे. अब 11,897 मरीजों तक एक चिकित्सक पहुंच रहे हैं.
राज्य की 78.61 लाख जनजातीय आबादी के लिए सरकार की तरफ से 6060 चिकित्सा उप केंद्र, 360 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 241 सीएचसी खोले गये हैं.
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वेक्टर बोर्न डीजिज से ग्रसित होनेवाले लोग और मौत
| बीमारी | साल | मामले | मौत |
| मलेरिया | 2013 | 97786 | 08 |
| मलेरिया | 2014 | 103735 | 08 |
| मलेरिया | 2015 | 104800 | 08 |
| मलेरिया | 2016 | 141414 | 15 |
| बीमारी | साल | मामले | मौत | |
| चिकेनगुनिया | 2013 | 61 | 0 | |
| चिकेनगुनिया | 2014 | 11 | 0 | |
| चिकेनगुनिया | 2015 | 21 | 0 | |
| चिकेनगुनिया | 2017 | 47 | 0 | |
| चिकेनगुनिया | 2017 | 284 | 0 |
| बीमारी | साल | मामले | मौत |
| डेंगू | 2013 | 161 | 00 |
| डेंगू | 2014 | 360 | 0 |
| डेंगू | 2015 | 102 | 00 |
| डेंगू | 2016 | 414 | 01 |
| डेंगू | 2017 | 707 | 05 |
| बीमारी साल मामले मौत |
| इंसेफेलाइटिस 2013 270 05 |
| इंसेफेलाइटिस 2014 288 02 |
| इंसेफेलाइटिस 2015 217 08 |
| इंसेफेलाइटिस 2016 296 05 |
| इंसेफेलाइटिस 2017 266 01 |
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