Godda. राज्य में राष्ट्रीय पोषण माह अभियान जारी है. शरीर के समुचित पोषण के लिये खान-पान का महत्व विशेषज्ञ बता रहे हैं. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार झारखंड में प्राकृतिक रूप से कई ऐसी खाद्य सामग्रियां पायी जाती हैं जो
लोगों के लिये सेहतमंद साबित होती रही हैं. इनमें से एक महुआ भी है. इसकी अच्छी खासी पैदावार यहां होती है. ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिये यह सहज उपलब्ध भी है.
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कई रूपों में फायदेमंद भी है. इससे बनने वाली मिठाइयां स्वास्थ्य के लिहाज से लाभकारी हैं. कृषि विज्ञान केन्द्र, गोड्डा के प्रोग्राम ऑफिसर डॉ रवि शंकर के मुताबिक महुआ से बेहद कम लागत में अच्छा-खासा मुनाफा कमाया जा सकता है. इसका लड्डू बनाना महिलाओं के लिये आजीविका का स्रोत हो सकता है. साथ ही वे इसके जरिये आत्मनिर्भर भी हो सकती हैं.
गर्भावस्था में मिले भरपूर पोषण
अडाणी फाउंडेशन द्वारा सोमवार को चकेश्वरी, गोड्डा स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र में सुपोषण कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें ग्रामीण विकास ट्रस्ट और केवीके (कृषि विज्ञान केन्द्र) गोड्डा की टीम ने एकदिवसीय प्रशिक्षण शिविर में महिलाओं को पोषण का महत्व बताया. सुपोषण कार्यक्रम से जुड़ी 20 संगिनी बहनों को विशेषज्ञों ने कई उपयोगी टिप्स दिये.

विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ प्रगतिका मिश्रा ने पोषण से संबंधित जानकारी देते हुए पूरक आहार और आहार के महत्व के बारे में बताया. पोषण थाली और पोषण माला जैसे कार्यक्रमों के बारे में भी जानकारी दी. प्रगतिका ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को सही पोषण मिलना जरूरी है. इसके लिये इसके लिए पोषण वाटिका लगाना चाहिये. इसके जरिये साग-सब्जियां लगाकर लाभ उठाया जा सकता है.




