
Palamu : मुहर्रम के चेहल्लुम पर हुसैनाबाद में शिया समुदाय के लोगों द्वारा जुलूस निकाला गया. जुलूस में अलम, सिपर, ताबूत व जुलजनाह (दुलदुल) के साथ बुजुर्ग, नौजवान, बच्चे, छोटी बच्चियां मातम करते हुए कर्बला तक गये. इस दौरान ब्लेड, कमा और जंजीर से खूनी मातम किया गया. मुख्य कार्यक्रम वक्फ वासला बेगम सदर इमाम बारगह में आयोजित किया गया और जुलूस निकाला गया. जुलूस के महात्मा गांधी चौक पहुंचने पर हजरत मौलाना सैयद तहजीबउल हसन रिजवी (रांची) ने हजरत इमाम हुसैन व उनके परिजनों पर किये गये जुल्मों का बखान किया. साथ ही, वतन से मुहब्बत और आपसी भाईचारे का पैगाम दिया.
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तकरीर के बाद मना खूनी मातम
इस वर्ष यादगार-ए-हुसैनी कोलकाता की अंजुमन लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही. इसने अपने नौहो मातम से लोगों का दिल जीत लिया. तकरीर के बाद चौक पर लोगों ने खूनी मातम ब्लेड, कमा, जंजीर से किया और शरीर से खून बहाया. उसके बाद कर्बला की ओर या हुसैन या हुसैन की सदा लगाते हुए चल पड़े. जुलूस का नेतृत्व मोतवल्ली सैयद तकी हुसैन रिजवी ने किया. मरसियाख्वानी सैयद गालिब हुसैन, सैयद बाकर हुसैन, मो रजा, सैयद अख्तर हुसैन आदि ने की. नौहाख्वानी सैयद हाशिम अली, सैयद तबरेज, सैयद मिसम रिजवी, अली हसन हुसैन, नसीम मिर्जा और इस्लाम मिर्जा ने की.
जुलूस में मुख्य रूप से सैयद गफार हुसैन, मिर्जा अमीन, सैयद इकबाल हुसैन, सैयद फिरोज हुसैन, सरकार हुसैन, मिर्जा नेहाल, अतहर हुसैन, सैयद फखरू हुसैन, सैयद मोमिन हुसैन, सैयद मुनीस अख्तर, तबारक हुसैन, हसन अस्करी, साबिर हुसैन, शमीम हैदर के अलावा काफी संख्या में समुदाय के लोग मौजूद थे. सभी ने नम आंखों से शहीदों को विदा किया. खूनी मातम देखने के लिए हुसैनाबाद, हैदरनगर, मोहम्मदगंज के अलावा बिहार और यूपी से लोग पहुंचे थे.




