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प्रयागराज में महाकुंभ कल से, श्रद्धालुओं का आना शुरू

Prayagraj: महाकुंभ नगर भव्य और दिव्य महाकुंभ की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है. पौष पूर्णिमा के प्रथम स्नान नव की डुबकी के साथ ही 13 जनवरी को कल्पवास शुरू हो जायेगा. पुण्य की कमाई के लिए संगम की रेती पर गृहस्थी जमाने के लिए देश-विदेश के कोने-कोने से कल्पवासी उमड़ गये हैं, जप-तप और ध्यान के लिए महाकुंभ नगरी सज गयी है. सोमवार से मास पर्यंत जप, तप और ध्यान का मेला शुरू हो जायेगा. पांटून लों से लेकर चकर्ड प्लेट के मार्गों तक तिल रखने की जगह नहीं बची है. ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर महीने भर की गृहस्थी लेकर लोग शिविरों में आ गये कल्पवासी अपनी गृहस्थी सजाने जुट गये हैं. गंगा-यमुना के किनारे के स्नान घाटों से लेकर संगम की सर्कुलेटिंग एरिया में पुआल बिछाने का काम तेज कर दिया गया है. कल से शुरू होने वाले महाकुंभ में श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया है. संगम तट पर साधु-संतोंका जमावड़ा एक हफ्ता पहले से ही हो चुका है.

आकर्षण का केंद्र बने रुद्राक्ष बाबा

इस बार के महाकुंभ में रुद्राक्ष बाबा आकर्षण का केंद्र बने हुए है. बाबा का गेटअप श्रद्धालुओं को खास रास आ रहा है. वह 11,000 रुद्राक्ष धारण किये हुए हैं. रुद्राक्ष वाले बाबा के सिर, पांव, हाथ, कमर, गले पर रुद्राक्ष ही नजर आता है. 108 रुद्राक्ष की मालाएं 10,11,151 रुद्राक्ष से बनी है. बाबा के सिर पर 101 से अधिक रुद्राक्ष की माला है. इसका वजन करीब 45 किलो है. रुद्राक्ष बाबा के अनुसार, पिछली बार की तुलना में महाकुंभ मेले की व्यवस्था में सुधार हुआ है. मैं बहुत खुश हूं. कि महाकुंभ के लिए यहां आया हू. महाकुंभ मेले को लेकर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है. पूरे क्षेत्र को आकर्षक लाइटों से सजाया गया है.

पर्यावरण बाबा महाकुंभ में लगायेंगे 51,000 पौधे

महामंडलेश्वर अवधूत बाबा अरुण गिरि (पर्यावरण बाबा) महाकुंभ में पधार चुके है. वे यहां पर्यावरण बचाने के अपने अनूठे मिशन के साथ पहुंचे हैं. इस महाकुंभ में 51,000 और पौधे लगाने का लक्ष्य है. वे अब तक एक करोड़ से ज्यादा पौधे लगा चुके है, इसलिए उन्हें पर्यावरण बाबा भी बुलाया जाता है. वे अपने गहनों के लिए भी मशहूर हैं.

 

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