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लिव इन में रह रहे प्रेमी जोड़े को मिली सामाजिक बहिष्कार की सजा

एक गोत्र होने की वजह से समाज नहीं कर रहा है स्वीकार, पुलिस की हस्तक्षेप शुरू

Khunti: जय मसीह गुडिया (24) व अर्चना गुडिया (27) एक साल से लिव इन में रह रहे हैं. इनका छः माह का बच्चा भी है. दोनों के परिवार वालों को इससे कोई आपति नहीं है. पर समाज इसे स्वीकार नहीं कर रहा है. तोरपा प्रखंड के तपकरा पंचायत अतंर्गत बेहराटोली गांव में बैठक कर समाज के कथित ठेकेदारों ने इन्हें सामाजिक बहिष्कार की सजा सुना दी है. इतना ही नहीं लडका लडकी के परिवार वालों का भी सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है.

 

गांव के लोग न इनसे बातचीत करते हैं न ही इन्हे किसी सामाजिक कार्यक्रम में बुलाते हैं. इनके खेत खलिहान में काम करने नहीं जाते हैं. समाज की ओर से दोनों को अलग हो जाने की चेतावनी दी जा रही है. इधर, मीडिया के माध्यम से मामले की जानकारी मिलते ही तपकरा थाना प्रभारी विक्की ठाकुर ने शनिवार शाम को पीडित जयमसीह गुडिया को थाना बुलाकर मामले की जानकारी ली. पुलिस मामले की छानबीन में जुट गयी है.

 

प्रेमी जोडा मानसिक रूप से परेशान हैं

गेंदटोली निवासी जयमसीह गुडिया व अर्चना गुडिया कहते हैं कि जून 2020 से दोनो साथ रह रहे हैं. चर्च व समाज में शादी की इजाजत नहीं मिलने के कारण दोनो ने आपस में शादी कर ली है. दोनों के परिवार वाले शादी से खुश हैं. समाज उनके रिश्ते को स्वीकार नहीं कर रहा है. तीन चार बार बैकठ में बुलाकर उन्हें अलग हो जाने के लिए दबाव डाला जा रहा है. सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है. अर्चना गुडिया कहती है हम अलग नही हो सकते हैं. समाज का ताना सुन सुन कर कभी मन में विचार आता है कि आत्महत्या कर लें. पर बच्चे व पति के मोह के कारण ऐसा नही कर पाते हैं.

 

एक गोत्र में शादी की परंपरा नही है

गांव के मुंडा नवीन कहते हैं कि आदिवासी समाज में एक गोत्र में शादी करने की परंपरा नहीं है. समाज इसे स्वीकार नही करता है. गांव में बैठक कर दोनों को अलग हो जाने के लिए समझाया गया पर नहीं माने. सामाजिक बहिष्कार करने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है. दोनों अगर अलग अलग हो जाते हैं तो सामाजिक बहिष्कार की सजा समाप्त कर दिया जायेगा. दोनों का केवल सामाजिक बहिष्कार किया गया है किसी तरह से प्रताडित नही किया गया है.

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