
Kumar Kamesh
Dhanbad: लॉकडाउन के कारण इन दिनों सभी को कई तरह की परेशानियों का समना करना पड़ रहा है. लेकिन इन परेशानियों के बावजूद लॉकडाउन ने देश के सबसे प्रदूषित झरिया और उसके पास के कई प्रदूषित क्षेत्रों के वातावारण को स्वच्छ कर दिया है.
कोयले की ट्रांस्पोर्टिंग और इससे जुड़े उद्योग-धंधे बंद होने से देश के सबसे प्रदूषित शहर झरिया के प्रदूषण में भारी गिरावट आयी है. यहां की हवा में पीएम पार्टिकल की मात्रा में 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी है.
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झरिया के प्रदूषण में लगातार आ रही है गिरावट
लॉकडाउन के कारण झरिया और उसके आसपास के क्षेत्रों में कोयले की ट्रांसपोर्टिंग सड़क मार्ग से बंद है. साथ ही सड़कों पर कम गाड़ियां चल रही हैं तो दूसरी तरफ कोयला उद्योग से जुड़े हार्डकोक की फैक्ट्रियां भी बंद हैं. ऐसे में झरिया की हवा में हानिकारक तत्व नहीं घुल रहे.
जिस कारण यहांं की हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 में 60 फीसदी की कमी आयी है. प्रदूषण नियंत्रण पर्षद धनबाद के क्षेत्रीय अधिकारी आरएन चौधरी के अनुसार 22 मार्च को प्रधानमंत्री द्वारा घोषित जनता कर्फ्यू के बाद झरिया में प्रदूषण के स्तर में काफी कमी आयी है. और अब भी लगातार झरिया में प्रदूषण के स्तर में कमी देखी जा रही है.
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ग्रीनपीस की रिपोर्ट में देश के सबसे प्रदूषित शहरों में नंबर वन पर था झरिया
जनवरी-2020 में ग्रीनपीस ने अपने सर्वे कें बाद जो रिपोर्ट सार्वजानिक की थी, उसमें झरिया को देश का सबसे अधिक प्रदूषित शहर माना गया था. दूसरे नंबर पर धनबाद था. देश के 100 सबसे प्रदूषित शहरों में धनबाद दूसरे नंबर पर था. लॉकडाउन से पहले झरिया की हवा में पीएम 10 का स्तर काफी ज्यादा था.
प्राप्त आकड़ों के अनुसार झरिया मानक से 5.3 गुणा और धनबाद 4.4 गुणा अधिक प्रदूषित था. रिपोर्ट के मुताबिक झरिया वह इलाका है, जहां पीएम 10 की मात्रा सबसे अधिक थी. हवा में पीएम 10 के राष्ट्रीय मानक से 5.3 गुणा ज्यादा पीएम 10 की मात्रा हवा में थी.
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क्या होता है पीएम 10
डॉक्टर आशुतोष रखीत के अनुसार पीएम 10 को पर्टिकुलेट मैटर कहा जाता है. इसके कणों का साइज 10 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास का होता है. इसमें धूल, गर्दा और धातु के सूक्ष्म कण मिले होते हैं. सांस लेते वक्त इन कणों को रोकने का हमारे शरीर में कोई सिस्टम नहीं है. ऐसे में पीएम पार्टिकल हमारे फेफड़ों में काफी भीतर तक चला जाता है.
यह बच्चों और 50 से ज्यादा उम्र वाले लोगों को काफी प्रभावित करता है. वहीं इस मामले में प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अधिकारी आरएन चौधरी ने बताया कि लॉकडाउन के कारण प्रदूषन के स्तर कें काफी कमी आयी है. आकड़ों के अनुसार 50 फीसदी से ज्यादा प्रदूषण कम हुआ है. फिलहाल जो आंकड़े आ रहे हैं, उसका विश्लेषण किया जा रहा है. इसके बाद ही रिपोर्ट सार्वजानिक की जायेगी.




