
- हैदराबाद से झारखंड लौट रहे मजदूरों को रोका गया है छत्तीसगढ़ में
- कोडरमा और गिरीडीह के है सभी 600 मजदूर, 21 दिन बाद अलग-अलग जगह भेजे गये
Ranchi: छत्तीसगढ़ में फंसे झारखंड के कोडरमा और गिरीडीह जिले के 600 मजदूरों को बागनदी फॉरेस्ट कैंप, राजनांदगांव में एक दिन पूर्व तक क्वारेंटाइन में रखा गया था.
क्वारेंटाइन से निकले मजदूरों का कहना है कि उन्हें इस सेंटर में जो खाना परोसा जाता था उसमें कीड़े पड़े हुए होते थे.
प्रवासी मजदूरों का यह भी कहना है कि क्वारेंटाइन के बाद 15 मजदूर जशपुर के कांसाबेल में रखे गये हैं उन्हें भी बासी खाना दिया जा रहा है.
एक मजदूर ने कहा,“हम कोरोना से संक्रमित हों या न हों लेकिन जिस तरह का भोजन छत्तीसगढ़ सरकार दो कक्त दे रही है उससे हम लोग जिन्दा नहीं रह पायेंगे.”
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हैदराबाद से लौटते समय रोके गये थे मजदूर
एक मजदूर शंकर यादव ने बताया कि वे लोग हैदराबाद से अपने गांव लौट रहे थे. इसी बीच लॉकडाउन में फंस गये तो छत्तीसगढ़ सरकार ने रहने की जगह उपलब्ध करा दी.
उसने कहा कि जो खाना मिल रहा है वह ठीक नहीं है. नमक, नींबू, बेसन डालकर दे देते हैं, उसमें कीड़े रहते हैं. नास्ता नहीं देते हैं. 10 दिन में एक बार दाल मिली है. परेशान हो गये हैं. बीमार पड़ सकते हैं.
कोडरमा के 15 मजदूर बॉर्डर पर रुके
कोडरमा के मरकच्चो के 15 मजदूर राज्य की सीमा के ही पास छत्तीसगढ़ में हैं. मुखलाल यादव कहते हैं, “हमलोगों को छत्तीसगढ़ सरकार ने बागनदी फॉरेस्ट कैंप क्वारेंटाइन सेंटर में 21 दिन रखा. वहां खाने में बासी और कीड़े वाला भोजन दिया जा रहा है.
यादव ने बताया कि क्वारेंटाइन के बाद सभी की जांच करायी गयी जिसमें कोई भी कोरोना संक्रमित नहीं पया गया. जो भोजन मिल रहा है वह काफी खराब है.
12 बसों में बॉर्डर तक छोड़ने का आश्वासन दे अलग-अलग स्थानों पर रखा गया
मुखलाल यादव कहते हैं कि सभी को झारखंड बॉर्डर तक छोड़ देने की बात कहकर अलग-अलग स्थान पर एक दिन पहले लाया गया है. नये स्थान में भी खाने की व्यवस्था खराब है.
न्यूजविंग से बात करते हुय प्रकाश यादव ने बताया कि बाकी मजदूर को कहां रखा गया है उन्हें नहीं पताया. 15 लोगों को पोस्ट मैट्रिक 50 सीटर कन्या छात्रावास कांसाबेल (जिला जशपुर) में रखा गया है.
प्रकाश ने कहा, लॉकडाउन में हमलोग सरकार के हर निर्देश का पालन कर रहे हैं. हेमंत सरकार से बस हमलोग इतना चाहते है कि वे हमें मिलने वाला भोजन ठीक करा दें.
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