
Girish Malviya
लाखों पॉलिसी धारकों के लिए यह बहुत बुरे संकेत हैं. मोदी सरकार ने इन पॉलिसी धारकों का पैसा डुबोने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी, जब उसने LIC के सिर पर बंदूक रख कर आइडीबीआइ बैंक में उसे 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने पर मजबूर कर दिया था. एनपीए के मामले में आइडीबीआइ बैंक सबसे खराब प्रदर्शन करनेवाला ऋणदाता बैंक रहा है. अर्थव्यवस्था के जानकारों ने एलआईसी और आइडीबीआइ के बीच होनेवाले इस सौदे को घाटे का बता दिया था. उनका मानना था कि इस सौदे के बाद एलआईसी को 70,000 करोड़ से लेकर एक लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है.
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आज यही नुकसान शेयर बाजार में परिलक्षित हो रहा है लेकिन मोदी सरकार का पेट इतने से भी नहीं भरा है. अब जो नयी बात सामने आ रही है उसमें एलआईसी से एक ऐसी कंपनी को बचाने को कहा जा रहा है, जिसपर बहुत बड़ा कर्ज है, जो डूबने के कगार पर है, यह कंपनी है आइएलएंडएफएस.
दरअसल यह एक बुनियादी ढांचा विकास और वित्त कंपनी है इस कंपनी को गुजरात सरकार का बताया जा रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (आइएल एंड एफएस) में पहले से ही एलआईसी के 25 फीसदी शेयर हैं.
एक समय पर आइएलएंडएफएस को सार्वजनिक निजी भागीदारी का अगुआ समझा जाता था, लेकिन अब इस समूह पर भारी कर्ज का बोझ है. समूह के कई दीर्घावधि तथा लघु अवधि के बांडों को क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने ‘चूक’ या ‘कबाड़’ की श्रेणी में डाला है. इसके अलावा सेबी कुछ ऋण चूक का खुलासा करने में कथित देरी के लिए भी जांच कर रही है.
ऐसी ऋणग्रस्त कंपनी में निवेश करने का एलआईसी पर एक बार फिर दबाव बनाया जा रहा है, ताकि यह संकट 2019 के आम चुनावों तक टल जाये.
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भारतीय जीवन बीमा निगम देश के सबसे बड़े संस्थागत निवेशकों में शुमार है. इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड, 2016 के तहत नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) में जितने भी ऐप्लिकेशन स्वीकार किये गये हैं, उन कंपनियों में LIC का बड़े पैमाने पर निवेश है. इन कंपनियों में आलोक इंडस्ट्रीज, एबीजी शिपयार्ड, एमटेक ऑटो, मंधाना इंडस्ट्रीज, जेपी इन्फ्राटेक, ज्योति स्ट्रक्चर्स, रेनबो पेपर्स और ऑर्किड फार्मा शामिल हैं.
यानी दीवालिया घोषित होनेवाली सभी कंपनियों में LIC की पहले से ही हिस्सेदारी है, जिसे अब और बढ़ाया जा रहा है. अब IDBI बैंक के बाद IL & FS में निवेश करना LIC के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा.
(लेखक अार्थिक मामलों के जानकार हैं, ये इनके निजी विचार हैं)




