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2015-18 : पिछले चार वर्षों में 56 लोगों की भुखमरी से मौत

अबतक 16 लोगों की मौत भूख से झारखंड में

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Reetika Khera and Siraj Dutta

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Ranchi: पिछले कुछ वर्षों में भूख से मौतों की खबरें लगातार आती रही हैं. इनमें से झारखंड की 11 वर्षीया संतोषी कुमारी की मृत्यु खास कर बेहद दुखद थी. संतोषी 28 सितंबर 2017 को अपनी मां को भात-भात कहते-कहते चल बसी. बाद में पता चला कि आधार से लिंक न होने के कारण उसके परिवार का राशन कार्ड रद्द कर दिया गया था. मई-जुलाई 2017 में झारखंड सरकार ने व्यापक पैमाने पर बिना आधार से जुड़े राशन कार्डों को रद्द किया था.

संतोषी की पुण्यतिथि पर हम लोगों ने 2015 से लेकर अभी तक भूख से हुई मौतों (जिनकी जानकारी उपलब्ध है) की सूचि समेकित की है. हमारे हिसाब से अगर कोई व्यक्ति, घर में खाना या पैसा न होने के कारण लंबे समय से भूखा रहता है एवं उसकी मृत्यु होती है तो उसे भूख से मौत मान सकते है. इसमें इस बात का भी ध्यान खा गया है कि यदि उसे समय से खाना या पैसा मिलता, तो शायद उसकी मृत्यु नहीं होती. अंग्रेजी व हिंदी खबरों के गूगल सर्च पर आधारित यह एक आंशिक सूची है.

पिछले चार वर्षों में कम-से-कम 56 लोगों की भुखमरी से मौत हुई है. इनमें से 42 मौतें 2017 व 2018 में हुई हैं. यह भारत के गरीबों के जीवन में अनिश्चितता की स्थिति को दर्शाता है. गरीबों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन और जन वितरण प्रणाली जीवन रेखा के समान है. अधिकांश मौतें पेंशन या जन वितरण प्रणाली से राशन न मिलने के कारण हुई हैं. भुखमरी के शिकार हुए अधिकतर व्यक्ति वंचित समुदायों जैसे आदिवासी, दलित व मुसलिम समुदाय के हैं.

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18 मौतों के पीछे आधार

2017 और 2018 में जो 42 मौतें हुईं, उनमें से 25 आधार संबंधित समस्याओं के कारण हुई थीं. इनमें से कम-से-कम 18 मौतों के लिए सीधे तौर पर आधार ज़िम्मेदार था (सूची में पीले व बोल्ड हाइलाइट्स देखें). मुख्य कारण हैं: आधार से न जुड़े होने के कारण राशन कार्ड का रद्द हो जाना या पेंशन सूची से नाम कट जाना व आधार-आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था की विफलता. कई राज्यों में जन वितरण प्रणाली में आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था अनिवार्य है. इनके अलावा 7 मौतें संभवतः आधार के कारण ही हुई हैं (सूची में केवल पीले हाइलाइट्स को देखें). इनमें से अधिकतर व्यक्ति अपने राशन या राशन कार्ड से वंचित थे, जिसके लिए आधार ज़िम्मेवार हो सकता है.

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झारखंड और उत्तर प्रदेश में ज्यादा मौतें

भूख से मौत की खबरें झारखंड और उत्तर प्रदेश से लगातार आती रही हैं. अभी तक इन दोनों राज्यों से 16-16 व्यक्तियों की मृत्यु की सूचनाएं मिली हैं. झारखंड में आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था लगभग हर राशन दुकान में अनिवार्य है. उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून को देर से व अव्यवस्थित तरीके से लागू किया है.

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बड़ी खबर नहीं बन पाती “भूख से मौत”

एक स्वस्थ और जीवंत लोकतंत्र में भूख से मौत बड़ी खबर होनी चाहिए व इस पर गंभीर चर्चा और सक्रिय प्रतिक्रिया होनी चाहिए. चंद मौतें कुछ हद तक चर्चित तो हुई हैं, लेकिन उस चर्चा से ऐसा निरंतर दबाव नहीं बन सका जिससे भूख से मौतों को रोकने के लिए सरकार को कार्रवाई करने के लिए विवश किया जा सके. इनमें से अधिकतर मामले ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ के दौर में मुख्य समाचार का हिस्सा भी नहीं बन पाये. जन वितरण प्रणाली में आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था से व्यापक पैमाने पर हो रही समस्याओं के बावज़ूद केंद्र सरकार इसे पूरे देश में अनिवार्य करने पर लगी हुई है.

This table was prepared by Reetika Khera and Siraj Dutta, with contributions from Swati Narayan and the right to food campaign in  Odisha, Jharkhand, West Bengal and Delhi.

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