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बिजली संकट : BJP MLA ढुल्लू महतो की वजह से बिजली कंपनियों को नहीं मिल रहा 6-7 लाख टन कोयला, क्या यह राष्ट्रद्रोह नहीं!

Ranchi/Dhanbad: देशभर में बिजली की समस्या है. झारखंड के सात जिलों में ब्लैक आउट की स्थिति है. पर, क्यों? बहुत कम लोगों को पता है कि इसके पीछे की एक बड़ी वजह सत्ताधारी दल भाजपा विधायक ढ़ुल्लू महतो का कारगुजारी है. धनबाद में मोदीडीह नाम की एक कोलियरी है. पांच माह पहले तक इस कोलियरी से हर महीने 6-7 लाख टन कोयला बिजली कंपनियों को भेजा जाता था. जो अब बंद है. क्योंकि श्रमिक हितों की आड़ में ढ़ुल्लू महतो और उसके लोगों को वहां से प्रति टन 160 रुपया चाहिए. मोदीडीह कोलियरी में भले ही इसे रंगदारी का नाम दिया जाता है, लेकिन टंडवा में इसी को लेवी कहते हैं. मोदीडीह में यह सिर्फ एक आपराधिक मामला माना जाता है, जबकि टंडवा में इसे राष्ट्रद्रोह की संज्ञा दी जाती है. टंडवा में वसूली पर तो सरकार की सभी एजेंसियां रिपोर्ट करती हैं, जांच करती हैं, लेकिन धनबाद के मोदीडीह में क्या हो रहा है. ना कोई रिपोर्ट, ना कोई जांच, ना ही कोई प्राथमिकी. सभी चुप हैं, क्योंकि ढ़ुल्लू महतो सत्ताधारी भाजपा के विधायक हैं और सत्ता के करीबी भी.

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ट्रांस्पोर्टरों ने नहीं मानी ढुल्लू की शर्त, बंद हुआ उठाव

मोदीडीह कोलियरी से कोयले का ट्रांसपोर्टिंग पांच महीने से ठप है. वहां से रघुनाथपुर थर्मल पावर प्लांट, आधुनिक टाटा पावर प्लांट, मैथन पावर प्लांट को कोयला डिस्पैच होता था. पांच महीने पहले भाजपा विधायक ढ़ुल्लू महतो के इशारे पर उसके समर्थकों ने श्रमिकों के हित का बात कहकर कोयला ट्रांसपोर्टिंग बंद करा दिया. ढुल्लू महतो के लोगों के द्वारा प्रति टन 160 रुपये की मांग की जा रही थी. कोई ट्रांसपोर्टर देने के लिए तैयार नहीं था. इसलिए कोयला का ट्रांसपोर्टिंग बंद करा दिया गया. ट्रांसपोर्टरों ने जिस दर पर ट्रांसपोर्टिंग का काम लिया था, उससे प्रति टन 160 रुपया रंगदारी (लेवी) देना संभव नहीं था. ट्रांसपोर्टरों को उम्मीद है कि अगले टेंडर में जब कंपनी प्रति टन 160-200 रुपया बढ़ाकर रेट देगी, तभी मोदीडीह से कोयला को उठाना संभव है. हालांकि करीब 20-25 दिन पहले आधुनिक-टाटा पावर प्लांट के ट्रांसपोर्टर ने ढ़ुल्लू महतो की मांग मान ली है. जिसके बाद से उसका कोयला उठाव शुरू हो गया है.

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विधायक की रंगदारी का सीधा असर बिजली कंपनियों पर

रघुनाथपुर थर्मल पावर प्लांट की बिजली उत्पादन की क्षमता करीब 1200 मेगावाट है. कोयले की कमी के कारण वहां से सिर्फ 350 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है. इसी तरह मैथन थर्मल पावर प्लांट की उत्पादन क्षमता 1000 मेगावाट है. कोयले की कमी की वजह से यहां से भी नियमित बिजली उत्पादन नहीं हो पा रहा है. इसी तरह आधुनिक टाटा पावर प्लांट की उत्पादन क्षमता 540 मेगावाट है. कोयले की कमी के कारण करीब चार महीने तक इस प्लांट से भी क्षमता से बहुत कम बिजली का उत्पादन हुआ.

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