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बिलकिस बानो व कठुआ का फैसला, पुलिस अफसरों के लिये सबक सीखने का वक्त

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Surjit Singh

गुजरात का बिलकिस बानो केस : वर्ष 2002 में गुजरात दंगे के दौरान हुए बिलकिस बानो केस में 30 मई 2019 को आईपीएस आरएस भगोरा को गृह मंत्रालय ने बर्खास्त कर दिया. मामले में गलत अनुसंधान करने और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप में अन्य सात पुलिसकर्मियों को भी सरकार को सजा देनी पड़ी.

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कठुआ रेप व मर्डर केस : नाबालिग बच्ची के साथ पहले दुष्कर्म और फिर हत्या के मामले में 10 जून को अदालत ने आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. साथ ही साक्ष्यों को नष्ट करने के आरोप में एक पुलिस पदाधिकारी समेत तीन को भी पांच साल कारावास की सजा सुनाई.

आइपीएस का वीरता पदक वापस : वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश कैडर के आइपीएस धर्मेंद्र चौधरी को दिया गया वीरता पदक वापस ले लिया. वर्ष 2002 में उन्होंने एक कुख्यात बदमाश लोहान खीमा को कथित रुप से एक एनकाउंटर में मार गिराया था. बाद में एनकाउंटर फर्जी पाया गया.

उपर की ये तीनों घटनाएं क्या संदेश देती हैं?  पुलिस के नीचे से उपर तक के अफसरों के लिये क्या सबक देती है?  देर से ही सही न्याय जरुर मिलता है. सत्ता शीर्ष के इशारे पर या भ्रष्टाचार के कारण किये गये गुनाह, नाइंसाफी, कानून के दायरे से बाहर जाकर काम करने के गुनाह की सजा जरुर मिलती है. देर से ही सही, पर मिलती जरुर है. सत्ता, पहुंच औऱ पावर काम नहीं आता.

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अदालत के दोनों फैसलों का एक संदेश यह भी है कि वैसे पुलिस अफसर सबक लें, जो सिर्फ सत्ता के करीब आने या बने रहने, अच्छी पोस्टिंग पाने या अपने सीनियर के कहने पर साक्ष्यों के साथ खिलवाड़ करना कितना महंगा सौदा हो सकता है. बुढ़ापा खराब हो सकता है. बिलकिस बानो के केस में आईपीएस आरएस भगोरा को रिटायरमेंट से एक दिन पहले बर्खास्त करने के मामले में एक गजब का संयोग भी है. जब घटना हुई थी, तब गुजरात के गृह राज्य मंत्री अमित शाह थे और जिस तारीख को भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने उनकी बर्खास्तगी का आदेश जारी किया, उस वक्त गृह मंत्री भी वही हैं, अमित शाह.

झारखंड में भी ऐसी कई घटनाएं हुई हैं. बकोरिया कांड, फर्जी नक्सल सरेंडर केस, जमीन का घपला, कोयला कारोबारियों से वसूली आदि. इन घटनाओं में पुलिस के अफसरों ने कायदे से बाहर निकल कर वह सब किया, जो उन्हें नहीं करने चाहिये थे. सत्ता, पावर, प्रसिद्धि, महत्वकांक्षा के चक्कर में. पर, वह भूल गये हैं. समय सबसे बड़ा होता है. पता नहीं समय का पहिया कब घूम जाये. तब कोई बचाने वाला सामने नहीं आता. अफसरों को यह नहीं भूलना चाहिये कि भूतकाल में किये गये पाप, काले कारनामों का साया, पूरी जिंदगी साथ चलता है.

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