
Saurav Singh
Ranchi: राज्य के 46 पुलिस इंस्पेक्टर को जल्द ही डीएसपी के पद पर प्रमोशन मिलने वाला है. प्रमोशन के लिए आवश्यक कवायद शुरू कर दी गयी है. गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय से रोस्टर के आधार पर संबंधित पुलिस अफसरों की लिस्ट के साथ जरूरी दस्तावेज मांगा है, ताकि उनके प्रमोशन की प्रक्रिया पूरी की जा सके.
पुलिस के जिन 46 जूनियर अफसरों को प्रमोशन दिया जाना है, उनमें 33 अनारक्षित कोटे के हैं. जबकि आठ अनुसूचित जनजाति और पांच अनुसूचित जाति के पद हैं. पुलिस इंस्पेक्टर के अलावा सार्जेंट मेजर एवं सशस्त्र बल के पुलिस इंस्पेक्टरों को भी प्रमोशन दिया जाना है.
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लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह है कि डीएसपी रैंक में प्रमोशन पाने वाले इंस्पेक्टरों की फेहरिस्त में ऐसे कई नाम हैं जो अलग-अलग मामलों में आरोपी रहें हैं. उन्हें दोषी भी पाया गया. पर बाद में सीनियर अफसर के द्वारा अचानक से दोषमुक्त कर दिया गया.
न्यूज विंग की पड़ताल में यह सामने आया है कि प्रमोशन पाने वाले लिस्ट में कुछ ऐसे नाम हैं, जो एसपी स्तर के अधिकारी की जांच में दोषी पाये गये हैं. लेकिन सीनियर अधिकारियों ने प्रमोशन लिस्ट बनने से कुछ दिन पहले क्लिन चिट दे दी है.
यहां तक कि एक मामले में एनएचआरसी के आर्डर को भी दरकिनार कर दिया गया है. न्यूज विंग के पास ऐसे कुछ केस स्टडी हैं जिसे इस खबर के माध्यम से रखा जा रहा है.
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केस स्टडी 1
इंद्रासन चौधरी: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपनी टीम और मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट के आधार पर नौ जून 2015 को हुई चर्चित बकोरिया कांड (पलामू) को संदेहास्पद पाया था.
आयोग ने जांच के दौरान इस कांड के अनुसंधान में कई खामियां पायी हैं. इससे पहले आयोग ने मामले के अनुसंधानकों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश पुलिस मुख्यालय को दिया था.
इस मामले में इंस्पेक्टर इंद्रासन चौधरी को भी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दोषी पाया था. आयोग के निर्देश पर विभाग ने उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उनका तबादला बोकारो जिला कर दिया. डीएसपी के लिए जो लिस्ट तैयार किया गया है, उसमें इंद्रासन चौधरी का भी नाम है.
केस स्डटी 2
अशोक कुमार: जामताड़ा की महिला सिपाही पिंकी कुमारी ने यौन शोषण के मामले जामताड़ा के तत्कालीन सार्जेंट मेजर अशोक कुमार के खिलाफ शिकायतवाद दर्ज करायी थी.
पाकुड़ एसपी उनके खिलाफ विभागीय कार्रयवाही संचालित कर रहे हैं. जाहिर तौर पर मामले में अशोक कुमर आरोपी हैं. लेकिन सारी बातों को दरकिनार कर इन्हें भी डीएसपी रैंक में प्रमोशन के लिए बनी लिस्ट में अशोक कुमार का नाम है.
केस स्टडी 3
शिव शंकर तिवारी: पाकुड़ जिले के महेशपुर थाना में दर्ज हुए केस 1/18, 2/18 का सुपरविजन रिपोर्ट निकला था. इस रिपोर्ट में इंस्पेक्टर शिव शंकर तिवारी ने पीड़ित के महीना भर तक अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद 307 की धारा हटा दी.
जबकि धारा 120 (8) के अनुसार 20 दिन से ज्यादा अस्पताल में रहने पर धारा 307 लगाना अनिवार्य है. लेकिन इंस्पेक्टर शिव शंकर तिवारी ने कानूनी प्रक्रिया को ताक पर रखते हुए 307 का धारा हटा दिया. इस मामले में शिव शंकर तिवारी को निलंबित किया गया था. उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही चली. विभागीय कार्यवाही में देवघर के एसपी ने उन्हे दोषी पाया. लेकिन कुछ दिन पहले दुमका के डीआइजी ने उन्हे दोष मुक्त कर दिया.
केस स्टडी 4
इंदुशेखर झा: पाकुड़ नगर थाना क्षेत्र में बेथनी स्कूल के प्राचार्य पर छात्रा के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए कुछ लोगों ने मारपीट की. घटना की सूचना मिलने के बाद के बाद भी नगर थाना के इंस्पेक्टर पद पर तैनात इंदुशेखर झा ने तत्काल कार्रवाई नहीं की. कनीय पुलिस को घटनास्थल पर भेजा. और प्राचार्य के खिलाफ कांड संख्या60/2018 दर्ज कर लिया. जबकि सीसीटीवी फुटेज में स्कूल के प्राचार्य पर लगे आरोप गलत पाये गये. इस मामले में पुलिस ने प्राचार्य के साथ मारपीट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नही की. प्राथमिकी दर्ज नहीं की.
इसके लिए सीनियर अफसरों ने इंस्पेक्टर इंदुभूषण झा को दोषी पाया और उन्हें सस्पेंड कर दिया. विभागीय कार्यवाही में भी दोषी पाये गये. इन्हे भी कुछ दिन पहले दुमका डीआइजी ने दोषमुक्त कर दिया.




