
Pravin Kumar
Ranchi: बीजेपी 65 पार का लक्ष्य भेदने के मकसद से उन सीटों पर जोर दे रही है जहां कम अंतर से 2014 के विधानसभा में शिकस्त मिली थी. इस चुनाव की बात करें तो मासस के अरूप चटर्जी ने कांटे की टक्कर के बाद फतह हासिल की है. भाजपा के गणेश मिश्रा ने उन्हें कड़ी टक्कर दी.
और पहली बार भाजपा इस सीट पर दूसरा स्थान पर रही. भाजपा कम अंतर से मिली शिकस्त वाली सीट को लेकर विशेष राणनीति के साथ काम कर रही है. वहीं सूत्रों के अनुसार 2019 के विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी ने तीन नामों का पैनल शार्ट लिस्ट किया है. 2014 के विधानसभा में मासस को 51581 वोटों मिले थे, जबकि भाजपा को 50546. मार्क्सवादी समन्वय समिति के उम्मीदवार अरूप ने महज 1035 वोटों से चुनाव जीता.
निरसा सीट से किसका हुआ नाम शार्ट लिस्ट
गणेश मिश्रा – सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने निरसा सीट पर जिन नामों को शॉर्ट लिस्ट किया है उसमें 2014 में महज 1035 वोटों से चुनाव हारे गणेश मिश्रा का नाम शामिल है. गणेश मिश्रा आरएसएस से जुड़े हैं. जानकारी के मुताबिक बीजेपी के प्रदेश प्रशिक्षण प्रभारी भी हैं. हाल के दिनों में गौ एवं कोयला तस्करी में उनके करीबियों के नाम आने के कारण नाम शॉर्ट लिस्ट होने के बाद भी उनका टिकट अधर में लटक सकता है.
हालांकि गणेश मिश्रा मासस को शिकस्त देने के लिए खुद को दोबारा प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर केंद्रीय नेताओं की परिक्रमा भी कर रहे है. सूत्रों के मुताबिक अपनी दावेदारी बचाने के लिए भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा का परिक्रमा भी करना शुरू कर दिया है. इनका आरएसएस की टॉप लीडरशिप में बेहतर पकड़ है. जबकि भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, राष्ट्रीय सचिव महेंद्र पांडे से बेहतर संबध हैं.
अर्पणा सेनगुप्ता- निरसा सीट से उम्मीदवार के रूप में अर्पणा सेन गुप्ता का भी नाम शॉर्ट लिस्ट किया गया है. लोकसभा चुनाव के दौरान प बंगाल में पार्टी ने महिला मोर्चा का चुनाव प्रभारी बनाया था. पश्चिम बंगाल में भाजपा को कई सीटो पर बढ़त दिलाने को लेकर पार्टी में इनके कामों को सरहना मिली है. पश्चिम बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गी के करीबी मानी जाती हैं. अर्पणा सेनगुप्ता राजनीति जीवन की शुरुआत लाल झंडा के फारवर्ड ब्लॉक से की थी. बाद में भाजपा में शमिल हुईं.
अनीता गोराई- निरसा सीट के लिए भाजपा ने अनिता गोराई का नाम भी शार्ट लिस्ट किया है. अनीता निरसा के पत्थरकंआं से दो बार मुखिया रही हैं. अनीता की जमीनी पकड़ देखते हुए पार्टी ने उम्मीदवारों के पैनल में नाम शामिल किया है. हल ही में गोराई ने पार्टी के लोगों पर सोशल मिडिया के माध्यम से उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया है.
विछले चार चुनाव में निरसा से किसको मिला कितना वोट
2000 में मासस ने निरसा सीट पर कब्जा कायम रखा
2000 में हुए विधानसभा चुनाव में गुरदास चटर्जी मासस उम्मीदवार के तौर पर 37585 वोट लकर सीट पर कायम रहे. दूसरे स्थान पर सुब्रातो सेनगुप्ता रहे. उन्हें 36804 वोट मिले. तीसरे स्थान कांग्रेस के शंकर चटर्जी रहे उन्हें 21163 वोट मिले.
निरसा सीट फॉरवर्ड ब्लॉक खाते में
2005 में हुए विधानसभा चुनाव में अपर्णा सेनगुप्ता फॉरवर्ड ब्लॉक उम्मीदवार के रूप में 50533 वोट लाकर चुनाव जीती. वहीं दूसरे स्थान पर मासस के अरूप चटर्जी रहे. उन्हें 48195 वोट मिले. जबकि तीसरे स्थान पर रहे भारतीय जनता पार्टी के अशोक मंडल को 30673 वोट मिले.
मासस ने निरसा सीट पर फिर से किया कब्जा
2009 में हुए विधानसभा चुनाव में अरूप चटर्जी ने मासस उम्मीदवार के रूप में भारी मतों से चुनाव जीता. उन्हें 68916 वोट मिले. जबकि दूसरे स्थान पर रहे भाजपा के अशोक कुमार मंडल को 33379 वोट मिले. तीसरे स्थान पर फॉरवर्ड ब्लॉक उम्मीदवार अपर्णा सेनगुप्ता रहीं. उन्हें मात्र 17590 वोट मिले.
2014 में भाजपा जीत के करीब रही
2014 के विधानसभा चुनाव में मासस के अरूप चटर्जी मात्र 1035 वोटों के अंतर से चुनाव जीते. वहीं भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे. 2014 विधानसभा चुनाव में किसको मिला कितना वोट-
| अरूप चटर्जी (मासस) | 51581 मत |
| गणेश मिश्रा (भाजपा) | 50,546 मत |
| अशोक मंडल (झामुमो) | 43,329 मत |
| अपर्णा सेनगुप्ता (फाब्ला) | 23,633 मत |
| अनीता गोराई (निर्दलीय) | 11,123 मत |
| नागेंद्र कुमार (माले) | 3484 मत |




