
उपायुक्त लातेहार ने बैंक प्रक्रिया में बिलंब होने से लाभुकों के खाते में राशि का भुगतान नहीं हो सका
कई लाभुकों को अक्टूबर 2019 के बाद से नहीं मिला पेंशन
Latehar: सीएम बनने के बाद से ही हेमंत सोरेन एक्शन में हैं. कोई भी शिकायत आते ही तुरंत कार्रवाई के निर्देश दे रहे हैं. साथ ही सोशल मीडिया पर भी लोगों से जुड़कर समस्या की सुनवाई त्वरित कर रहे हैं. लेकिन कई बार अधिकारी भी सीएम को गलत रिपोर्ट दे देते हैं.
लातेहार जिला के वृद्धा पेंशन के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ है. दरअसल वृद्धा पेंशन के मामले में लातेहार प्रशासन ने मुख्यमंत्री को गलत सूचना दी थी. इस संबंध में मुख्यमंत्री द्वारा ट्विटर के माध्यम से समस्याओं के त्वरित निष्पादन की खबर भी आ रही है.
लेकिन इसके पीछे की जमीनी हकीकत कुछ और ही सामने आ रही है. क्योंकि ट्विटर के माध्यम से अधिकारियों द्वारा की गयी रिपोर्ट को सही मान लेना भी शायद उचित नहीं होगा. क्योंकि लातेहार के वृद्धा पेंशन मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ है.

लातेहार जिला के बरवाडीह प्रखंड के वृद्धा पेंशन के मामले ने जोर पकड़ लिया है. 7 जनवरी को सामाजिक कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र का भ्रमण किया. इस दौरान ग्रामीणों के साथ कार्यकर्ताओं की बैठक हुई. बैठक के दौरान ही जानकारी मिली कि बरवाडीह के कुचिला गांव में प्रेमा देवी, जिरुआ कुंवर, पनपतिया देवी, कुंती कुंवर, कलवा देवी, राजबली राम का पिछले 4 महीनों से वृद्धा पेंशन बंद है.
मामले को ट्विटर के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं जिला प्रशासन को अवगत कराया गया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले पर संज्ञान लेते हुए ट्वीट कर उपायुक्त को त्वरित कारवाई का आदेश दिया.

सीएम के आदेश के चंद घंटों के बाद ही लातेहार उपायुक्त ने मामले के निपटारे के संबंध में ट्वीट किया. लातेहार उपायुक्त ने ट्वीट में सूचना दी कि 3 दिन पहले ही वृद्धा पेंशन के सभी लंबित मामलों का भुगतान कर लिया गया है.
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जिला प्रशासन कहा था 4 जनवरी को राशि भेज दी गयी
उपायुक्त लातेहार ने सीएम के ट्वीट पर कहा था कि चार जनवरी को राशि भेज दी गयी है. इसके बाद उपायुक्त लातेहार की कार्रवाई की रिपोर्ट के सत्यापन के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फिर से गांव का दौरा किया. पेंशन आया है कि नहीं, इस वास्तविकता की जांच के लिए प्रज्ञा केंद्र में जांच भी करायी गयी.

लेकिन जांच जो बातें खुलकर सामने आयीं, उससे सबकी आंखें फटी रह गयीं. जांच में ये स्पष्ट रूप से सामने आया कि जिला प्रशासन द्वारा ट्वीट करके गलत सूचना दी गयी.


वृद्धा पेंशन का भुगतान अबतक नहीं किया गया है. दरअसल जब सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 7 जनवरी को प्रज्ञा केंद्र जाकर खाते का मिनी स्टेटमेंट निकाला. तो उसमें जानकारी मिली कि पेंशन का अंतिम भुगतान 5 अक्टूबर 2019 को हुआ है. और उसके बाद से कोई भुगतान वृद्धा पेंशन के लाभुकों को नहीं मिला है.
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पेंशन की उम्मीद में प्रज्ञा केन्द्र की दौड़ लगा रहे लाभुक
वृद्ध पेंशनधारी बेहद मुश्किल से जीवन काट रहे हैं. प्रेमा देवी ( उम्र:75) बीमार रहती हैं. इलाज में डेढ़ हजार का खर्च हो गया है. लेकिन अभी तक इलाज के पैसे नहीं दे पायी हैं.
पनपतिया देवी (उम्र 62) भी बीमार रहती हैं. इलाज में 2000 रुपया खर्चा हो गया है. लेकिन अभी तक चुका नहीं पायी हैं. जिरुवा कुंवर का भी विधवा पेंशन बंद है, जिससे वे लोगों से उधार लेकर अपना काम चला रही हैं. इससे उनपर दैनिक जरुरत की चीजें खरीदने की वजह से उधार बढ़ता ही जा रहा है.
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क्या कहते हैं डीसी लातेहार जीशान कमर
इस बारे में लातेहार डीसी जीशान कमर का कहना है कि, उपरोक्त लाभुकों के पेंशन का बिल बनाकर 4 जनवरी को ट्रेजरी में भेज दिया गया गया था. 4 जनवरी को ही पीसीएसएम किया हुआ है. ट्रेजरी क्लियर करता है, इसके बाद एडीएसएस के खाते में राशि हस्तांतरित होती है.

उसके बाद ही डिजिटल हस्ताक्षर से पीसीएसएम के माध्यम से डीवीटी होने के बाद लाभुकों के खाते में राशि जाती है. हम लोगों ने 4 तारीख को बिल बनाकर भेज दिया था. साथ ही कहा कि बैंक प्रक्रिया में देरी होने की वजह से आज संभवत: लाभुकों के खाते में राशि चली गयी होगी, या चला जायेगा.
रघुवर सरकार के कार्यकाल में हुई थी भूख से 19 मौतें
भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुई भूख से मौत का एक मुख्य कारण पेंशन की राशि का नहीं मिलना भी था. विपक्ष में रहते हुए हेमंत सोरेन ने सरकार पर लगातार सवाल किये.
अब झारखंडकी गरीब जनता को हेमंत सोरेन से ही उम्मीद है. साथ ही देखना है कि वृद्धा पेंशन जैसे गंभीर एवं संवेदनशील मामलों पर कैसे इसका समाधान निकालते हैं. इसपर भी सबकी नजरें टिकी हैं.
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