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107 वर्षीया वेजुबेन मेहता ने किया संथारा, धनबाद जिले में ऐसी पहली घटना

Dhanbad : श्वेताम्बर जैन संथारा के सातवें दिन सोमवार को 107 वर्षीय वेजुबेन मेहता ने फतेहपुर लेन रोड झरिया स्थित अपने आवास में शरीर त्याग दिया.

एक जुलाई से वेजुबेन श्वेतांबर जैन परंपरा के अनुसार संथारा में थीं. धनबाद जिले में संथारा की यह पहली घटना है.

 

जैन धर्म में ऐसी मान्यता है कि जब कोई व्यक्ति या जैन मुनि अपनी ज़िंदगी पूरी तरह जी लेता है और शरीर उसका साथ देना छोड़ देता है तो उस वक्त वो संथारा ले सकता है.

संथारा के आठवें दिन मंगलवार को झरिया फतेहपुर आवास से वेजुबेन  मेहता की विशेष पालकी यात्रा बस्ताकोला मुक्तिधाम के लिए निकली. इसके पूर्व आवास में राष्ट्र संत पूज्य गुरुदेव नम्रमुनि की आज्ञा से मंगल पाठ हुआ. जैन समाज के सैकड़ों लोग इस अवसर पर शामिल हुए.

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मंदिर के कलश रोहण की तरह है संथारा

संथारा के बारे में जैन समाज के लोग कहते हैं कि जिस प्रकार आप मंदिर बना लो, उसके शिखर बना लो, लेकिन उसमें कलश रोहण नहीं करो तो वह पूर्ण नहीं होता है, इसी प्रकार संथारा भी मानव जीवन में कलश रोहण की भांति है. व्यक्ति के जीवन का अंतिम पड़ाव कलशारोहण रूपी संथारा है.

अन्न त्याग देता है व्यक्ति

संथारा को संलेखना भी कहा जाता है. संथारा एक धार्मिक संकल्प है. इसके बाद वह व्यक्ति अन्न त्याग करता है और मृत्यु को प्राप्त करता है.

स्थानकवासी जैन संघ झरिया के अध्यक्ष दीपक उदानी व वेजुबेन के पोता मिलन मेहता ने बताया कि राष्ट्रसंत पूज्य नम्र मुनि की आज्ञा व घर के सदस्यों की सहमति के बाद एक जुलाई से वेजुबेन ने अपनी इच्छा के अनुसार संथारा लिया था.

इसकी जानकारी समाज को दी. आठ जुलाई के दोपहर पौने तीन बजे संथारा पूर्ण होने पर इसकी जानकारी समाज के लोगों को दी गयी. इसके बाद समाज के लोग वेजुबेन के दर्शन को पहुंचे.

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पोते ने किया अग्नि संस्कार 

मुक्तिधाम बस्ताकोला में वेजुबान के पोता मिलन भाई ओझा ने अग्नि संस्कार किया. इसके बाद वेजुबेन पंचतत्व में विलीन हो गयीं. विशेष पालकी यात्रा में श्री श्वेतांबर स्थानकवासी जैन संघ झरिया के अध्यक्ष दीपक उदानी, दिनेश कोठारी, हरीश जोशी, विपिन मटालिया, आनंद मटालिया, नरेश वोरा, गिरीश वोरा, भूपेश संघवी, महेंद्र संघवी आदि थे.

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