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झारखंड के उन उम्मीदवारों को जानिए जिनकी जीतने की संभावना है कम, लेकिन होंगे गेमचेंजर

झारखंड में 14 में से करीब नौ लोकसभा क्षेत्र में ऐसा समीकरण देखने को मिल रहे हैं.

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Akshay Kumar Jha

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Ranchi: किसी भी चुनाव में जीत एक की होती है. दूसरे नंबर पर रहने वाला भी एक ही होता है. लेकिन जीत और हार के बीच एक ऐसा कैरेक्टर होता है, जो किसी की झोली में जीत डाल देता है, तो किसी के खाते में हार. चुनाव के बाद ऐसे उम्मीदवारों को वोटकटवा भी कभी-कभी करार दिया जाता है. ऐसा जरूरी नहीं है कि ऐसे उम्मीदवार हमेशा छोटे चेहरे या छोटी पार्टी के हों.

कई बार ये काफी बड़े कद और बड़ी पार्टी के होते हैं. झारखंड में 14 में से करीब नौ लोकसभा क्षेत्र में ऐसा समीकरण देखने को मिल रहे, जिससे तयशुदा जीत एक कड़ी टक्कर में इन नेताओं की वजह से बदल रही है. कुछ लोकसभा क्षेत्र में ऐसे कैरेक्टर के नेता मुख्य धारा के नेता भी साबित हो सकते हैं. जानते हैं उन लोकसभा क्षेत्र और जीत या हार दिलाने वाले ऐसे कैरेक्टरों को.

रांची लोकसभा क्षेत्र : झारखंड के इस वीवीआईपी सीट पर बीजेपी ने सभी को चौंकाने वाला काम किया है. उम्र सीमा को आधार मानते हुए रामटहल चौधरी का टिकट कट गया. जो अब बीजेपी के लिए नासूर साबित हो रहे हैं. रामटहल चौधरी ने निर्दलीय चुनाव की तैयारी कर ली है. नामांकन हो चुका है. बेटे ने भी पार्टी को अलविदा कह दिया है.

कांग्रेस से सुबोधकांत सहाय मैदान में हैं. अगर रामटहल चुनावी मैदान में नहीं होते तो सीधी टक्कर बीजेपी और कांग्रेस के बीच होती. लेकिन अब ऐसा नहीं है. रामटहल चौधरी चुनावी मैदान में गेमचेंजर की भूमिका में हैं. अगर उन्होंने कुर्मी जाति के वोटों का ध्रुवीकरण कर लिया, तो बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों को इसका खामियाजा भरना पड़ सकता है.

कोडरमा लोकसभा क्षेत्र : कोडरमा लोकसभा क्षेत्र के जो हालात फिलहाल दिख रहे हैं, उससे मामला उलझता दिख रहा है. हर जगह फाइट बीजेपी और महागठबंधन के बीच हो रही है. लेकिन यहां भाकपा माले से चुनाव लड़ रहे राजकुमार यादव गेमचेंजर की भूमिका में हैं. इससे पहले दो बार वो लोकसभा चुनाव में दो नंबर पर रहे हैं. उन्हीं की काट के तौर पर बीजेपी ने भी यादव चेहरा अन्नपूर्णा देवी पर अपना दांव आजमाया है. बाबूलाल मरांडी भी कोडरमा से दो बार सांसद रह चुके हैं. ऐसे में यहां टक्कर कांटे की मानी जा रही है. इस त्रिकोणीय लड़ाई में बाजी कौन मार ले जाएगा, कहना बड़ा मुश्किल है.

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चतरा लोकसभा क्षेत्र : चतरा लोकसभा के लिए राजद ने गठबंधन धर्म को भी ताक पर रख दिया. महागठबंधन के उम्मीदवार कांग्रेस से मनोज यादव के उतरने के बावजूद राजद से सुभाष यादव मैदान में हैं. दोनों यादव चेहरा अपनी जाति के वोटरों को लुभा रहे हैं. सुभाष यादव का जनाधार चतरा लोकसभा में उतना नहीं है. बीजेपी से फिर से चुनाव लड़ने आए सुनील सिंह लगातार लोगों के विरोध का सामना कर रहे हैं. माना जा रहा है कि इस लोकसभा क्षेत्र में सुभाष यादव गेमचेंजर की भूमिका में रहेंगे.

गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र : पांच बार सांसद रह चुके रवींद्र पांडे का टिकट यहां से कट गया. पहले तो उन्होंने पुरजोर विरोध किया. बाद में सरेंडर मोड में चले गए. अगर रवींद्र पांडे इस लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ते तो वो आजसू और जेएमएम दोनों के लिए सिर का दर्द बनते.

इनके अलावा महतो बहुल्य इस लोकसभा क्षेत्र में कुछ महतो उम्मीदवार मैदान में उतर रहे हैं. शिवसेना के टिकट से सिम्मी महतो और जेएमएम(उलगुलान) के टिकट से भी महतो उम्मीदवार उतारने की तैयारी है. इस लोकसभा सीट के लिए कहा जा सकता है कि जेएमएम के अलावा जितने भी महतो उम्मीदवार मैदान में उतरेंगे वो जेएमएम के टिकट से चुनाव लड़ रहे जगरनाथ महतो के लिए सिरदर्द बनेंगे.

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लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र : लोहरदगा में सीधी फाइट बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवार के बीच है. दोनों पार्टी की तरफ से भगत उम्मीदवार मैदान में हैं. कांग्रेस से सुखदेव भगत और बीजेपी से सुदर्शन भगत. इन दोनों के अलावा देवकुमार धान झारखंड पार्टी से मैदान में हैं. कहा जा रहा है कि देवकुमार धान सीट निकाल लें, ऐसा होने की संभावना कम है. लेकिन देवकुमार धान जीत के लिए निर्णायक हो सकते हैं. बीजेपी के वोटों में इनकी सेंधमारी हो सकती है.

खूंटी लोकसभा क्षेत्र : खूंटी लोकसभा क्षेत्र में भी सीधी टक्कर बीजेपी के अर्जुन मुंडा और कांग्रेस के कालीचरण मुंडा के बीच है. लेकिन झारखंड पार्टी के अजय टोप्पो ने दोनों मुंडा के वोटों में सेंधमारी करने की योजना बना ली है. अजय टोपनो के बारे कहा जा रहा है कि इनका जनाधार ऐसा नहीं है कि वो सीट निकाल सकें. लेकिन इस लोकसभा चुनाव में यह परेशानी का सबब कांग्रेस और बीजेपी के लिए जरूर बनने जा रहे हैं.

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धनबाद लोकसभा क्षेत्र : भले ही धनबाद में कांग्रेस ने एक बड़ा रिस्की दांव खेला हो. लेकिन लड़ाई बीजेपी के पीएन सिंह और कांग्रेस के कीर्ति आजाद के ही बीच माना जा रहा है. कीर्ति आजाद का कुछ जगहों पर विरोध भी हो रहा है. लेकिन इस विरोध को सीधे तरीके से हार से जोड़कर नहीं देखा जा सकता. इस बीच अगर सिंह मेंशन की तरफ से संजीव सिंह के भाई सिद्धार्थ सिंह निर्दलीय चुनाव लड़ते हैं, तो वो पीएन सिंह के लिए थोड़ा सिरदर्द जरूर बन सकते हैं. फॉर्वर्ड क्लास के वोटरों और झरिया के कुछ इलाकों में इनकी पकड़ा अच्छी मानी जा रही है. इनके भी बारे में कहा जाता है कि भले ही ये कुछ वोट इधर से उधर कर दें. लेकिन जीत से दूर ही रहेंगे.

पलामू लोकसभा क्षेत्र : यहां भी सीधी लड़ाई बीडी राम और घूरन राम के बीच ही मानी जी रही थी. लेकिन झारखंड के पूर्व मंत्री दुलाल भुइंया ने अपनी पत्नी अंजना देवी को मैदान में उतारकर कुछ वोटों को इधर से उधर करने का काम कर दिया है. दुलाल इससे पहले जेएमएम के कद्दावर नेता थे. सूबे में मंत्री बने. सीबीआई कोर्ट ने उन्हें आय से अधिक संपत्ति के मामले में पांच साल की सजा सुनाई है. वो फिलहाल जमानत पर बाहर हैं. उनकी पत्नी ने बीएसपी से नामांकन दाखिल किया है. कहा जा रहा है कि इनके जीतने की संभावना काफी कम है. लेकिन ये क्षेत्र में गेमचेंजर का काम कर सकते हैं.

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हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र : कांग्रेस के उम्मीदवार फाइनल करने से पहले कहा जा रहा था कि भाकपा के भुनेश्वर मेहता के लिए कांग्रेस यह सीट छोड़ सकती है. लेकिन गोपाल साहू के कांग्रेस की तरफ से मैदान में उतरने के बाद भुनेश्वर मेहता का काम खराब हो गया माना जा रहा है. हालांकि इससे पहले दो बार हजारीबाग से सांसद रह चुके हैं.

बीजेपी के दिग्गज नेता यशवंत सिन्हा को पटखनी दे चुके हैं. लेकिन अभी जो हालात में उसमें यह दोनों उम्मीदवारों के वोट काटने का ही काम करेंगे. कहा जा रहा है कि जीतने की संभावना काफी कम है.

पांच सीटों पर सीधी है फाइट

झारखंड के पांच लोकसभा क्षेत्र में बीजेपी और महागठबंधन के बीत सीधी फाइट मानी जा रही है. जमशेदपुर, चाईबासा, दुमका, गोड्डा, और राजहमल इनमें शामिल हैं. जमशेदपुर में फिलहाल विद्युत बरन महतो और चंपई सोरेन के बीच कोई नहीं दिख रहा. चाईबासा में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और गीता कोड़ा के बीच कोई नहीं दिखा रहा. दुमका में भी जेएमएम के शिबू सोरेन और सुनील सोरेन के बीच कोई नहीं है. गोड्डा में बीजेपी के निशिकांत दुबे से महागठबंधन की तरफ से जेवीएम से लड़ प्रदीप यादव के बीच नॉक आउट फाइट है. वहीं राजमहल में भी जेएमएम के विजय हांसदा और बीजेपी के हेमलाल मुर्मू के बीच कोई नहीं दिख रहा.

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