न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

जन संगठनों ने महागठबंधन को लोकसभा चुनाव में दिया तात्कालिक समर्थन

जनमुद्दों पर पर काम नहीं हुआ तो विधनसभा चुनाव में जन संगठनों की होगी अलग राह- दयामनी बरला

1,456

Ranchi:  जन आंदोलनों के संयुक्त मोर्चा की ओर से रांची प्रेस क्लब में संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया.

mi banner add

सम्मेलन को संबोधित करते हुए दयामनी बरला ने कहा कि आज राज्य में जो हालात बने हैं, इसके लिए सत्तापक्ष के साथ विपक्ष भी कम दोषी नही है. फिर भी देश में संविधान और संवैधनिक संस्थानों पर खतरे को देखते हुए महागठबंधन को समर्थन फैसला लिया गया है.

जन आंदोलन के लोग जनमानस से जुड़े मुद्दों के लिए राज्य बनने के पूर्व से ही संघर्ष करते रहे हैं. अगर कोई दल राजनीतिक हित के लिए राज्य की जनता के से खिलवाड़ करना चहेगा तो उन दलों को भी राज्य की जनता सबक सिखाने का काम करेगी.

लोकसभा चुनाव के बाद जन आंदोलन के साथी राज्य में झरखंडी सरकार बने, इसके लिए राज्य की सभी विधानसभा सीटों पर संगठन को मजबूत करने का काम करेंगे.

इसे भी पढ़ेंः पीएम मोदी की रैली के लिए मैदान नहीं मिल रहे भाजपा को, आसनसोल-बोलपुर की रैली कैसे करेंगे मोदी, कोर्ट जाने को तैयार भाजपा

महागठबंधन ने जनसरोकर के विषय पर कार्य नही किया तो विधासभा चुनाव में समर्थन नहीं

राज्य में महागठबंधन का जो स्वरूप तैयार हुआ है इसके लिए जन आंदोलनों के द्वारा प्रयास दो सालों से हो रहा था.

जन आंदोलनों के मुद्दे पर अगर महागठबंधन के नेता कार्य नही करते तो इसका पूरा दोष महागठबंधन में शामिल दलों के शीर्ष नेताओं पर जायेगा. राज्य की दुर्दशा का अदांजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय दल चुनाव जीतने के लिए करोड़ रुपया खर्च कर रहे है. जो नामांकन में दिख रहा है.

वहीं पिछले एक वर्ष में भूख से 19 लोगो की मौत राज्य में होती है. पत्थलगड़ी के नाम पर खूंटी के मुंडा आदिवासियों का दमन किया जाता है.

राजनीतिक दल एक बार जाते हैं और मुद्दे को भूल जाते हैं. इस हालत में विपक्षी दलों को जन आंदोलन अन्तिम मौका दे रहे हैं.

इसे भी पढ़ेंः पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहम्मद अली अशरफ फातमी ने राजद को कहा बाय-बाय, मधुबनी से निर्दलीय लड़ेंगे चुनाव

इन मुद्दों पर दिया गया सर्शत समर्थन

  • पत्थलगड़ी मामले में कुल 29 केस दर्ज कर 150 नामजद ग्रामीणों तथा 15000 अज्ञात निर्दोष ग्रामीणों को प्रताड़ित किया गया. इन मुकदमों को खत्म कर उनको न्याय दिलाना.
  • खूंटी के ग्रामीण, जिन्होंने 2018 के मानसून महीने में पुलिसिया दमन की वजह से गांव छोड़ा था, धान की खेती नहीं कर पाये थे, फलस्वरूप उनके पास साल भर खाने को अनाज नहीं है. उनके भरण-पोषण की व्यवस्था करवाना.
  • वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत वनोत्त्पाद में ग्रामीणों के अधिकार को पूर्ण रूप से लागू कराना तथा सभी आदिवासियों मूलवासियों को, जिनका वन पट्टा रद्द किया गया, अविलंब उनको वन पट्टा दिलवाना,  साथ ही नये आवेदनों को स्वीकृत करवाना.
  • एफआरए के तहत वन कर्मियों को घातक हथियार के इस्तेमाल की दी गयी छूट को तत्काल खारिज करवाना.
  • मर्ज करने के नाम पर क्षेत्र के बंद किये गए सभी सरकारी स्कूलों को पुन: खुलवाना साथ ही स्कूल का इस्तेमाल सिर्फ शिक्षा के लिए हो, ये सुनिश्चित करवाना.
  • मानव तस्करी को खत्म करना तथा तस्करों के चंगुल से बचाकर लाये गये लोगों के लिए रोजगार की व्यवस्था करवाना.
  • आदिवासी मूलवासियों युवा को रोजगार के लिए बिना शर्त छोटी पूंजी की व्यवस्था करवाना.
  • ग्रामसभा को क्षेत्र का विकास करने हेतु शिक्षा और स्वास्थ्य पर पूर्ण नियंत्रण तथा बालू घाट खनन कार्य ठेकेदारी में 80 फीसदी हिस्सेदारी दिलवाना.
  • क्षेत्र में सिंचाई की उचित व्यवस्था तथा कृषि विकास केंद्र खोलकर कृषि को बढ़ावा दिया जाना. साथ ही किसानो को बीज और खाद में उचित सब्सिडी दिया जाना.  
  • आदिवासियों को उनकी जमीन पर गैर मजरुआ जमीन का मालिकाना हक दिलाना.
  • आदिवासी मूलवासियों की जमीन लूटने के लिए बने भूमि बैंक को रद्द करवाना.
  • कुपोषण जैसी भयावह स्थिति को जड़ से मिटाने के लिए उचित प्रयास करना.
  • पांचवी अनुसूची को पूर्ण रूप से लागू किया जाना तथा अनुसूचित छेत्रों में इसके अधीन ही कार्यपालिका कार्य करे- ये सुनिश्चित किया जाना.
  • ग्रामसभा गांवों के ऊपर  नियंत्रण का अधिकार, जो कि पेसा कानून में निहित है पूर्णत: दिलाना.   

संवाददाता सम्मेलन में इनकी रही भागीदारी

संवादाता सम्मेलन को दयामनी बरला के अलवा जेरोम जेराल्ड कुजूर (महासचिव नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेज) कुमार मार्डी (भूमि बचाच मंच) समीर तोपना (मुंडारी खूंटकटी भूईयारी परिषद) ने संबोधित किया. मौके पर खूंटी, लोहरदगा, जमशेदपूर, पश्चिम सिंहभूम, हजारीबाग, राजमहल लोकसभा क्षेत्र के आंदोलनकारी मौजूद थे.

इसे भी पढ़ेंः जज्बे को सलामः मुन्ना और रीना ने मिलकर ठानी, बिखेरी अपनी अंधेरी जिंदगी में रोशनी

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: