Ranchi

कॉन्ट्रैक्ट टीचर्स के भरोसे 2005 से राज्य में संचालित कस्तूरबा स्कूल, कक्षाएं बढ़ी लेकिन नहीं हुआ पद सृजन

Ranchi: राज्य में 2005 से कस्तूरबा गांधी बालिका स्कूल संचालित है. लेकिन इसमें कार्यरत सभी शिक्षक कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गये हैं.

जो 2005 से कार्यरत हैं और अब तक उनका स्थायीकरण नहीं किया गया. जबकि कस्तूरबा गांधी बालिका स्कूल केंद्र और राज्य की योजना है.

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राज्य में 203 कस्तूरबा स्कूल है. जिनमें लगभग सात सौ शिक्षिकाएं कार्यरत हैं. वहीं 178 शिक्षकेत्तर कर्मी हैं. इन शिक्षकों ने बताया कि शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मी सभी संविदा पर हैं.

संविदा आधारित शिक्षिकाओं को स्थायी करने की बजाय अब सरकार इनके स्थान पर पीजीटी शिक्षकों को बहाल करने की योजना बना रही है.

इन्हीं बातों को लेकर शुक्रवार को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कर्मी संघ की ओर से धरना प्रदर्शन किया गया. इन शिक्षकों के धरना प्रदर्शन से स्कूली कामकाज प्रभावित नहीं हुआ. विभाग की ओर से राज्य के सभी सरकारी स्कूल और कस्तूरबा स्कूल की छुट्टी 11 अक्टूबर तक तय की गयी.

नौ से 12 वीं तक कक्षाएं शुरू हुई लेकिन शिक्षक पद स्वीकृत नहीं हुए

पाकुड़ से आयी शिक्षिक डॉ. कुसूम ने बताया कि 2005 से राज्य में छह से आठ तक ही कक्षाएं चलती थी. लेकिन राज्य सरकार ने साल 2008 में नौ से 12वीं तक की कक्षाएं बढ़ायी. राज्य सरकार ही इन कक्षाओं का बजटीय प्रावधान करती है.

लेकिन कक्षाएं बढ़ाने के साथ राज्य में शिक्षकों के पद सृजित नहीं किये गये. जबकि पहले कक्षा छह से आठ में प्रत्येक स्कूल में मात्र पांच शिक्षक कार्यरत है.

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और यही पांच-पांच शिक्षक अब कक्षा छह से 12 तक पढ़ाते हैं. ऐसे में सरकार की ओर से इन शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों के मानदेय में वृद्धि भी नहीं की गयी. वर्तमान में राज्य में 57 स्कूल हैं जो राज्य सरकार के मद से संचालित है. हर स्कूल में पांच सौ सीट होते हैं.

हर स्कूल में लगभग 32 शिक्षकों की होनी है नियुक्ति

धरना में शामिल सुनील कुमार ने बताया कि कक्षाओं और छात्रों की संख्या देखें तो एक-एक स्कूल में लगभग 32 शिक्षकों के पद सृजित किये जाने हैं. लेकिन राज्य में ऐसा नहीं हुआ. पद सृजित नहीं होने के बाद भी लगभग पंद्रह सौ पद वर्तमान में खाली है.

सुनील ने बताया कि राज्य सरकार ही इन पदों को सृजित का अधिकार रखती है साथ ही शिक्षकों के लिये नियमावली की भी. लेकिन कार्य करते 17 साल हो गये, कस्तूरबा गांधी स्कूल का राज्य की साक्षरता दर बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान है. इसके बाद भी सरकार इसकी बदहाली पर ध्यान नहीं देती.

क्या है इनकी मांग

अपनी मांगों को बताते हुए इन शिक्षकों ने कहा कि सभी कर्मियों का नियमितकरण या समायोजन किया जाये. शिक्षा विभाग अंतर्गत कर्मियों को पचास प्रतिशत वृद्धि मानदेय में बढ़ोतरी की जाये.

सभी शिक्षिकाओं और शिक्षकेत्तर कर्मियों का बीमा किया जाये. ईपीएफ के दायरे में इन शिक्षकों को लाया जाये. अपनी मांगों को लेकर इन शिक्षकों को राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है.

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