
Jamshedpur : बहुप्रतीक्षित जुगसलाई रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू हुये करीब चार साल हो गये हैं फिर भी अब तक ब्रिज बनकर तैयार होना तो दूर इसके निर्माण कार्य की गति दिन-ब-दिन धीमी होती जा रही है. नतीजन इसका रिवाइज रेट बढ़ता जा रहा है. बता दें कि 30 अक्टूबर 2017 को इस ब्रिज के निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी, जबकि इसका निर्माण कार्य 11 महीने में ही पूरा कर लिया जाना था. इस बीच निर्माण कार्य की सुस्त गति की वजह से प्रशासनिक स्वीकृति के बाद रिवाइज रेट 29 करोड़ 99 लाख से बढ़कर 44 करोड़ 56 हजार रुपये के करीब हो गया है. इस पर सवाल उठने लगे हैं कि किस वजह से ब्रिज के निर्माण कार्य की गति धीमी होती जा रही है, जिससे रिवाइज रेट बढ़ता जा रहा है.
प्रशासनिक स्वीकृति के बाद टेंडर में लग गये थे एक साल
यहां जानेवाली बात यह भी है कि 30 अक्टूबर 2017 को राज्य की भाजपा सरकार के कार्यकाल में जुगसलाई ओवर ब्रिज की प्रशासनिक स्वीकृति तो मिल गई थी. फिर भी इसका टेंडर होने में 1 साल लग गये थे. उसके बाद 18 अक्टूबर 2018 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस पुलिस के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया था. मौके पर जिले के तत्कालीक उपायुक्त अमित कुमार भी मौजूद थे. उन्होंने कहा था कि आरओबी का काम 11 महीने में खत्म हो जाएगा. यानि, वर्ष 2019 में इस ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य खत्म होना था, लेकिन हालत यह है कि फिलहाल वर्ष 2022 में भी ब्रिज निर्माण का काम पूरा नहीं पाया है. इस दौरान सरकार बदली, पदाधिकारी बदले और आरओबी का निर्माण कार्य देख रहे पथ निर्माण विभाग के दो एसडीओ भी बदल चुके हैं.
यह मौजूदा स्थिति
फिलहाल इस ब्रिज का काम देखने के लिए विभाग का कोई एसडीओ पदस्थापित नहीं है, जो पुख्ता तौर पर बता सकें कि ब्रिज का निर्माण कार्य कब तक पूरा हो पाएगा. इस मामले में प्रोजेक्ट का काम रही कंपनी त्रिवेणी प्राइवेट लिमिटेड के इंजीनियर बीपी सिन्हा जब जानने की कोशिश की गई तो उनका जवाब था कि अक्टूबर महीने तक निर्माण कार्य पूरा करने की उनकी कोशिश होगी. दूसरी ओर निर्माण कार्य की जो गति है उससे यह भी सवाल उठने लगे हैं कि कहीं ठेका कंपनी का इरादा एक और रिवाइज रेट लेने का तो नहीं है?
निर्माण कार्य में विलंब से क्षेत्र के लोग खफा
इधर ब्रिज के निर्माण कार्य में विलंब होने से जुगसलाई समेत आस-पास के लोग खफा हैं. उनका कहना है कि ब्रिज का निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं से उन्हें अब भी जुगसलाई रेलवे फाटक से होकर गुजरने के कारण वही सारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिन परेशानियों का सामना क्षेत्र के लोग वर्षों से करते आये हैं. लोग इस बात से भी खफा हैं कि निर्माण कार्य की जो गति है उसे देखते हुये लग रहा है कि वर्ष 2023 तक भी काम पूरा हो जाय तो सरकार और विभाग की उन पर मेहरबानी ही होगी. क्योंकि मौजूदा स्थित यह है कि ब्रिज के जुगसलाई और बिष्टुपुर दोनों छोर पर पक्का छत ढलाई का काम पूरा होने में अभी समय लगेगा. क्योंकि अभी तीन-चार पीलर के बीच काम करना बाकी है. उस काम के पूरा होने के बाद पथ निर्माण विभाग का काम चलेगा. दूसरी ओर जुगसलाई छोर की ओर से निर्माण का काम भी आधा-अधूरा ही दिख रहा है. हालांकि, बिष्टुपुर छोर की तरफ से पाइलिंग का काम खत्म हुआ है और उस पर ढ़लाई चल रहा है. छत ढलाई में कहीं गाटर दिया गया है तो कहीं नहीं दिया गया है.
इन कारणों से निर्माण कार्य में हुई परेशानी
रही बात निर्माण कार्य में आनेवाली परेशानियों की तो ओवर ब्रिज के निर्माण के लिये जुगसलाई छोर की ओर 33 हजार वोल्ट का हाईटेंशन तार को शिफ्ट करने का काम किया जाना था. साथ ही ड्रेनेज सिस्टम पांच जगहों पर खुला होना भी परेशानी का सबब था. इस बीच 33 हजार वोल्ट का हाईटेंशन तार हटाने में छह महीने लग गये, जबकि ड्रेनेज सिस्टम ठीक करने में भी तीन महीने लगे. इसके अलावा कई घरों को भी शिफ्ट करना था. उसमें भी करीब एक साल का समय लग गया. इन सारी समस्याओं को तो फिर भी समझा जा सकता है, लेकिन उसके बाद निर्माण कार्य में देरी लोगों के समझ से परे साबित हो रहा है.
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