
Ranchi: झारखंड टेट ( जेटेट) पास अभ्यर्थी की ओर से सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में सीटेट पास और झारखंड के पड़ोसी राज्य से टेट परीक्षा पास अभ्यर्थी को शामिल करने के मामले में दाखिल याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई. सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेके महेश्वरी एवं न्यायमूर्ति संजय करोल की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि झारखंड सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC), सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना सहायक आचार्य नियुक्ति का रिजल्ट प्रकाशित नहीं कर सकती है. क्योंकि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए मामले के लंबित रहने तक रिजल्ट प्रकाशित नहीं की जाए. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में निर्धारित की है.
बता दें की सहायक आचार्य के लिए हिंदी के लिए परीक्षा कल से शुरू हो रही है. प्रार्थी की ओर से वरीय अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण एवं हाई अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पैरवी की.
दरअसल, झारखंड सीटेट उत्तीर्ण अभ्यर्थी संघ की ओर से दायर जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट दिसंबर 2023 में अपना फैसला सुनाया था. जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. हाई कोर्ट ने करीब 26001 पदों पर सहायक आचार्य की होने वाली नियुक्ति परीक्षा में सीटेट पास अभ्यर्थी या झारखंड के पड़ोसी राज्य से टेट परीक्षा पास करने वाले झारखंड के निवासी अभ्यर्थियों को इस परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी थी. जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में झारखंड टेट पास अभ्यर्थियों परिमल कुमार एवं अन्य ने हाई कोर्ट की इस आदेश को चुनौती दी थी.
प्रार्थी की ओर से वरीय अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण एवं अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पैरवी की. उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थी का पक्ष रखते हुए कहा गया कि झारखंड की क्षेत्रीय भाषा संथाली, खोरठा आदि का ज्ञान जेटेट अभ्यर्थियों के पास है. क्योंकि उन्होंने इसकी परीक्षा दी है. लेकिन सीटेट अभ्यर्थियों के पास क्षेत्रीय भाषा के रूप में हिंदी या अंग्रेजी विषय का ही नॉलेज है. जब सीटेट शिक्षकों की नियुक्ति झारखंड के प्राथमिक स्कूलों में होगी, तो उन्हें झारखंड के लैंग्वेज में बच्चों को शिक्षा देने में परेशानी होगी, यह राइट टू एजुकेशन का उल्लंघन होगा. झारखंड हाई कोर्ट को ऐसा पॉलिसी डिसीजन लेने का पावर नहीं है, यह अधिकार केवल पार्लियामेंट के पास है.
हाई कोर्ट ने सीटेट अभ्यर्थियों को 3 साल में प्रथम प्रयास में ही जेटेट परीक्षा पास करने का दिया था आदेश
झारखंड हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि अगर सीटेट अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो जाती है तो उन्हें 3 साल में प्रथम प्रयास में ही जेटेट परीक्षा पास करनी होगी. अगर झारखंड सरकार 3 साल में जेटेट परीक्षा आयोजित नहीं करती है, तो अभ्यर्थियों पर यह शर्त लागू नहीं होगा. अभ्यर्थियों को सहायक आचार्य परीक्षा की तैयारी के लिए तीन माह का समय दिया जाएगा.




