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योजनाओं पर काम नहीं होने से जरेडा की फंडिंग ऊर्जा विभाग को सरेंडर

  • 2018-19 की फंडिंग हुई वापस, 2018 की कई योजनाओं पर अब हो रहा काम

Ranchi: झारखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (जरेडा) का दो साल का फंड सरेंडर होगा. साल 2018-19 के फंड को कुछ दिनों पहले ही उर्जा विभाग ने वापस ले लिया है, जो लगभग 120 करोड़ रूपये थे. सरेंडर किया हुआ फंड अलग अलग योजनाओं का है. वहीं मार्च 2020 में 2019-20 की फंडिंग भी सरेंडर हो जायेगी.

हालांकि जरेडा की ओर से फंड सरेंडर करने से बचाव के लिए कई महीनों तक पत्राचार किया गया. इसके बावजूद ऊर्जा विभाग ने फंड वापस ले लिया. ऊर्जा विभाग की ओर से साल 2018 से फंडिंग सही समय पर नहीं की गयी, जिसके कारण जरेडा की ओर से योजनाओं पर काम नहीं किया गया.

2018 के बाद से वित्तीय वर्ष पूरा होने के बाद ही उर्जा विभाग ने जरेडा को फंड दिया. फंड से पूरी होने वाली योजनाओं में कुसुम योजना, सोलर स्ट्रीट लाइट, सोलर पंप सेट, रूफ टॉप पावर प्लांट आदि योजनाएं हैं.

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2018 के बाद से रुकी योजनाएं

ऊर्जा विभाग से समय पर फंडिंग नहीं होने से कई योजनाएं रुकी हैं. साल 2018 के बाद से ही पूर्व सरकार ने जरेडा को समय पर फंडिंग नहीं की, जिससे छह हजार सोलर स्ट्रीट लाइट योजना, सोलर रूफ टॉप योजना समेत कई योजनाएं प्रभावित हुईं.

फिलहाल जरेडा की ओर से कई ऐसी योजनाओं पर काम किया जा रहा है, जो साल 2018 की हैं. इसमें सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने, रूफ टॉप सोलर प्लांट के लिए टेंडर आदि के काम किये जा रहे हैं.

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फंड सरेंडर नहीं करने की मांग की गयी थी

जरेडा से जानकारी मिली कि इस मामले में अगस्त महीने से पत्राचार जारी है. ऊर्जा विभाग की ओर से फंड सरेंडर करने की बात की गयी. जबकि जरेडा फंड सरेंडर नहीं कराने के पक्ष में लगातार पत्राचार किया. इसके बाद भी विभाग ने कटौती कर दी.

बात दे अब साल 2020-21 के लिये 155 करोड़ आवंटित किया गया है. इसके पहले साल 2016-17 में भी पूर्व सरकार की ओर से फंडिंग रोकी गयी थी.

पूर्व में मुख्य सचिव की ओर से निर्देश जारी किया गया था कि जिस भी कंपनी या एजेंसी को दो साल से भुगतान नहीं किया गया है, उनकी फंडिंग वापस संबधित विभाग को कर दी जायेगी. इसी आलोक में उर्जा विभाग की ओर से कार्रवाई की गयी.

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