
Ranchi : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का पहला दिन हंगामेदार रहा. सत्र के पहले दिन शोक प्रस्ताव के बाद कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी है. विधानसभा का बजट सत्र एक महीने तक चलेगा. हेमंत सरकार 3 मार्च को वित्तीय वर्ष 2020-21 का पूर्ण बजट पेश करेगी.
इससे पहले बीजेपी में वापसी कर चुके बाबूलाल मरांडी को लेकर सदन में हंगामा हुआ. सत्र शुरू होते ही बीजेपी विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया. बीजेपी के विधायक वेल में पहुंचकर हंगामा किया. विधायकों की मांग थी कि बाबूलाल को नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर बैठाया जाए. जबकि बीजेपी विधायक बिरंची नारायण ने कहा था कि अगर बाबूलाल को नेता प्रतिपक्ष का दर्जो नहीं दिया गया तो सदन चलने नहीं दिया जायेगा.
दरअसल विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो की ओर से नेता प्रतिपक्ष पर फैसला नहीं लेने को बीजेपी ने गंभीरता से लिया है. जबकि इस बारे में खुद बाबूलाल मरांडी का कहना है कि वे अध्यक्ष के निर्णय के इंतजार में हैं.
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बाबूलाल पर कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने कसा तंज
बीजेपी में शामिल हुए बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष नहीं स्वीकार किये जाने का कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सह जामताड़ा विधायक इरफान अंसारी ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा है कि नये विधानसभा भवन में आज से होने वाले बजट सत्र में नेता प्रतिपक्ष को स्थान नहीं देकर विधानसभा अध्यक्ष ने सही किया है.
सत्र को लेकर विधानसभा पहुंचे इरफान ने कहा कि उनका सरकार से मांग है कि बाबूलाल को सदन में नहीं बाहर कुर्सी दी जानी चाहिए. वहीं जेवीएम विधायक बंधु तिर्की और प्रदीप यादव को कांग्रेस के स्थान पर कुर्सी दिये जाने के पर कहा कि दोनों को भी अलग से सदन में स्थान दिया जाना चाहिए.
जामताड़ा विधायक ने कहा कि दोनों विधायक अगर कांग्रेस या बीजेपी में शामिल होते हैं, तो दोनों को इन्हीं के टिकट पर चुनाव लड़कर जीतना चाहिए.
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जेवीएम की कुर्सी पर बैठें बाबूलाल – इरफान
बीजेपी में बाबूलाल के शामिल होने के सवाल पर इरफान अंसारी ने कहा कि जब मुखिया ही चोर है, तो बाकी दोनों पर क्या कहा जा सकता है. वहीं बीजेपी में बाबूलाल के जाने को लेकर कहा कि इससे साबित हो गया है कि बीजेपी के पास अब अपना नेता तो बचा नही है. बीजेपी तो राज्य में खत्म हो गयी है.
बाबूलाल पर निशाना साधते हुए इरफान ने कहा कि उनमें थोड़ी सी भी लज्जा बची है, तो वे जेवीएम के टिकट पर चुनाव जीते है, तो उसी के कुर्सी पर बैठें. आखिऱ उन्हें बीजेपी से इतनी लगाव क्यों है.
जबकि बीजेपी का मुख्यमंत्री ही विधानसभा चुनाव हार गया है, तो बीजेपी बची कहां है. वह तो पूरी तरह से खत्म हो चूकी है. अब बीजेपी वाले जबरदस्ती उन्हें पार्टी में शामिल कराकर नेता प्रतिपक्ष मान लें, तो यह नहीं चलेगा. हर चीज का एक सिस्टम होता है और उसी सिस्टम के तहत विधानसभा अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष को स्थान नहीं दिये जाने का फैसला किया है.
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