
Akshay Kumar Jha
Ranchi: 18 सालों की जद्दोजहद के बाद झारखंड की एक मात्र सरकारी बिजली संयंत्र टीटीपीएस (तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन) या टीवीएनएल (तेनुघाट विद्युत निगम लिमिटेड) आखिरकार अपने राज्य झारखंड का हुआ. मामला पटना हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था. सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सुनवाई के दौरान कहा था कि देश के दो राज्यों से जुड़ा मामला है इसलिए कोर्ट के बाहर ही दोनों आपस में समझौता कर लें. दोनों राज्य मिलकर बीच का रास्ता तलाश रहे थे.
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इसी बीच एक रास्ता ऐसा निकला जिससे टीटीपीएस झारखंड का हुआ. बिहार सरकार की शर्त यह है कि जब भी टीटीपीएस का फेज-2 का विस्तार हो उसकी 40 फीसदी बिजली बिहार सरकार को झारखंड सरकार की दर पर दी जाए. जिसपर झारखंड सरकार की हां है. इसी हां करने की वजह से बिहार ने टीटीपीएस का मालिकाना हक झारखंड सरकार को सौंपने का फैसला किया है. इस काम में बस कागजी प्रक्रिया के तहत कुछ औपचारिकताएं बाकी हैं.
बिहार के ऊर्जा सचिव ने झारखंड के ऊर्जा सचिव को लिखी चिट्ठी
बिहार सरकार ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने झारखंड सरकार के ऊर्जा सचिव वंदना डाडेल को एक मार्च को एक पत्र लिखा. चिट्ठी में उन्होंने पुरानी सारी बातों का उल्लेख करते हुए यह स्पष्ट किया कि कुछ शर्तों के साथ बिहार सरकार टीटीपीएस का मालिकाना हक झारखंड को दे रही है. इस फैसले पर बिहार सरकार के कैबिनेट की भी मुहर लग गयी है.
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क्या है चिट्ठी में
– टीटीपीएस के स्वामित्व को लेकर बिहार सरकार ने 17 सितंबर 2018 को झारखंड सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था. प्रस्ताव में बिहार सरकार ने कहा है कि बिहार सरकार टीटीपीएस के मालिकाना हक का अपना दावा वापस ले सकती है. लेकिन इसके बदले टीटीपीएस के मौजूदा और भविष्य की विस्तार इकाइयों से भेजे गए ऊर्जा का कम से कम 40 फ़ीसदी बिजली बिहार को झारखंड राज्य में लागू होने वाली दरों और शर्तों पर दी जाए.
– बिहार सरकार के इस प्रस्ताव का जवाब झारखंड ने 31 दिसंबर 2018 को दिया. झारखंड सरकार ने बिहार सरकार से साफ तौर से कहा कि विद्युत खरीद समझौते (पीपीए) की वजह से मौजूदा इकाइयों से ऊर्जा दे पाना संभव नहीं है. हालांकि भविष्य की विस्तार इकाइयों से भेजे गए ऊर्जा का 40 फ़ीसदी बिहार को सक्षम प्राधिकारी या विनायक आयोग द्वारा तय दर पर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया गया है. इसके अलावा अगर बिहार सरकार 40 फ़ीसदी बिजली खरीदने से मना करेगी तो झारखंड सरकार यह बिजली किसी और को बेच सकती है.
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– बिहार सरकार ने इस प्रस्ताव का जवाब देते हुए अपने खत में लिखा कि बिहार सरकार और बिहार राज्य विद्युत बोर्ड ने संयुक्त रूप से टीटीपीएस को 122 1.71 करोड़ रुपए की राशि ऋण और निवेश के तौर पर टीटीपीएस को दी थी. वर्तमान में प्रति यूनिट औसत खरीद राशि 4.07 रुपये है. टीटीपीएस कोयला उत्पादन क्षेत्र के आसपास बसा है. इसलिए भविष्य में टीटीपीएस की इकाइयों से उत्पादन होने वाली बिजली की दर निश्चित रूप से कम होगी.
इसलिए बिहार राज्य को टीटीपीएस से सस्ती बिजली मिलेगी. चिट्ठी के आखिर में बिहार सरकार के ऊर्जा विभाग ने साफ किया है कि टीटीपीएस को दिए गए ऋण और उसमें किए गए निवेश के बदले प्रस्तावित स्टेज-2 से 40 फ़ीसदी बिजली बिहार राज्य के उपयोग के लिए अगर झारखंड ने मंजूरी दे दी है तो टीटीपीएस का स्वामित्व झारखंड सरकार का हो जाएगा.
झारखंड के कैबिनेट से पास कराने के बाद संयंत्र पूरी तरह से झारखंड काः विभाग
इस मामले पर न्यूज विंग से बात करते हुए ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बिहार सरकार की तरफ से स्वामित्व को लेकर झारखंड सरकार को चिट्ठी आयी है. हमारे तरफ से ही यह प्रस्ताव गया था. जिसे बिहार सरकार ने मान लिया है. अब सिर्फ कैबिनेट से पास कराने की जरूरत है. इसके बाद टीटीपीएस पूरी तरह से झारखंड का हो जाएगा. विभाग ने बताया कि बिहार सरकार से कहा गया था कि टीटीपीएस की बिजली अभी बिहार सरकार को नहीं दी जा सकती. लेकिन विस्तारीकरण के बाद जरूर ही बिहार सरकार को बिजली दी जाएगी.
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