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झारखंड के 110 निजी ITI में चले VTP कार्यक्रम की जांच शुरू

तत्कालीन मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के समय में चला था कार्यक्रमफरजी भुगतान और प्रशिक्षण दिये जाने के नाम पर हुआ था वारा-न्यारा

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Ranchi: झारखंड के 110 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) में चले वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम (VTP) की निगरानी जांच शुरू हो गयी है. यह जांच 5 सालों के बाद शुरू की गयी है. वीटीपी कार्यक्रम में निजी आईटीआई को फरजी प्रशिक्षण देने के एवज में भुगतान किया गया है. यह मामला तत्कालीन श्रम नियोजन और प्रशिक्षण मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के समय का है. रांची समेत, लोहरदगा, रामगढ़, हजारीबाग, देवघर, जमशेदपुर, चाईबासा, बोकारो जिले के संस्थानों में वीटीपी कार्यक्रम चलाया गया था. केंद्र सरकार के नेशनल वोकेशनल एजुकेशन क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (एनवीएक्यूएफ) के तहत आईटीआई में पढ़नेवाले बच्चों को स्किल डेवलपमेंट का ट्रेनिंग दिया जाना था. नौंवीं, दसवीं, ग्यारहवीं और 12वीं कक्षा के ड्रॉप आउट बच्चों के लिए यह कार्यक्रम चलाया जाना था.

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ड्रॉप आउट बच्चों को करना था हुनरमंद

योजना के तहत 20 करोड़ ड्रॉप आउट बच्चों को हुनरमंद करने के लिए देश भर में यह अभियान चलाया गया था. झारखंड में योजना के तहत 15 करोड़ से अधिक का भुगतान संस्थानों को किया गया है. इसकी व्यापक जांच की जा रही है. इतना ही नहीं 50 करोड़ से अधिक युवाओं को 2020 तक स्किल्‍ड करने का निर्णय भी केंद्र सरकार को लिया गया था. इस कार्यक्रम में श्रम नियोजन और प्रशिक्षण विभाग, उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विभाग को शामिल किया गया था.

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जांच के दायरे में हैं उप निदेशक शशिभूषण और पूर्व परीक्षा नियंत्रक योगेंद्र प्रसाद

श्रम नियोजन और प्रशिक्षण विभाग के दो अफसर उप निदेशक शशिभूषण और पूर्व परीक्षा नियंत्रक योगेंद्र प्रसाद जांच की जद में हैं. ये दोनों अधिकारी व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए बनायी गयी राज्य स्तरीय समिति में कोषाध्यक्ष थे. इनके हस्ताक्षर से ही प्रशिक्षणार्थियों के नाम से संस्थानों को भुगतान का चेक निर्गत किया जाता था. इसके अतिरिक्त मुख्यालय स्तर के अधिकारी भी इस घोटाले में शामिल रहे हैं.

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