
Ranchi : कोरोना महामारी से उत्पन्न स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बातचीत की. बातचीत के बाद हेमंत ने मीडिया को कहा कि उन्होंने रविवार को ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर झारखंड को अपनी बात रखने का अवसर देने की बात कही थी. लेकिन आज बोलने वाले मुख्यमंत्रियों में झारखंड का नाम शामिल नहीं था. शायद समय अभाव के कारण प्रधानमंत्री समय ना दे पाये हों.
इसे भी पढ़ेंः CM हेमंत सोरेन ने कहा – हिंदपीढ़ी CRPF के हवाले, नहीं खुलेंगीं दुकानें, छात्रों को लाने पर केंद्र खेल रहा खेल
हेमंत सोरेन ने कहा कि यह भी सही है कि लॉकडाउन को लेकर केंद्र सरकार ने जो दिशा निर्देश दिया था, उसे पालन करने की सजा ही झारखंड को मिल रही है. दरअसल मुख्यमंत्री का यह बयान कोटा से कई राज्यों द्वारा अपने छात्रों को वापस लाने की प्रतिक्रिया स्वरूप दी गयी है.
बता दें कि गहलोत सरकार की अपील के बाद उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, असम, त्रिपुरा जैसे बीजेपी शासित राज्यों सहित कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ की सरकार ने कोटा से अपने छात्रों को वापस लाने के लिए बसें भेजी थीं.
इसे लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कड़ी नाराजगी जताई है और केंद्र सरकार पर सवाल खड़ा किया है. हेमंत ने कहा कि यदि केंद्र सरकार मानती है कि प्रवासी मजदूरों और छात्रों को अपने राज्य जाने देना चाहिए तो केंद्र सरकार को पूर्व निर्गत आदेश को शिथिल करते हुए एक पत्र जारी करना चाहिए. अगर सरकार पहल नहीं करती है तो राज्य सरकार अन्य विकल्पों पर विचार कर कोर्ट जाने पर विचार करेगी.
इसे भी पढ़ेंः मुख्य सचिव के आदेश को धत्ता बता कर पीडीएस दुकानों पर शिक्षकों की हुई प्रतिनियुक्ति
केंद्र की रोक के कारण ही छात्रों और प्रवासी मजदूरों को नहीं ला पा रही है सरकार
हेमंत ने कहा कि झारखंड सरकार भी देश के विभिन्न राज्यों में फंसे झारखंडी मजदूरों और छात्रों को वापस लाना चाहती है. लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आदेश दिया है कि 3 मई तक अंतर राज्यीय आवागमन पर पूरी तरह रोक है. जो भी इसका उल्लंघन करेगा, उस पर आपदा प्रबंधन कानून 2005 के प्रावधानों के अनुसार एक साल तक की सजा दी जाएगी.
इस बाबत झारखंड सरकार ने पहले ही पत्र के माध्यम से केंद्र को बता दिया है कि हम इसी रोक के कारण बाहर फंसे मजदूरों और छात्रों को वापस नहीं ला पा रहे हैं. जबकि कुछ राज्य केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं फिर भी केंद्र सरकार मौन है. हेमंत ने सवाल पूछा है कि आखिर केंद्र सरकार यह खेल क्यों खेल रही है?
इसे भी पढ़ें – #CoronaVirus : ASI समेत 8 नये कोरोना पॉजिटिव, रांची के 5 नये इलाके चपेट में, राज्य में कुल 91 मरीज
हम कानून तोड़ कर काम नहीं कर सकते
हेमंत ने कहा कि राज्य सरकार अपने बल पर देश के विभिन्न राज्यों से प्रवासी मजदूरों और झारखंड को वापस लाने की स्थिति में नहीं है. अतः केंद्र सरकार एक तो पहले अपने आदेश को बदले ताकि हम वैधानिक तरीके से काम कर सकें. सरकार कानून तोड़कर काम नहीं करना चाहती है. इसके अलावा हेमंत सोरेन ने केंद्र से यह मांग भी की कि उन लोगों को किस प्रकार झारखंड वापस लाया जा सकता है. सीएम ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के निर्देशों का पूर्ण रुप से पालन करेगी.
हेमंत सरकार ने लिये ये फैसले
हेमंत सोरेन ने कहा कि प्रधानमंत्री से बातचीत के बाद राज्य सरकार ने कोरोना को देखते हुए कुछ विशेष निर्णय लिये हैं. ये इस प्रकार हैं:
- – रांची के हॉटस्पॉट हिंदपीढ़ी क्षेत्र में सीआरपीएफ की तैनाती की जाएगी. ऐसा इसलिए क्योंकि सील किये हिंदपीढ़ी से लोग बाहर निकल कर अन्य जिलों में पहुंच रहे हैं. जिससे कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ता जा रहा है.
- – रांची की सीमाओं को पूर्ण रूप से सील कर दिया गया है. कुछ मामलों को छोड़कर हर तरह की आवाजाही पर रोक लगाई गयी है. इसके लिए विशेष पुलिस बल की तैनाती करते हुए यह सुनिश्चित करने का आदेश डीजीपी और मुख्य सचिव को दिया गया है.
- – अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि राज्य के जिन क्षेत्रों में अभी कोरोना संक्रमण नहीं हो पाया है, उन क्षेत्रों में संक्रमण फैलने से रोकने के लिए सभी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें.
- – 3 मई को लॉकडाउन समाप्त होने से पूर्व लॉकडाउन बढ़ाने के मामले में केंद्र सरकार द्वारा जो निर्णय लिए जाएंगे उसकी सरकार झारखंड की स्थिति के आलोक में समीक्षा करेगी. उसके बाद ही सरकार आवश्यक निर्णय लेगी.
- – ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का सृजन करने के लिए एक कार्य योजना तैयार की जा रही है. योजना के तहत ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक पहल की जानी है.
इसे भी पढ़ेंः #Corona : गोड्डा एसपी ने जवानों को संक्रमण से बचने के लिए काढ़ा पीते रहने को कहा




