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मेडिकल काउंसिलिंग के लिए झारखंड राज्य की पात्रता जरूरी, पर दूसरे राज्य के छात्र भी कर रहे आवेदन

Ranchi: झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए होनेवाली काउंसिलिंग के लिए सोमवार को आवेदन की प्रक्रिया समाप्त हो गयी. इस काउंसिलिंग में शामिल होने के लिए झारखंड कंबाइंड की ओर से जो नोटिस जारी किया गया है, उसमें कहा गया है कि इस काउंसिलिंग में वैसे ही छात्र आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने नीट पास किया हो और झारखंड राज्य को नीट के आवेदन में पात्रता के रूप में चुना हो.

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इसके बाद भी दर्जनों ऐसे आवेदक हैं, जिन्होंने झारखंड राज्य की काउंसलिंग में शामिल होने के लिए आवेदन कर दिया है. इसकी जानकारी न्यूज विंग को कई अभिभावक व छात्रों ने दी है. वहीं बोर्ड की ओर से इस तरह की शिकायत दर्ज करने संबंधी कोई जानकारी नहीं दी गयी है. बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक दिलीप कुमार झा ने काउंसिलिंग के संबंध में किसी भी तरह की बात करने से इंकार कर दिया.

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गौरतलब हो कि झारखंड में बिहार के अधिकतर छात्र नामांकन के लिए स्थानीय प्रमाण पत्र बना कर शामिल हो जाते हैं. वर्ष 2017 व 2018 के झारखंड राज्य की मेडिकल काउंसिलिंग में 200 से अधिक वैसे छात्रों के नाम मेरिट लिस्ट में आये थे, जिन्होंने बिहार या दूसरे राज्य को पात्रता के रूप में चुना था. मेडिकल शिक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक राज्य के मेडिकल कॉलेजों में वैसे भी सीटों की संख्या कम है. इसमें भी अगर सेंधमारी होती है तो राज्य के विद्यार्थियों को नामांकन से वंचित होना पड़ सकता है. ध्यान देने वाली बात यह है कि 2018 में सात ऐसे छात्रों को कॉलेज अलॉट कर दिया गया था, जिन्होंने झारखंड राज्य को पात्रता के रूप में नहीं लिया था.

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बीते 2017 व 2018 में 100 से अधिक वैसे छात्रों के नाम सामने आये थे जिनका बिहार व झारखंड दोनों राज्यों की मेडिकल काउंसलिंग के मेरिट लिस्ट में आये थे. इन्होंने बिहार में वहां का स्थानीयता प्रमाणपत्र और झारखंड में यहां का स्थानीयता प्रमाणपत्र देकर काउंसलिंग में शामिल हुए थे. जबकि नियम के मुताबिक एक उम्मीदवार एक बार में एक ही स्थनीयता प्रमाणपत्र का लाभ ले सकता है.

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