
Anand Kumar
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और उनके मंत्री कोषांग के 59 कर्मियों को कोरोना प्रोत्साहन राशि के भुगतान को लेकर नित नयी जानकारियां सामने आ रही हैं. राज्य के पूर्व मंत्री और जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय द्वारा मंत्री और मंत्री कोषांग के 59 लोगों पर अवैध तरीके से कोरोना प्रोत्साहन राशि का भुगतान लिये जाने के दूसरे दिन स्वास्थ्य विभाग ने एक प्रेस नोट जारी कर स्पष्टीकरण दिया, तो तीसरे दिन मंत्री बन्ना गुप्ता खुद सामने आये और कहा कि उन्हें अथवा उनके कोषांग के किसी कर्मी को प्रोत्साहन राशि का कोई भुगतान नहीं किया गया है. उन्होंने सरयू राय को चुनौती दी कि वे बतायें कि उन्हें तथा उनके कोषांग के किस कर्मी को कब, कैसे और कहां भुगतान किया गया. मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नैतिकता के मानदंडों का पालन करते हुए उन्होंने खुद ही मंत्री कोषांग के सभी लोगों को प्रोत्साहन राशि दिये जाने के प्रस्ताव को रद्द किया. इसके बाद चौथे दिन सरयू राय ने पटलवार करते हुए खुलासा किया कि प्रोत्साहन राशि के भुगतान की सारी प्रक्रिया हो चुकी थी, लेकिन 31 मार्च की रात 11 बजे रिजर्व बैंक का सर्वर बंद हो गया और पीएमयू से भुगतान समय से नहीं भेजा जा सका. इस कारण पेमेंट नहीं हो सका और राशि लैप्स हो गयी.
इस पूरे प्रकरण में एक बात तो साफ है कि स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और उनके कोषांग के 59 लोगों को कोरोना प्रोत्साहन राशि दिये जाने का फैसला हुआ था. इसके भुगतान से संबंधित राशि पर स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकृति दी थी. अनुमोदन के बाद महालेखाकर समेत सभी संबंधित पदाधकारियों को इसकी सूचना भी दी गयी थी, लेकिन यह भी सत्य है कि मंत्री अथवा उनके कोषांग के किसी कर्मी को अंततः कोरोना प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं हुआ. मंत्री कहते हैं कि उन्होंने खुद प्रोत्साहन राशि के प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया, जबकि सरयू राय कहते हैं कि राशि की निकासी 31 मार्च 2022 को रिजर्व बैंक का पोर्टल बंद हो जाने के कारण नहीं हो सकी. लेकिन बकौल सरयू राय, यह मंत्री की सहमति से सरकारी तिजोरी से गलत तरीके से राशि निकलने के आपराधिक षडयंत्र का मामला है और इसके सबूत स्वास्थ्य विभाग की फाइलों और पीएमयू को भुगतान के लिए भेजे गये बिलों में दर्ज हैं.
इधर, स्वास्थ्य मंत्री का खेमा इस बात को मुद्दा बना रहा है कि आखिर सरयू राय राशि के भुगतान को लेकर अलग-अलग बयान क्यों दे रहे हैं. मंत्री बन्ना गुप्ता के एक करीबी ने शनिवार ने न्यूज विंग से कहा कि सरयू राय से पूछा जाना चाहिए कि वे तय करके बतायें कि भुगतान हुआ अथवा नहीं. उन्होंने कहा कि सरयू राय ने पहले 13 अप्रैल को कहा कि मंत्री और उनके कोषांग के 59 लोगों को कोरोना प्रोत्साहन राशि का अवैध तरीके से भुगतान किया गया. फिर जब मंत्री ने 15 अप्रैल को स्वयं कहा कि उन्होंने भुगतान की स्वीकृति का आदेश रद्द कर दिया था और कोई भुगतान नहीं हुआ, तो सरयू राय ने संयुक्त सचिव की एक चिट्ठी जारी कर दी, जिसमें मंत्री कोषांग के पांच लोगों को प्रोत्साहन राशि के भुगतान की स्वीकृति का उल्लेख था. शनिवार 16 अप्रैल को सरयू राय ने फिर कहा कि पोर्टल बंद होने के कारण भुगतान नहीं हुआ, तो ऐसे में उन्हें क्या कहा जाये. मंत्री के उक्त करीबी का कहना है कि सरयू राय पहले तय तो कर लें कि भुगतान हुआ कि नहीं, फिर उसके आधार पर आगे कुछ कहें. उनका यह भी कहना था कि भुगतान नहीं होने की बात कहकर मंत्री 13 अप्रैल को कही अपनी ही बातों को झुठला रहे हैं. मंत्री के करीबी के अनुसार सरयू राय को कोई व्यक्ति अपने निजी फायदे के लिए भ्रामक जानकारियां देकर गुमराह कर रहा है और वह इन जानकारियों के आधार पर कंफ्यूज होकर अपनी छवि और साख दोनों खराब कर रहे हैं.
बहरहाल, सरयू राय ने स्वास्थ्य मंत्री बन्ना के खिलाफ उठाये गये मुद्दों पर मुख्यमंत्री से जांच का आग्रह किया है. साथ ही उन्हें बर्खास्त करने और एसीबी जांच की भी मांग की है. इधर, बन्ना गुप्ता के करीबी चाहते हैं कि वे सरयू राय के खिलाफ मानहानि के मुकदमे जैसी कोई कार्रवाई करें, लेकिन मंत्री ने चाचा (सरयू राय) औऱ भतीजे (बन्ना गुप्ता) के बीच लड़ाई की किसी संभावना से इनकार किया है. शुक्रवार को जमशेदपुर में चाचा के चरण छूते उनकी तसवीर मीडिया की सुर्खियां भले बनी हों, लेकिन सरयू राय का मिजाज जाननेवाले जानते हैं कि मंत्री का खेमा जितनी तेज प्रतिक्रिया करेगा, कागजों के जारी होने और आरोपों के धमाके का सिलसिला उतना ही बढ़ेगा.
जमशेदपुर की राजनीति को नजदीक से जाननेवाले कहते हैं कि पूर्वी सिंहभूम जिले के प्रभारी सिविल सर्जन डॉ एके लाल पर कार्रवाई के मामले में सरयू राय ने विधानसभा में मंत्री पर ही सवाल उठाकर उन्हें इतना विवश कर दिया उन्हें लाल की बर्खास्तगी की फाइल पर दस्तखत करने पड़े. अब कोरोना प्रोत्साहन राशि का मामले में बन्ना गुप्ता को फिर से घेरकर सरयू एक तीर से कई निशाने साधना चाहते हैं. इस मामले में अब आगे क्या होता है, इसपर जमशेदपुर के साथ ही राज्य के सभी राजनीतिक दलों और जागरूक लोगों की नजर टिकी है. सरयू राय फिलहाल शनिवार को विधानसभा की सामान्य प्रयोजन समिति के साथ 15 दिनों की स्थल अध्ययन यात्रा के लिए पूर्वोत्तर के राज्यों के दौरे पर रवाना हो गये. लेकिन इस प्रकरण पर उनकी नजर लगातार बनी रहेगी. कोरोना प्रोत्साहन राशि पर बन्ना बनाम सरयू के बखेड़े में आगे क्या होता है, यह देखना दिलचस्प होगा.




