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JHARKHAND PANCHAYAT ELECTION: भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित मुखिया व अन्य प्रतिनिधि भी दोबारा लड़ सकेंगे चुनाव, DC दे सकते हैं मंजूरी

  • डीसी अगर अनुशंसा करेंगे तो उन्हें निलंबन मुक्त किया जायेगा
  • पंचायती राज विभाग ने जारी किया गाइडलाइन, अधिसूचना निर्गत

Nikhil Kumar

Ranchi : गबन, अनियमिता व भ्रष्टाचार के आरोपों में निलंबित पंचायत प्रतिनिधियों के पंचायत चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया है. डीसी अगर इन्हें निलंबन मुक्त करने की अनुशंसा सरकार को भेजेंगे तो सम्यक विचार के बाद उन्हें निलंबन मुक्त कर दिया जायेगा. इसके बाद वे अगामी पंचायत चुनाव लड़ सकेंगे.

पंचायती राज विभाग ने जारी किये दिशा-निर्देश

Sanjeevani

पंचायती राज विभाग ने अपने कार्यकाल में निलंबित हुए निर्वाचित पदधारकों के निलंबन मुक्ति के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किये हैं. इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गयी है. दरअसल,2015 में हुए आम चुनाव के आधार पर गठित पंचायतों ने अपना कार्यकाल पूर्ण कर लिया था. इसके बाद पंचायतें विघटित हो चुकी हैं.

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कार्यकारी समितियों का किया गया है गठन

पंचायतों के विघटन के बाद कार्य संचालन की वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में झारखंड राज पंचायत अधिनियम की धारा-107 के प्रावधानों के आलोक में कार्यकारी समितियों का गठन किया गया है. पंचायतों के कार्यकाल में पदधारक रहे व्यक्तियों को उनके पदावधि में योजना के क्रियान्वयन में अनियमितता,कर्तव्यहीनता एवं अन्य आरोपों में पंचायती राज विभाग के द्वारा 2019 में निकाले गये आदेश के आलोक में संबंधित उपायुक्तों के द्वारा निलंबित किया गया है.

सैकड़ों जनप्रतिनधि वर्तमान में निलंबित हैं. वर्तमान में इन निलंबित पदधारकों ने उन्हें निलंबन मुक्त करने संबंधी आवेदन विभाग को भेजे हैं. इसके अलावा जिलों द्वारा भी इन्हें निलंबन मुक्त करने की अनुशंसा विभाग को भेजी गयी है.

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निलंबित रहे तो चुनाव के लिए अयोग्य होंगे

राज्य में पंचायती राज एक्ट की धारा 64 के अनुसार निलंबित व्यक्ति अपने निलंबन के दौरान इस अधिनियम के अधीन निर्वाचन के लिए भी अयोग्य होगा. ऐसे में विभाग के समक्ष अपने कार्यकाल में निलंबित किए गये पदधारकों भूतपूर्व मुख्यिा,उप मुख्यिा,ग्राम पंचायत प्रमुख, उपप्रमुख,पंचायत समिति अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, जिला परिषद के संबंध में निर्णय लेने लेने का मामला विचाराधीन था.

झारखंड राज पंचायत राज अधिनियम -2001 की धारा- 163 तथा विभागीय अधिसूचना 10 अगस्त 2021 की धारा-13 के प्रावधानों के तहत पूर्व में निर्वाचित एवं निलंबित भूतपूर्व पदधारकों के निलंबन संबंधी मामलों को निपटाने के पूरी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है.

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इन प्रक्रिया में खरे उतरे तो होंगे निलंबन मुक्त

1. जिन जन प्रतिनिधियों पर किसी योजना में अनियमितता, ,अपूर्ण निर्माण, असमयोजित अग्रिम की राशि का मामला जिसमें पदधारक की भूमि मापी पुस्त के आधार पर भुगतान तक एवं भौतिक सत्यापन तक सीमित रही हो परंतु वर्तमान में योजना पूर्ण हो तथा उनके द्वारा असयोजित अग्रिम अथवा हानि की राशि जमा कर दी गयी हो. साथ ही निलंबन मुक्त करने की अनुशंसा संबंधित जिला उपायुक्त से प्राप्त हो.

2. एसीबी द्वारा हिरासत में लिए गये पदधारक जिन्हें वर्तमान में जमानत पर रिहा किया गया है तथा साथ ही निलंबन मुक्त करने की अनुशंसा संबंधित जिला उपायुक्त से प्राप्त हो.

3. योजना में अनियमितता के लिए किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर हिरासत में लिए गये पदधारक जिन्हें वर्तमान में जमानत पर रिहा किया गया है तथा साथ ही कंडिका 2 में निर्धारित शर्त पूर्ण करने एवं निलंबन मुक्त करने की अनुशंसा जिला उपायुक्त से प्राप्त हो.

4. दूसरे कारणों से हिरासत में लिए गये पदधारक उन्हें वर्तमान में जमानत पर रिहा किया गया है तथा साथ ही निलंबन मुक्त करने की अनुशंसा संबंधित जिला के उपायुक्त से मिली हो.

5.गबन, लोकधन की हानि, वसूली, अनियमित क्रय तथा आपूर्ति जैसे मामले जिसमें अनियमितता में पदधारक की प्रत्यक्ष भूमिका हो, उसमें अधिक भुगतान की गयी राशि की वसूली के साथ ही सामान्तर दंडात्मक कार्रवाई की गयी हो. साथ ही निलंबधन मुक्त करने की अनुशंसा संबंधित जिला उपायुक्त से प्राप्त हो.

6.पदेन कर्तव्य के निर्वहन कमें अक्षमता,लापरवाही या अन्य कारण जिनका जिक्र उपयुक्त कंडिकाओं में नहीं हुआ. साथ ही निलंबन मुक्त करने की अनुशंसा डीसी से प्राप्त हो.

7.पदधारक के निलंबन समाप्त करने की अनुशंसा भेजने में डीसी द्वारा राज्य सरकार के 2019 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जायेगा.

8.वैसे मामले जिनमें निलंबन का आधार पंचायत राज अधिनियम की धारा- 19,38, तथा 53 के प्रावधान पदधारी होने के लिए आयोग्यता है उन्हें निलंबन मुक्त नहीं किया जायेगा. निलंबन समाप्त करनी की अनुशंसा भेजने से पहले डीसी इस तथ्य की जांच कर लेंगे.

9. निलंबित पदधारक संबंधित पंचायत के विघटन की तिथि या कार्यकारी समिति की गठन की तिथि को पदधारक के रूप में कार्यरत नहीं थे. अत: निलंबन मुक्त होने की स्थिति में उन्हें वर्तमान में गठित एवं कार्यरत कार्यकारी कार्यकारी समिति के प्रधान अध्यक्ष का दायित्व एवं कार्य नहीं दिया.

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