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कोरोना का कहर…झारखंड में 1.30 लाख लोगों की नौकरियां छूटीं,  3127 कंपनियों के शटर गिरे

सिर्फ कोल्हान प्रमंडल में 75 हजार लोग हुए बेरोजगार

Anuj Tiwary

Ranchi : कोरोना से सेहत प्रभावित होने के साथ ही बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी भी छूटी है. कोरोना काल के आठ माह में झारखंड में एक ओर जहां 3127 छोटी-बड़ी कंपनियां बंद हुईं, वहीं दूसरी ओर 1.30 लाख लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोनी पड़ी. इस कारण 8.43 करोड़ रुपए पीएफ खाते में जमा नहीं हो पाया. इन कंपनियों के बंद होने पर अधिकतर कर्मचारियों की नौकरी गई.

 

बेरोजगारी का सबसे अधिक असर कोल्हान प्रमंडल में देखने को मिला. पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसांवा में करीब 1000 कंपनियों के शटर गिर चुके हैं. जबकि राज्य के अन्य 21 जिलों में करीब 2100 कंपनियां आठ माह में बंद हुई.

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फरवरी के बाद हर माह कम होती गई 10 हजार नौकरियां

लॉकडाउन के बाद मार्च से ही बेरोजगारी की दर बढ़ती गयी. फरवरी में जो नौकरियों की दर बढ़ रही थी, वो मार्च में 14 हजार कम हुई. अप्रैल में 37 हजार तक कम हो गई. मई माह में 23 हजार, जून में 17 हजार और इसी तरह अक्तूबत तक यह आंकड़ा कम होता गया. दूसरी ओर रोजगार देने जैसी किसी योजना पर न ही केंद्र और न ही राज्य सरकार की ओर से पहल की गई. हालांकि इसके बाद से अनुबंध पर रोजगार मुहैया कराने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है.

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कोल्हान प्रमंडल से 75 हजार और बाकी जिलों से 55 हजार परिवार सड़क पर आ गए

कोरोना काल में कंपनियों ने भी अपने कर्मचारियों को संभलने का कोई मौका नहीं दिया. कंपनियों से अकेले कोल्हान प्रमंडल से करीब 75 हजार कर्मचारियों को नौकरी से हाथ गवानी पड़ी. वहीं, बाकी जिलों से 55 हजार लोग बेरोजगार होकर सड़क पर आ गए. दूसरी ओर केंद्र सरकार लगातार सभी कंपनियों को नौकरी से नहीं हटाने का आदेश देती रही, लेकिन लेकिन इसका कोई सार्थक परिणाम नहीं दिखा और फरवरी से लेकर अक्तूबर तक लगातार लोग बेरोजगार होते रहें.

कोल्हान में सर्वाधिक इंडस्ट्री होने से बढ़ी परेशानी

जमशेदुपर में सबसे अधिक इंडस्ट्रीज होने की वजह से बेरोजगारी दर भी इस क्षेत्र में सबसे अधिक देखी जा रही है. यहां अधिकतर कर्मचारियों का पीएफ खाता है, जबकि कई ऐसे भी लोग बेरोजगार हुए जिनका पीएफ खाता खुला ही नहीं है. ऐसी कंपनियों पर नकेल कसने के लिए श्रम विभाग की ओर से कार्रवाई भी की जा रही है.

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