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झारखंड : गोवंश हत्या प्रतिषेध अधिनियम को मंजूरी मिले हुए 14 साल, फिर भी पशु तस्करी पर रोक नहीं

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Ranchi : झारखंड में गोवंश हत्या प्रतिषेध अधिनियम को मंजूरी मिले 14 साल हो गए. इसके बावजूद भी झारखंड में पशु तस्करी पर रोक नहीं लग पा रही है. झारखंड के लोहरदगा, रांची, पलामू, चतरा, धनबाद, कोडरमा, जमशेदपुर, गोड्डा, पाकुड़, जामताड़ा, गिरिडीह, लातेहार और साहिबगंज जिले से पशु तस्करी होती है.

बंगाल और बिहार की सीमा से सटे होने के कारण पशु तस्कर इसका पूरा फायदा उठाते हैं. ये क्षेत्र पशु तस्करों के लिए सेफ जोन है. इन इलाकों में समय-समय पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सफलता भी हासिल की है, फिर भी पशुओं की तस्करी में कमी नहीं आ रही है.

सारा खेल रात के अंधेरे में चलता है. पशु तस्करी में एक बड़ा रैकेट काम कर रहा है. इनमें झारखंड, बिहार, बंगाल और उत्तरप्रदेश के तस्कर शामिल हैं. इन जिलों की पुलिस पशु तस्करी रोकने के नाम पर कभी-कभी कार्रवाई करके सिर्फ खानापूर्ति करने का काम करती है. झारखंड में गो तस्करी करने वाले गिरोह ने अपना बड़ा सिंडिकेट तैयार किया है. इस सिंडिकेट के लोगों की प्रशासन के लोगों से भी मिलीभगत है.

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वाहनों को पार कराने के लिए तस्कर के एजेंट करते हैं स्कॉट

पशु की तस्करी के लिए हाइवा ट्रक, कंटेनर, पिकअप, 407 व अन्य छोटे वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे वाहनों को पार कराने के लिए पहले से ही तस्कर के एजेंट बोलेरो, स्कार्पियो से स्काट करते हैं. सीआईडी की रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े तस्कर सभी रास्तों में प्रशासन को मैनेज करने की बात सिंडिकेट सदस्यों को कही है.

सभी गाड़ी मालिकों और दूसरे व्यापारियों की तीन से चार गाड़ी हर दिन पार कराने पर सहमति बनाई गई है. गोवंश तस्करी के लिए सभी वाहनों को टोकन दिया जाएगा. इस टोकन में गाड़ी का नंबर भी अंकित रहेगा. जिन रास्तों से ये गाड़ियां गुजरेंगी, उन रास्तों में प्रशासन के लोगों को गाड़ी का नंबर मैसेज कर दिया जाएगा. जिसके बाद बंगाल बोर्डर में सभी गाड़ियों को टोकन जमा करना होगा.

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जीटी रोड से बड़े पैमाने पर पशुओं को भेजा जाता है पश्चिम बंगाल 

धनबाद जिले से गुजरनेवाले जीटी रोड से बड़े पैमाने पर पशुओं को पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश भेजने का धंधा चल रहा है. इसमें मवेशी तस्करों का बड़ा गिरोह काम कर रहा है.

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मिली जानकारी के अनुसार जानवरों की तस्करी का यह धंधा धनबाद जिले के जीटी रोड पर पड़नेवाले थानों की पुलिस की कमाई का बड़ा स्त्रोत बना हुआ है. हर दिन जानवर लदे 100 से अधिक ट्रक जीटी रोड होकर पश्चिम बंगाल में प्रवेश करते हैं.पश्चिम बंगाल से फिर पशुओं को बांग्लादेश भेजा जाता है.

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झारखंड में हर साल होती है 6-10 लाख पशुओं की तस्करी

आंकड़ों के अनुसार जहां पूरे भारत में प्रतिवर्ष 50 लाख से अधिक पशुओं को तस्करी करके बांग्लादेश भेजा जाता है. वहीं सिर्फ झारखंड से हर साल 6 से 10 लाख पशुओं की तस्करी करके उसे बांग्लादेश भेजा जाता है.

झारखंड में सबसे अधिक धनबाद, गिरिडीह पाकुड़ गोड्डा और साहिबगंज जिले में पशुओं की तस्करी का धंधा फल-फूल रहा है. यहां जिस पशु का दाम 3-4 हजार रुपया होता है, वहीं उस पशु का दाम बांग्लादेश में 60 हजार है.

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गोवंश हत्या प्रतिषेध अधिनियम की मंजूरी के बाद भी रोक नहीं

22 नवंबर, 2005 को झारखंड में गोवंश हत्या प्रतिषेध अधिनियम को मंजूरी दी गयी. इस अधिनियम के तहत गाय-बैल को राज्य से बाहर ले जाने पर प्रतिबंध है. एसपीसीए निरीक्षकों को अधिनियम के प्रावधानों को लागू करना है.

पशुओं पर क्रूरता करनेवालों के खिलाफ कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन भेजना है. स्थानीय थाना से सहयोग लेना है. एफआईआर के लिए थानों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती है. इसके बावजूद पशुओं की तस्करी की जा रही है.

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