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झारखंड में जारी है भूख से मौत का सिलसिला- भोजन का अधिकार अभियान

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Ranchi: भोजन का अधिकार अभियान ने बयान जारी कर कहा है कि झारखंड में पिछले 25 दिनों में कम-से-कम दो और लोगों की भूख से मौत हुई है. भोजन का अधिकार अभियान के अशर्फी नंद प्रसाद ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि सितम्बर 2017 से अब तक 17 लोग भूख से मौत के शिकार हुए हैं. हाल में ही दुमका के जामा प्रखंड के महुआटार गांव के 45-वर्षीय कलेश्वर सोरेन की भूख से मौत हो गयी. भोजन का अधिकार अभियान, झारखंड के एक फैक्ट फाइंडिंग दल ने पाया कि आधार कार्ड से नहीं जुड़े होने के कारण कलेश्वर के परिवार का राशन कार्ड रद्द कर दिया गया था.

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जीर्णशीर्ण घर में रहते थे कलेश्वर

कलेश्वर एक जीर्णशीर्ण कच्चे घर में अत्यंत गरीबी में रहते थे. घर में उनके पास एक खटिया छोड़कर कुछ नहीं था. दो जून की रोटी तक कलेश्वर को नसीब नहीं थी. कलेश्वर किसी तरह अपने पड़ोसियों द्वारा दिए गए खाने पर जीते थे. खाने की कमी के कारण कमज़ोर हो चुके कलेश्वर की मज़दूरी का काम भी छूट गया था. घर में पांच बच्चे हैं, जो रोटी की जुगाड़ में लगे हैं. वही उनके दो बड़े बेटों जो राजस्थान में मज़दूरी करते हैं, उन्हें ठेकेदार ने पिछले दो वर्षों में एक बार भी वापस अपने गांव जाने नहीं दिया. वे पिता की मृत्यु के बाद भी नहीं आ पाएं.

आधार से लिंक नहीं होने के कारण राशन कार्ड रद्द

आधार कार्ड से नहीं जुड़े होने के कारण परिवार का (गुलाबी) राशन कार्ड 2016 में रद्द कर दिया गया था. तब से परिवार को जन वितरण प्रणाली अंतर्गत सस्ता अनाज नहीं मिल रहा. क्षेत्र के राशन डीलर के अनुसार, परिवार का कार्ड रद्द होने के बाद कलेश्वर को आधार जमा करने बोला गया था. लेकिन आधार खो जाने के कारण वो ऐसा नहीं कर पाएं. वही ग्राम पंचायत मुखिया दावा करते हैं कि उन्होंने कलेश्वर को खाद्यान कोष से कुछ अनाज दिया था. हालांकि तथ्यान्वेषण दल इस दावे का सत्यापन नहीं कर पाई,. लेकिन इससे यह स्पष्ट होता है कि भूखमरी समाप्त करने का सरकार का यह उपाय विफ़ल है.

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गांव के 27 परिवारों का राशन कार्ड हुआ था रद्द

कलेश्वर के अलावा, उनके गांव के अन्य 27 परिवारों के राशन कार्ड भी 2016 में रद्द कर दिए गए थे. लेकिन एक साल बाद आधार कार्ड और बैंक खाते की कॉपी जमा करने के कारण 26 परिवारों का नाम फिर से राशन सूची में जोड़ा गया था. वही कलेश्वर के अलावे गांव के जियन किस्कू का राशन कार्ड फिर से जोड़ा नहीं गया है.

कलेश्वर की मौत के कुछ दिनों पहले ही 1 नवम्बर को मार्गोमुंडा प्रखंड (देवघर) के मोती यादव की मृत्यु हो गयी थी और 25 अक्टूबर को बसिया प्रखंड (गुमला) की सीता देवी ने दम तोड़ दिया था. नेत्रहीन मोती यादव की मौत गरीबी के कारण हुई. हालांकि उन्होंने विकलांगता पेंशन के लिए आवेदन दिया था, लेकिन पेंशन मिला नहीं. 75 वर्षीय सीता देवी की भूख से मौत हो गयी, क्योंकि उनके पास मरने से पहले न खाना था और न ही पैसा. हालांकि उनके पास राशन कार्ड था. लेकिन वो अक्टूबर में राशन नहीं ले पायीं क्योंकि बीमारी के कारण राशन दुकान तक सत्यापन करने नहीं जा पायीं. सीता देवी वृद्धा पेंशन से भी वंचित थीं, क्योंकि उनका बैंक खाता आधार से जुड़ा नहीं था.

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सितम्बर 2017 से भूख से 17 लोगों की मौत

सितम्बर 2017 से अबतक 17 लोगों की भूख से मौत हो गई. इसमें 8 आदिवासी, 4 दलित और 5 पिछड़े शामिल हैं. इन मौतों का कारण है मृतक एवं उनके परिवार के पास अनाज न होना था. क्योंकि उनका राशन कार्ड या तो बना ही नहीं था, बना भी था तो आधार से लिंक नहीं होने के कारण रद्द कर दिया गया था, या फिर राशन कार्ड होने के बावजूद मशीन में आधार आधारित सत्यापन नहीं होने के कारण राशन नहीं मिल पाया.

जन वितरण प्रणाली से अनाज न मिलने के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा पेंशन और राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी कानून (नरेगा) में काम न मिलने से भी इन परिवारों में भूखमरी की स्थिति हो गई. कुल 17 में से भूख से मौत के शिकार हुए 7 व्यक्ति सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भी हकदार थे. लेकिन प्रशासनिक लापरवाही एवं आधार सम्बंधित समस्याओं के चलते उन्हे पेंशन नहीं मिला.

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क्या है भोजन के अधिकार अभियान की मांग

भूखमरी की समस्या के निराकरण के लिए भोजन का अधिकार अभियान लगातार निम्न मांगे करते रहा है –
1) जन वितरण प्रणाली का ग्रामीण क्षेत्र में सार्वभौमिकरण ताकि कोई भी परिवार न छूटे
2) जन वितरण प्रणाली में सस्ता दाल व खाद्यान तेल शामिल किया जाए
3) कल्याणकारी योजनाओं से आधार की अनिवार्यता समाप्त की जाए
4) सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं का सार्वभौमिकरण
5) इन मौतों के लिए ज़िम्मेवार सरकारी पदाधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए.
लेकिन राज्य सरकार लगातार इन मौतों को स्वाभाविक या बीमारी से मौत बता रही है और न कि भूख से.

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