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JBVNL की ऑडिट रिपोर्ट में लिखा- प्रबंधन के रवैये से निगम संचालन पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव

ऑडिटर को उपलब्ध करायी गयी जानकारी और दस्तावेज संतोषजनक नहीं

टीडीएस तो काटे गये, लेकिन ऑडिटर को नहीं मिला ब्यौरा और न ही दस्तावेज

Chhaya

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Ranchi: झारखंड बिजली वितरण निगम के जिम्मे राज्य की बिजली व्यवस्था है. लेकिन अपनी ही व्यवस्था बनाये रखने में निगम असफल है. आय-व्यय से लेकर संपत्ति तक की सही जानकारी निगम के पास नहीं रहती. यह बात निगम की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आयी है.

निगम की ओर से यह ऑडिट रिपोर्ट विद्युत नियामक आयोग को सौंपी गयी. नियामक आयोग की मानें तो निगम की इस ऑडिट रिपोर्ट में कई खामियां हैं. खुद रिपोर्ट में ऑडिटर की ओर से इन खामियों के साथ निगम को सुचारू रूप से चलाने में बाधा बताते हुए आपत्तियां दर्ज की गयी.

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रिपोर्ट में जिक्र है कि निगम अगर इसी तरह चला तो, प्रबंधन के रवैये से नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. इस रिपोर्ट के मुताबिक, जेबीवीएनएल की आय और व्यय का ब्यौरा स्पष्ट नहीं है. लेखा खाता से संबंधित जो भी जानकारी ऑडिटर ने पाये, वो संतोषजनक नहीं रहे. जिसमें बकाया और भुगतान की सही जानकारी नहीं है. जो जानकारियां उपलब्ध है, वो भी स्पष्ट नहीं है.

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गलत तरीके से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट रिफंड किया

ऑडिटर ने आपत्ति जताते हुए लिखा है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से एक लाख 27 हजार 550 रुपये जेबीवीएनएल के खाते में रिफंड किये गये. जो कि साल 2016-17 के दौरान की गयी. लेकिन डिपार्टमेंट ने ये रिफंड किस आधार पर किया ये स्पष्ट नहीं है. वहीं कई ऐसे अन्य मद है कि जिसका भुगतान निगम की ओर से किया ही नहीं गया है.

जेबीवीएनएल की ऑडिट रिपोर्ट में कई खामियों का जिक्र

जेबीवीएनएल की ओर से भूमि और अन्य संपत्तियों का अलग ब्यौरा ऑडिटर को नहीं दिया गया. और न ही इनका मूल्य दिखाया गया. जबकि निगम के पास भूमि और लीज में ली गयी भूमि लगभग 1.54 करोड़ की है. वहीं अन्य संपत्तियों का मूल्य 7873.19 करोड़ है. भारतीय अकाउंटिंग स्टैंर्डड के अनुसार, सभी संपत्तियों का ब्यौरा ऑडिटिंग के दौरान अलग-अलग दिखाया जाना चाहिये. वही जेबीवीएनएल की ओर से चल रही अलग-अलग योजनाओं का स्कीम वाइज जानकारी भी नहीं दी गयी है.

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टीडीएस काटे गये, लेकिन ऑडिटर को नहीं मिला ब्यौरा

साल 2018-19 के दौरान जेबीवीएनएल की ओर से 3.80 करोड़ रूपये का भुगतान किया गया. लेकिन इसके लिये कंपनी ने टीडीएस में कटौती नहीं की. जो कि 0.8 करोड़ रुपये लगभग होते हैं. टैक्स ऑडिट रिपोर्ट में भी इसका जिक्र किया गया है. कुछ कंपनियों को टीडीएस काटते हुए भुगतान की जानकारी ऑडिटिंग के दौरान दी गयी. लेकिन इससे संबंधित दस्तावेज निगम ने उपलब्ध नहीं कराये. इसमें टेंडर लेने वाली कंपनियों के साथ एनटीपीसी और पीवीयूएनएल भी है. इस रिपोर्ट में ऑडिटर की ओर से स्पष्ट जानकारी दी गयी है कि इनकम टैक्स, सेल्स टैक्स, सर्विस टैक्स और इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से संबंधित कोई जानकारी नहीं दी गयी. न ही इन मामलों के दस्तावेज ही उपलब्ध कराये गये.

नियामक आयोग की मानें तो जेबीवीएनएल की ऑडिट रिपोर्ट में कई त्रुटियां थी. जिस पर संशोधन चल रहा है. फरवरी में इस संबध में जेबीवीएनएल की ओर से एक पत्र नियामक आयोग को लिखा गया. जिसमें खामियों की बात स्वीकार की गयी. फिलहाल इस पर काम किया जा रहा है.

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