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नावा पावर का 200 ट्रक कोयला बनारस भेज रही थी प्रणव नमन कंपनी, यूपी में पकड़े गये ट्रक

नावा पावर कंपनी ने कहा- प्रणव नमन कंपनी के साथ बंद कर दिया है काम

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Ranchi : झारखंड से बनारस जा रहा 200 ट्रक कोयला (करीब 5000 टन) यूपी में पकड़ाया है. कोयला नावा पावर नामक कंपनी का है. यह कोयला चतरा के टंडवा की आम्रपाली कोलियरी से हजारीबाग के कटकमसांडी स्थित रेलवे साइडिंग के लिए चला था. लेकिन कोयला को हजारीबाग के बजाय जीटी रोड ले जाया गया. फिर बनारस ले जाया जा रहा था. इसकी सूचना मिलने पर नावा पावर कंपनी के लोगों ने सभी ट्रकों को यूपी में पकड़ लिया. हालांकि इस मामले में पूछे जाने पर नावा पावर कंपनी के झारखंड हेड सौरभ पटेल ने सिर्फ इतना कहा कि कंपनी ने प्रणव नमन नामक ट्रांसपोर्ट कंपनी से नाता तोड़ लिया है. सूचना के मुताबिक नावा पावर कंपनी के द्वारा 200 ट्रक कोयला पकड़ने के बाद मामले को रफा-दफा करने के लिए झारखंड के कुछ उच्चाधिकारी सक्रिय हो गये हैं.

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स्थानीय विधायक का संरक्षण प्राप्त है

जानकारी के मुताबिक प्रणव नमन नामक कंपनी कई पावर कंपनियों के लिए कोयला ट्रांसपोर्टिंग का काम करती है. इस कंपनी के मालिक का नाम बिपिन मिश्रा है. बिपिन मिश्रा को झारखंड पुलिस ने अंगरक्षक भी उपलब्ध करा रखा है. प्रणव नमन कंपनी ही नावा पावर कंपनी के लिए कोयला ट्रांसपोर्टिंग का काम करती थी. हजारीबाग का मुन्ना सिंह नाम का व्यक्ति प्रणव नमन कंपनी को लिए कटकमसांडी साइडिंग में लिफ्ट का काम करता है. मुन्ना सिंह को स्थानीय विधायक का संरक्षण प्राप्त है. नावा पावर कंपनी को आम्रपाली कोलियरी से कोयला जाता है.

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पहले भी जेल जा चुके हैं बिपिन मिश्रा

तय रूट के अनुसार कोयला को आम्रपाली से कटकमसांडी रेलवे साइडिंग पहुंचाया जाना था. सूत्रों के मुताबिक प्रणव नमन कंपनी के मालिक और लिफ्टर मुन्ना सिंह ने कोयला को कटकमसांडी के बजाय बनारस भेज दिया. कोयला कारोबार के जानकार मानते हैं कि यह काम चतरा औऱ हजारीबाग की चौपारण पुलिस की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है. यहां उल्लेखनीय है कि मुन्ना सिंह नामक लिफ्टर का नाम पहले भी कोयला में चारकोल मिलाने के मामले में सामने आय़ा था.

बिपिन मिश्रा भी पूर्व में कोयला की कालाबाजारी के मामले में रामगढ़ पुलिस द्वारा गिरफ्तार करके जेल भेजे जा चुके हैं. नावा पावर का कोयला बनारस ले जाकर बेचने का काम भी लंबे समय से चल रहा था. जो कोयला बनारस ले जाकर बेचा जाता था,  उसके बदले रेलवे साइडिंग पर उतना ही पत्थर औऱ चारकोल अच्छी क्वालिटी के कोयला में मिला कर रैक पर लोड कर दिया जाता था.

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