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बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे 38 कैदियों को गांधी जयंती पर किया गया रिहा

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Ranchi : महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल होटवार में उम्रकैद की सजा काट रहे 38 कैदियों को मंगलवार को रिहा कर दिया गया. इन सभी 38 कैदियों उनके अच्छे आचरण और व्यवहार को देखते हुए जेल प्रशासन ने उन्हें छोड़ने का निर्णय लिया. पिछले दिनों 129 बंदियों को छोड़ने पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित राज्य सजा पुनरीक्षण परिषद ने मुहर लगायी थी. उनमें से 38 बंदी होटवार स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में थे. इन बंदियों को दो अक्टूबर को जेल से छोड़ने की योजना बनायी गयी थी. सभी बंदियों को छोड़ने के पूर्व जेल प्रशासन ने उनसे शपथपत्र भरवाया कि वे जेल से बाहर आकर ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिससे दूसरों को परेशानी हो. समाज के लोगों के साथ मिलकर रहेंगे. जेल से छूटे सभी 38 कैदियों के चेहरे पर रिहा होने की खुशी साफ नजर आ रही थी. सभी को अपने परिजनों से मिलने की बेचैनी थी.

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17-18 साल से जेल में काट रहे थे सजा

जिन 38 कैदियों रिहा किया गया है, वे सभी पिछले 17 या 18 साल से जेल में सजा काट रहे थे. मंगलवार को इन्हें रिहा करने से पहले बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल प्रशासन द्वारा शपथ दिलायी गयी. इन्हें शपथ दिलायी गयी कि उनके द्वारा जो भी आपराधिक घटना को अंजाम दिया गया था, वह अब छूटने के बाद नहीं करेंगे. समाज के लोगों के साथ मिलकर और भाईचारा बनाकर अपना जीवन यापन करेंगे. आगे कोई ऐसा काम नहीं करें, जिसके कारण फिर जेल आनी पड़े.

किसी ने कहा दुकान खोलेंगे, तो किसी ने ऑटो चलाकर कमाने की कही बात

जेल से छूटे इन सभी कैदियों को जेल में उनके द्वारा किये गये काम के एवज मेहताना के रूप में पैसे भी मिले हैं. इन पैसों का क्या करेंगे, इस सवाल पर रिहा हुए लोगों में से किसी ने कहा कि बिजनेस करेंगे, तो किसी ने कहा कि ऑटो खरीदकर उसे चलायेंगे और उससे जीवन-यापन करेंगे.

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इन 38 कैदियों को किया गया रिहा

सुकरा मुंडा, जगरनाथ सिंह मुंडा, चोनो सिंह, राजेंद्र लाल, रामवृक्ष सिंह, सुखलाल सिरका, वासु साहू, डोमना साहू, अनिरुद्ध साहू, जेठा मुंडा, चरलेश उरांव, रामचंद्र सिंह मुंडा, चौधरी महतो, बंधन मुंडा, हीरा मुंडा, मदन सिंह मुंडा, भीमसेठ राम, देवनीश धान, भूषण खंडित, राम लोहार, आदित्य कुमार साहू, क्रांति खंडित, आनंद पंडित, अल्फांसो सोरेन, लोधा महली, नपोचंपिया, मनोहर महतो, दासू महतो, जोहन मिंज, किसुन सिंह मुंडा, बलवा उरांव, दसरू उरांव, अनूप कुमार साहू, गंशु उरांव, पवन मुंडा, लखन लोहार, अशोक पासवान और गर्दी गुंजा.

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क्या कहते हैं जेल से रिहा हुए कैदी

पलामू के राजेंद्र लाल ने कहा कि हत्या करने के मामले में आजीवन कारावास हुई थी. पिछले 17 साल से जेल में बंद थे. आज जेल से रिहा होने की खुशी है. जेल में माली का काम करते थे. जिसके एवज में 1.20 लाख रुपये मिले. इससे वह खुद का बिजनेस शुरू करेंगे.

बुंडू के रहनेवाले किशन सिंह मुंडा ने कहा कि हत्या करने के मामले में आजीवन कारावास की सजा हुई थी. पिछले 17 सालों से जेल में बंद थे. आज रिहा हुए हैं. परिजनों से मिलने की खुशी है. जेल में कपड़ा धोने का काम करते थे. इसके एवज में 90,000 रुपये मिले हैं, इससे वह अपनी दुकान खोलेंगे और समाज के साथ मिलकर रहेंगे. उन्होंने कहा कि कभी कोई ऐसी गलती नहीं करेंगे, जिससे दोबारा जेल का मुंह देखना पड़े.

पश्चिम बंगाल निवासी रामचंद्र सिंह मुंडा ने कहा कि 21 वर्ष की उम्र में हत्या करने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी थी. जेल में फूलों को पानी पटाने का काम करते थे. उसके एवज में 80,000 रुपये मिले हैं, जिससे अपना कोई छोटा-मोटा काम करेंगे.

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क्या कहा जेल आईजी ने

बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार के आईजी ने कहा कि इन सभी 38 कैदियों को उनके अच्छे आचरण और व्यवहार को देखते हुए आज रिहा किया गया. इनसे शपथपत्र में यही शपथ दिलायी गयी है कि यहां से छूटने के बाद वे कोई ऐसा काम नहीं करेंगे कि दोबारा इन्हें जेल का मुंह देखना पड़े. समाज के साथ मिलकर रहेंगे और खुशी-खुशी अपने परिवार का जीवन-यापन करेंगे.

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