
Ranchi : झारखंड बिजली वितरण निगम के राजस्व वसूली में इजाफा हुआ है. कोरोना लॉकडाउन के पहले से जेबवीएनएल के राजस्व वूसली में कमी देखी जा रही थी. अब सिंतबर महीने से इसमें इजाफा हुआ है. अक्टूबर महीने में जेबीवीएनएल को 330 करोड़ रूपये राजस्व वसूली बिलिंग से हुई. हालांकि बिलिंग को मजबूत करने के लिये जेबीवीएनएल मुख्यालय ने उपभोक्तओं पर कई तरह से लगाम लगाया. जिसमें बिजली चोरी की नियमित जांच, 10 हजार से अधिक बकायेदारों से वसूली की गयी.
सिर्फ रांची जिला में 25 हजार ऐसे बकायेदारों को चिन्हित किया गया, जिनका बिजली बिल बकाया दस हजार से अधिक है. बता दें जेबीवीएनएल की राजस्व का मुख्य स्रोत बिलिंग कलेक्शन है. राजस्व में कमी के कारण जेबीवीएनएल का बिजली जेनरेटर कंपनियों का बकाया भी हो गया है. ऐसे में बिलिंग पर्याप्त होने से जेबीवीएनएन जेनरेटरों का भुगतान कर सकती है. इसके पहले डीवीसी के मामले में केंद्र ने हस्तक्षेप किया. अब डीवीसी के बकाया का भुगतान केंद्र की ओर से ही किया जा रहा है.
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फरवरी से प्रभावित रही बिलिंग
भले केंद्र सरकार ने लॉकडाउन 22 मार्च को लागू किया. लेकिन फरवरी से ही कोरोना के कारण जेबीवीएनएल के राजस्व में असर देखा गया. आमूमन जेबीवीएनएल हर महीने 300 करोड़ बिलिंग का लक्ष्य रखती है. फरवरी में मात्र 29 लाख ही वूसली हुई. मार्च में 46 लाख 460 रूपये राजस्व वसूली हुई थी. अप्रैल में जेबीवीएनएल को 90 करोड़ राजस्व वसूली हुई.
इस महीने तक जेबीवीएनएल की ओर से ईजी बिजली एप्प तैयार कर ली गयी थी. जिसके कारण राजस्व में इजाफा दर्ज किया गया. मई में जेबीवीएनएल को 120 करोड़ राजस्व वसूली हुई. वहीं जून में यह राशि 225 करोड़ रूपये रही. कुल उपभोक्ताओं की संख्या वर्तमान में 45 लाख के आस पास है. मालूम हो कि लॉकडाउन के दौरान ही जेबीवीएनएल ने बिलिंग और मीटर रीडिंग के लिये अलग से एप तैयार किया. जिससे राजस्व वसूली में आसानी हुई.
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आर्थिक गतिविधियां सामान्य होने से बिलिंग हुई सामान्य
राज्य में लॉकडाउन के बाद जैसे जैसे आर्थिक गतिविधियां सामान्य हुई. बिलिंग वसूली भी सामान्य होते गयी. हालांकि मुख्यालय के निर्देश के बाद आपूर्ति क्षेत्रों की सख्ती ने उपभोक्ताओं को बिल भरने को मजबूर किया. मई के बाद से ही जेबीवीएनएल मुख्यालय इस क्षेत्र में सख्त दिखी. दस हजार अधिक बकायेदारों से वूसली के मामले में सिर्फ रांची विद्युत आपूर्ति क्षेत्र से सिंतबर में 60 करोड़ रूपये तक वसूले गये.
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