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घाटे में बिजली वितरण निगम लिमिटेड, बिजली खरीदने वाली संस्थाओं का लगभग 10,000 करोड़ बकाया

Ranchi: झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड अपने स्थापना काल से ही राजस्व घाटा में चल रहा है. जेबीवीएनएल को यह घाटा बिजली चोरी और बिल सही समय में नहीं वसूलने के कारण हुआ है.

हालांकि पूर्व की सरकार ने इसके स्थापना के साथ ही, 5534 करोड़ का लोन भी दिया. लेकिन इसके बाद भी जेबीवीएनएल 2014 से लगातार घाटा में रहा.
जेबीवीएनएल की वर्तमान स्थिति ऐसी है कि बिजली आपूर्ति के लिये जिन संस्थानों से बिजली खरीदी जा रही है. उसका ही बकाया लगभग 10 हजार करोड़ है.

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इसमें डीवीसी के लगभग 4995 करोड़ रूपये बकाया है. टीवीएनएल में 4400 करोड़ का बकाया है. पिछले साल नंवबर में जेबीवीएनएल ने 25 करोड़ रूपये एनटीपीसी को दिया. जिससे एनटीपीसी का बकाया अब नहीं है.

फिलहाल प्रति तीन सौ यूनिट बिजली खपत में उपभोक्ताओं को सौ यूनिट मुफ्त बिजली देने की योजना बनायी जा रही है. इसके लिये वर्तमान सरकार ने एक हजार करोड़ का प्रावधान किया है.

पांच साल में JBVNL को मिले 30 हजार करोड़

पूर्व की सरकार ने साल 2014 में जेबीवीएनएल की स्थापना की. उदय योजना के तहत 5534 करोड़ का लोन के साथ ही, पूर्व सरकार ने पिछले पांच सालों में लगभग 30 हजार करोड़ रूपये दिये. ये राशि जेबीवीएनएल को अलग-अलग योजनाओं के तहत दी गयी.

इसके साथ ही पूर्व सरकार ने जेबीवीएनएल को सब्सिडी देने की भी येाजना बनायी. साल 2019 को छोड़ दें तो पूर्व सरकार ने हर साल जेबीवीएनएल को समय पर अनुदान दिया.

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विधानसभा सत्र में वर्तमान सरकार ने जेबीवीएनएल के कार्यशैली और इसके बकाये का जिक्र करते हुए बताया कि जेबीवीएनएल ने पिछले पांच सालों में योजनाओं को बिना स्टडी किये लागू किया. जिससे ये स्थिति हुई है. सभी बकायों के अलावा सभी बिजली निगमों के रिटायर्ड कर्मियों के पेंशन का बोझ भी सरकार पर है. जिसमें हर महीने 30 करोड़ लगते है.

भविष्य में 7600 करोड़ के नुकसान की संभावना

विधानसभा सत्र में जेबीवीएनएल की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए बताया गया कि आने वाले सालों में जेबीवीएनएल में चल रही योजनाओं से लगभग 7600 करोड़ या उससे अधिक नुकसान होने की संभावना है.

जबकि जेबीवीएनएल और झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड के येाजनाओं और बकाये का दायित्व जोड़ा जाये तो कुल 21 हजार करोड़ रूपये से भी अधिक होगा.

बता दें बकाये के कारण ही डीवीसी फरवरी से जेबीवीएनएल को बिजली कटौती करने का नोटिस दे रही है. जबकि पिछली सरकार ने जेबीवीएनएल को नवंबर से 350 करोड़ सब्सिडी की राशि नहीं दी है.

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