
Shimla: हिमाचल प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री रहे दिग्गज कांग्रेसी नेता वीरभद्र सिंह का निधन हो गया. वह 87 साल के थे. कोरोना संक्रमित होने के बाद पिछले ढाई माह से आईजीएमसी अस्पताल शिमला में दाखिल थे. बताया जा रहा है कि आज तड़के 3.40 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. आईजीएमसी के एमएस डॉ. जनक राज ने उनकी मौत की पुष्टि की है. पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रदेश में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है. इनके निधन से हिमाचल प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है.
वीरभद्र सिंह 1983 से 1985 पहली बार, फिर 1985 से 1990 तक दूसरी बार, 1993 से 1998 में तीसरी बार, 1998 में कुछ दिन चौथी बार, फिर 2003 से 2007 पांचवीं बार और 2012 से 2017 छठी बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. लोकसभा के लिए वह पहली बार 1962 में चुने गए.
उन्होंने पहली बार महासू लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था. लोकसभा के लिए वीरभद्र सिंह 1962, 1967, 1971, 1980 और 2009 में चुने गए. वर्तमान में अर्की से विधायक थे. इंदिरा गांधी की सरकार में वीरभद्र सिंह दिसंबर 1976 से 1977 तक केंद्रीय पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री रहे. दूसरी बार भी वह इंदिरा सरकार में ही वर्ष 1982 से 1983 तक केंद्रीय उद्योग राज्यमंत्री रहे. फिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व की केंद्र की यूपीए सरकार में वीरभद्र सिंह 28 मई 2009 से लेकर 18 जनवरी 2011 तक कैबिनेट मंत्री रहे. वीरभद्र सिंह बुशहर राज परिवार से जुड़े थे. उनका जन्म 23 जून, 1934 को बुशहर रियासत के राजा पदम सिंह के घर में हुआ था.




