JharkhandRanchiTop Story

जमशेदपुर : हाईटेक थानों का दावा झूठा, जर्जर भवन और शौचालय की समस्या से परेशान हैं पुलिसकर्मी

Jamshedpur : राज्य में राजधानी रांची सहित कई अन्य जिलों में पुलिस थानों को हाईटेक बनाया गया है. मगर राज्य की औद्योगिक शहर जमशेदपुर में आज भी कई थाने पुराने और जर्जर भवन में चल रहे हैं.

ऐसे थानों में से मानगो,उलीडीह आजादनगर, गालूडीह और एमजीएम थाना शामिल है. इन सभी थानों की हालत दयनीय है और थाने के भवन को देखकर लगता है कि ना जाने यह कब गिर जाए.

इतना ही नहीं बारिश होते ही छतों से पानी टपकने लगता है. ऐसे में वहां रहना तो मुश्किल होता ही है, साथ ही थाना में रखे कागजातों को भी बचाना किसी चुनौती से कम नहीं रहता है.

इन थानों के हर कमरे में बारिश का पानी जमा रहता है. इसके अलावा पुलिसकर्मियों का बैठना तक मुश्किल रहता है. इसके अलावा भी कई समस्याओं से पुलिसवाले परेशान हैं.

इसे भी पढ़ें – #Honey_Trap सेक्स रैकेट ने नेताओं के साथ 13 IAS को लिया था टारगेट में, वीडियो से  करती थीं ब्लैंक मेलिंग

आजादनगर थाना के लिए बना मॉडल भवन बना बैरक

जमशेदपुर के मुस्लिम क्षेत्र में स्थित आजादनगर थाना संवेदनशील थाना की श्रेणी में आता है. यह थाना महज दो कमरों में ही चलता है. इसका अपना भवन भी बना है, लेकिन वह सरायकेला जिले के कपाली में बना दिया गया है.

आजादनगर थाना का नया भवन जहां बना है, वह कहने को मानगो के अक्षेस के वार्ड नंबर आठ में है. लेकिन पूरा इलाका नाला पार कपाली ही कहलाता है.

यदि रात के वक्त किसी को आजादनगर थाना जाने की जरूरत पड़ गयी तो शायद ही कोई वहां तक पहुंच पाये. साथ ही थाना भवन तक रास्ता भी ठीक नहीं है. इन कारणों से आजादनगर थाना नये भवन में शिफ्ट नहीं हुआ है.

आजादनगर थाना में शौचालय तो है, लेकिन वो भी जर्जर है और उसमें कुंडी तक नहीं है. पीने के लिए पानी भी खरीदकर मंगवाने पड़ता है. इसके अलावा मेस में रहने वाले पुलिसकर्मियों को नहाने और कपड़ा धोने के लिए सरकारी नल का उपयोग करना पड़ता है. और पुलिस के जवान बरामदे में किसी तरह खाना बनाते हैं.

40 वर्षो से अधिक समय से किराये के भवन में चल रहा मानगो थाना

जमशेदपुर के सर्वाधिक संवेदनशील थानों की सूची में शुमार मानगो थाना पिछले 40 वर्षो से अधिक समय से किराये के भवन में चल रहा है. अब तक इस थाने को अपना भवन नहीं मिल सका है.

बरसात के दिनों में तो स्थिति और भी खराब हो जाती है. जानकारी के अनुसार, मानगो थाना किराये के छोटे कमरे के मकान में चलता है. लेकिन बारिश के मौसम में छत से पानी टपकता है.

मानगो थाना में रहने वाले पुलिस के जवानों के लिए पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध है और पावर कटने पर जनरेटर व इनवर्टर की सुविधा भी है.

लेकिन यहां शौचालय का अभाव है. एक शौचालय है, लेकिन वो भी कामचलाऊ है. थाना में रहने वाले जवान महिला और पुरुष दोनों ही को थोड़ी दूर जाकर सुलभ शौचालय का उपयोग करना पड़ता है.

इसे भी पढ़ें – झारखंड विधानसभा को केंद्र से लेना होगा #EnvironmentalClearance, नहीं तो लगेगा जुर्माना, होगी कार्रवाई 

एमजीएम थाने का नहीं है अपना भवन

जमशेदपुर का एमजीएम थाना नक्सल प्रभावित थानों में से एक है. इस थाने का भी अपना भवन नहीं है. बताया जाता है कि भवन की स्थिति इतनी जर्जर है कि कब गिर जाए, इसका कोई ठिकाना नहीं. जबकि यह थाना शहर के महत्वपूर्ण थानों में से एक है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में पुलिस के जवान रहते हैं.

इस थाना में क्यूआरटी टीम भी रहती है. एमजीएम थाना का अधिकतर इलाका नक्सल प्रभावित क्षेत्र में आता है. थाना में पानी, शौचालय की दिक्कत तो नहीं है,लेकिन भवन की स्थिति पूरी तरह से दयनीय है.

उलीडीह थाना में एक कमरे के अलावा सिर्फ बरामदा

जमशेदपुर का उलीडीह थाना का भी अपना भवन नहीं है. यह थाना किराये के भवन में संचालित होता है. जानकारी के मुताबिक, इस थाना में थाना प्रभारी के एक कमरे के अलावा बरामदा से ही सारा काम होता है.

थाने में सरकारी नल लगा हुआ है, जिसका उपयोग नहाने व कपड़ा साफ करने में किया जाता है. लेकिन इस थाना में शौचालय ही नहीं है.

जो जानकारी मिली उसके मुताबिक, पास में ही सिंचाई विभाग का कार्यालय है और इस थाना के पुलिसकर्मी भी उसी शौचालय का उपयोग करते हैं.

गालूडीह थाना की बनने के 9 वर्ष बाद भी अपना भवन नहीं

गालूडीह थाना की पहचान उसके जर्जर भवन से होती है. गौरतलब है कि जमशेदपुर जिला में जब नक्सली गतिविधियां जोरों पर थी, तो उस वक्त नक्सली गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए   23 नवंबर 2011 को गालूडीह में थाना का निर्माण किया गया.

सुवर्णरेखा परियोजना के एक जर्जर भवन से ही उस समय थाना का संचालन किया जा रहा था. लोगों को और पुलिसकर्मियों को उम्मीद थी कि जल्द ही गालूडीह थाना के लिए नया भवन बनवाया जाएगा, पर ऐसा नहीं हो सका.

वहीं दूसरों की सुरक्षा को लेकर 24 घंटे तत्पर रहने वाले पुलिसकर्मी इस जर्जर भवन में खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं. इस थाना में मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं.

शौचालय भी नहीं है और वहां रहने वाले पुलिसकर्मियों को शौच के लिए दूसरी जगह जाना पड़ता है. थाना के जर्जर भवन में रहने वाले जवान कई बार इन समस्याओं को वरिष्ठ पदाधिकारियों को बता चुके हैं, लेकिन अबतक कोई समाधान नहीं निकल पाया है.

इसे भी पढ़ें – जमशेदपुर : #ShramShakti अभियान के उद्घाटन में श्रमिकों को पगड़ी तो पहना दी, पर नहीं दिया गया रजिस्ट्रेशन कार्ड

Related Articles

Back to top button