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जमशेदपुर : अब तक 26 जाने लें चुके हैं जिले के डैम और नदियां, प्रशासन की लापरवाही से हर साल 50 पार होता है आंकड़ा

Abinash Mishra

Ranchi : इस साल पूर्वी सिंहभूम जिले में केवल नदियों और डैमों में डूबने की वजह से 26 लोगों की जान जा चुकी है. 2018 में डूबने की वजह से मौत का आंकड़ा 55 था.

इसी माह सिंतबर में अब तक चार लोगों की जान केवल डूबने से हो चुकी है. जमशेदपुर चारों तरफ से नदी और डैम से घिरा है.

अक्सर लोग नहाने या घूमने के बहाने नदी किनारे जाते हैं और फोटो या सेल्फी के चक्कर में जान गवां देते है. सबसे ज्यादा मौत डिमना लेक, इचागढ़ डैम और पारडीह कैनाल में डूबने की वजह से हुई है.

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घाटों पर रोज नहाने जाते हैं लोग

स्वर्णरेखा और खरकई नदी भी है जिनके कई घाटों पर हर रोज लोग नहाने जा रहे है और जहां गहराई जानलेवा साबित हो रही है.

ज्यादातर डुबने के मामले गर्मी और बरसात के दिनों में सामने आ रहे हैं. बरसात में अचानक जलस्तर बढ़ने से लोग गहराई को भांप नहीं पाते और बेवजह अपनी जान गंवा रहे हैं.

हर साल सैकडो छात्र और पर्यटक मस्ती के लिए डैम या नदी किनारे पहुंचते हैं लेकिन पल भर की मस्ती मातम में तब्दील हो रही है.

साल दर साल हो रहे हादसों के बीच प्रशासन और पुलिस का कोई ऐसा प्रयास सामने नहीं आया है जिससे ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.

डेजर जोन या चेतावनी बोर्ड हैं नदारद

लगातार हादसों के बावजूद किसी भी नदीघाट या डैम किनारे न तो चेतावनी बोर्ड दिखाई देता है न ही कोई डेंजर जोन. डूबने के जो आंकड़े सामने आएं है वो केवल ऐसे हैं जिनकी शिनाख्त हो पाई है.

इसके अलावा कई लाशें ऐसी भी मिलती हैं जिनकी पहचान नहीं हो पाती और जिसको पुलिस तुंरत डिस्पोज कर देती है.

गोताखोर संबधी जानकारी या फोन नंबर भी कही नजर नहीं आता जिससे इमरजेसी में तुंरत गोताखोरों को बुलाकर जान बचाई जा सके.

खासतौर से डिमना लेक, इचागढ़ डैम, और पारडिह कैनाल में लोगों को खतरे की स्थिति में स्थानीय लोगों का सहारा लेना पड़ रहा है. लेकिन उचित ट्रेनिंग के अभाव में स्थानीय लोग भी जान बचा पाने में असफल रहते हैं.

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लोकल थाना भी नहीं करता गश्ती

नदी किनारे या फिर जिले के किसी भी डैम में पुलिस की गश्ती भी नहीं होती है ताकि लोगों  सावधान रह सके. बेखौफ होकर मौज मस्ती करते लोग लापरवाही का शिकार हो जाते हैं.

खासतौर से डिमना लेक और इचागढ़ डैम आज की तारीख में पर्यटन का बड़ा केद्र बनकर उभरे हैं लेकिन पर्यटन विभाग की तरफ से भी गोताखोरों की टीम नियुक्त नहीं है जो सेफ्टी किट के साथ डैम,लेक या कैनाल पर मुस्तैद दिखे.

क्या कहते हैं डीसी रविशंकर शुक्ला

जिले के डीसी का कहना है की हादसे की संख्या हर साल बढ़ रही है जिसको लेकर प्रशासन गंभीर है.

प्रपोजल भी कई बार सामने आया है त्यौहारों के खत्म होने के बाद इस पर पर्यटन विभाग और शहर के एसएसपी के साथ बैठक कर तय कर लिया जायेगा कि कौन-कौन सी संभावनाएं है जिसके जरिये लोगों की जान बचाई जा सके.

उन्होंने लोगों से अपील की कि नदी या डैम किनारे घूमने जाने वाले लोग सावधानी जरूर बरतें.

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