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आजसू में रहने से अच्छा है चुल्लू भर पानी में डूबकर खुदकुशी करना- कवलजीत सिंह

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Ranchi: सरकार में रहकर समय-समय सरकार का विरोध करनी वाली पार्टी आजसू ने एकबार फिर से सरकार का हाथ मजबूती से पकड़ लिया है. लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ आजसू ने महज एक सीट के लिए गठबंधन कर लिया है. आजसू ने सरकार में रहते हुए सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर हल्ला बोला था. स्थानीय नीति, सीएनटी-एसपीटी जैसे मुद्दों को लेकर सरकार का हिस्सा होते हुए आजसू सरकार का खुल्लमखुल्ला विरोध कर चुकी थी. सरकार को स्थानीय विरोधी तक बता दिया था.

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लेकिन चुनाव नजदीक आते ही, बात-बात पर बीजेपी को आंखें दिखानेवाली आजसू एकबार फिर से भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी. आजसू को गिरिडीह सीट दी गयी है. लेकिन इस गठबंधन के विरोध में स्वर उठने लगे हैं. आजसू के केंद्रीय सचिव कवलजीत सिंह खुलकर पार्टी के खिलाफ सामने आ गये हैं. उन्होंने कहा कि आजसू पार्टी में रहने से अच्छा है, चुल्लू भर पानी में डूबकर खुदकुशी करना. साथ ही कहा कि पार्टी का कोई सिद्धांत नहीं है. एक जात की पार्टी बनकर रह गयी है आजसू.

‘आजसू का नहीं रहा कोई सिद्धांत’

“लोकसभा की एक सीट के लिए आजसू पार्टी ने अपने-आप को गिरवी रखा है. और दिखावे के लिए सीएनटी, एसपीटी और स्थानीय नीति का विरोध कर रही थी. ऐसी पार्टी का कोई सिद्धांत नहीं है. जो स्थानीय और आदिवासी विरोधी कार्य करती है. वैसी पार्टी के केंद्रीय सचिव के पद से मैं इस्तीफा देता हूं. ये नकली आजसू है.

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ये कमल किशोर भगत, ललित महतो, सूर्य सिंह बेसरा, फजल अब्बास, प्रवीण प्रभाकर, विनोद भगत, बिरसा उरांव, रामदयाल मुंडा व अन्य क्रांतिकारियों की पार्टी नहीं रही, बल्कि एक जात की पार्टी, मौसा और भगना, मौसा के भाइयों और अन्य रिश्तेदारों की पार्टी है. ऐसी पार्टी में रहने से अच्छा है, चुल्लू भर पानी में डूबकर खुदकुशी करना.”

चुनावी सीजन में बैटरी चार्ज करा रहे हैं कवलजीत- भगत

वहीं इस मामले को लेकर केंद्रीय प्रवक्ता देवशरण भगत से जब प्रतिक्रिया ली गयी, तो उन्होंने कहा कि मुझे भी इस बात की जानकरी मिली है. लेकिन ये कौन है मैं नहीं जानता. उन्होंने बताया कि पता करने से मालूम चला है कि 2009 में ही इन्होंने पार्टी छोड़ दी है. चुनावी सीजन है. सीजन में ये भी बैटरी चार्ज करा रहे हैं.

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