
संजय प्रसाद
Jamshedpur : आप अपने शहर जमशेदपुर पर भले ही इतराते हों, लेकिन बाहर से देखने में यह शहर जैसा है, वह अंदर से नहीं है. एक ही शहर में कई शहर हैं. यह शहर उनका भी है, जो यहां की कंपनियों में स्थायी मजदूर हैं. एक शहर उनका भी है, जो अस्थायी हैं और स्थायी होने की कोई गारंटी नहीं है. एक शहर उनका भी है, जिनकी जिंदगी ठेके पर चलती है. इनका कोई माईबाप नहीं हैं और ये ठेकेदार के शोषण के सबसे ज्यादा शिकार हैं. अब तो स्थायी में भी शोषण की कई श्रेणियां बनती जा रही हैं. पुराने ग्रेड के कर्मचारियों के वेतन ज्यादा होने के चलते प्रबंधन न्यू सीरिज से लेकर जमशेदपुर सीरिज नाम से ग्रेड बना रहा हैं. ये कर्मचारी स्थायी तो कहलायेंगे, मगर वेतन और सुविधाएं टेंपररी की तरह होंगी. यह बात इसलिए निकली है, क्योंकि टाटा स्टील के शुक्रवार को हुए बोनस समझौते में पुराने ग्रेड के कर्मियों का अधिकतम वेतन पौने पांच लाख तक चला गया, जबकि एनएस ग्रेड के कर्मियों का अधिकतम वेतन एक लाख के करीब है. ठेका कर्मियों का कोई माईबाप नहीं है. उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया गया हैं.
डीएलसी ने की पहल
जमशेदपुर के डीएलसी राजेश प्रसाद ने टाटा स्टील प्रबंधन को स्थायी कर्मियों की तर्ज पर ठेका कर्मियों को भी बोनस देने का सुझाव दिया है, जिसे मजदूर वर्गों की काफी सराहना मिल रही हैं. प्रसाद ने कहा कि टाटा समूह हमेशा से मजदूरों के कल्याण को लेकर आगे रहा है तो क्यों नहीं ठेका कर्मियों को भी लाभ का हिस्सेदार बनाया जाय, जिनका भी कंपनी के प्रदर्शन में अहम योगदान रहा है. उन्होंने कहा कि ठेकेदार की ओर से ठेका कर्मियों को न तो सम्मानजनक वेतन दिया जाता है और न ही बोनस, हर दिन उनके कार्यालय में मजदूरों का प्रतिनिधिमंडल आता है और ठेकेदार की शिकायत करता है. टाटा समूह के प्रिंसिपल इंप्यलायर होने के नाते इस पर विचार करना चाहिए
सीटू ने ठेकाकर्मियों को बोनस देने की वकालत की
उधर, मजदूर संगठन सीटू ने टाटा स्टील के बोनस समझौते में पुराने और नये ग्रेड के कर्मियों को समान बोनस की मांग की है और कहा है कि समान काम के आधार पर ठेका कर्मियों को भी बोनस मिलना चाहिए. सीटू ने वेतन की असमानता को दूर करने की मांग की है.
ठेका कर्मियों को 8.33 फीसदी भी बोनस नहीं मिलता
शहर में 95 फीसदी ठेकाकर्मी है. केवल 5 फीसदी स्थायी कर्मी हैं, जिनका वेतन सम्मानजनक है. टाटा मोटर्स जैसी कंपनी में जहां बाई सिक्स की परम्परा है, वहां हर साल पांच हजार टेंपरेरी को उनके बेसिक और डीए का केवल 8.33 फीसदी बोनस मिलता है. सारी कंपनियों में ठेकाकर्मियों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही हैं. ठेकेदार मनमाने तौर पर पूजा के नाम पर कुछ राशि दे देता है. आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की कंपनियों की स्थिति तो और भी खराब है. क्षेत्र की कुछेक कंपनियों को छोड़ अधिकतर गरीब मजदूरों का हक मार लेती हैं.
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