
Dumka: दुमका जिला का एक सरकारी स्कूल ने जहां चाह वहां रहा की कहावत को चरितार्थ किया है. दुमका जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर दूर है सदर प्रखंड़ का खिजुरी गांव. इस गांव में प्राइमरी शिक्षा के लिए एकमात्र स्कूल है.
राज्य शिक्षा परियोजना की ओर से व्हाट्स ऐप पर चलाये जा रहे ऑनलाइन क्लास से खिजुरी गांव के स्कूल के बच्चे भी जुड़े हुए हैं. लेकिन स्मार्टफोन के अभाव में यहां के बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे. यहां के गरीब परिवारों के पास स्मार्टफोन नहीं होने की वजह से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी.
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बच्चों की पढ़ाई के लिए निकाला खास विकल्प
बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए शिक्षकों ने खास विकल्प निकाला है. उन्होंने डिस्टेंस लर्निंग के लिए लाउड-स्पीकर के जरिए बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया. इस पहल में स्कूल के प्रिंसिपल श्याम किशोर सिंह गांधी और स्कूल के अन्य शिक्षकों को ग्रामीणों का भी सहयोग मिला. फिर क्या था स्कूल के बच्चों की पढ़ाई लॉउडस्पीकर से करायी जाने लगी.
गौरतलब है कि कोरोना संकट के कारण देशभर में स्कूल में बंद हैं. बच्चे स्कूल तो नहीं जा रहे. इस दौरान बच्चों की पढ़ाई का नुकसान नहीं हो इसके लिए कई स्कूलों ने ऑनलाइन क्लास के जरिए पढ़ाई शुरू की है. इस ऑनलाइन क्लास का मुख्य उद्देश्य सोशल डिस्टेंस को बनाये रखना है.
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246 स्टूडेंट्स में से केवल 42 के घर में स्मार्टफोन
इस स्कूल में 246 स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं. लेकिन इनमें से मात्र 42 छात्रों के घरों में स्मार्टफोन है. इस वजह से ऑनलाइन क्लास की सुविधा होने के बाद भी इस स्कूल के अधिकांश बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे. बच्चों की पढ़ाई हो सके, इसके लिए शिक्षकों ने रास्ता निकाला. शिक्षकों ने गांव के बीच स्थित एक पेड़ पर लाउडस्पीकर लगा दिया है.
इसी लॉउडस्पीकर के जरिये शिक्षक बच्चों का क्लास कराते हैं. अगल-बगल के घरों में या फिर पेड़ की छांव में छात्र सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बैठते हैं और पढ़ाई करते हैं. लाउडस्पीकर से सुनकर बच्चे पढ़ाई भी कर रहे हैं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी हो रहा है. पढ़ाई का यह तरीका छात्रों को भी खूब भा रहा है. स्कूल के प्रिंसिपल श्याम किशोर सिंह गांधी ने न्यूजविंग को बताया कि इस पहल में ग्रामीणों का बढ़-चढ़ कर सहयोग मिल रहा है. खिजुरी गांव उत्क्रमित मध्य विद्यालय में अभी प्रयोग के तौर पर शुरू की गयी है, अन्य गांव तक इस भी इस तरीके से पढ़ाई शुरू की जायेगी.
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सहायक शिक्षक दीपक दूबे का भी बड़ा योगदान
पठन पाठन के इस अनोखे तरीके में स्कूल के सहायक शिक्षक दीपक दूबे का योगदान भी सरहनीय है. दीपक प्रत्येक दिन लॉउडस्पीकर लगाने और खोलने का काम भी करते हैं और पढ़ाते भी हैं. उनका कहना है कि स्मार्टफोन नहीं होने की वजह से बच्चों की ऑनलाइन क्लास बाधित हो रही थी. काफी कम छात्रों के घरों में स्मार्टफोन फोन उपलब्ध था.
उन्होंने बताया कि इस अनोखी पहल से ना तो छात्रों को कोई परेशानी है और ना ही शिक्षकों को. शिक्षक कंटेंट सुनाकर छात्रों के पास जाते हैं और छात्रों की परेशानी को दूर करने के साथ-साथ पढ़ाई का मूल्यांकन भी करते हैं.




