
New Delhi: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद सीताराम युचेरी एकमात्र विपक्षी नेता हैं, जिन्होंने श्रीनगर की यात्रा की. अपने श्रीनगर दौरे के बाद सीपीएम नेता ने सोमवार को एक हलफनामा सुप्रीम कोर्ट को सौंपा.
अपने हलफनामे में उन्होंने श्रीनगर दौरे की पूरी आप बीती बताई है. जिसके आधार पर कोर्ट ने सीताराम युचेरी को निर्देश दिया था कि वो अपने साथी यूसुफ तारिगामी को दिल्ली स्थिति एम्स में इलाज के लिए भर्ती कराये.
साथ ही चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस एसए बोबडे और अब्दुल नजीर की पीठ ने केंद्र सरकार को एक नोटिस भेजा जिसमें येचुरी के इस आरोप का जवाब देने को कहा गया है.
खबर है कि रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि तारिगामी को अवैध तरीके से हिरासत में रखने से उनकी तबीयत और खराब हुई, और उनके परिवार को भी गैर-कानूनी ढंग से नंजरबंद कर दिया गया.
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क्या है हलफनामे में
लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “हलफनामा कुछ ऐसी बातों का जिक्र करता है जिसमें यह लगता है कि उन्हें (येचुरी)अपनी यात्रा पर कहीं जाने की अनुमति नहीं थी. हमने हलफनामे की जांच की है और हम उनसे (केंद्र की) प्रतिक्रिया मांगेंगे.”
जनसत्ता की खबर के मुताबिक, सीताराम येचुरी के हलफनामे के अनुसार, “29-08-2019 को निजी सहायक के साथ साक्षी (सीताराम येचुरी) बताए गयी उड़ान (इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट 6 बी 2136) से यात्रा की और श्रीनगर हवाई अड्डे पर पहुंचे. जहां उनके विमान से बाहर निकलते ही एरोब्रिज के भीतर ही दो पुलिस अधिकारी उसके पास पहुंचे और उन्हें हवाई अड्डे के आगमन क्षेत्र के एक कमरे में ले गए, जहां सीनियर एसपी मीर इम्तियाज हुसैन ने उनसे मुलाकात की. पुलिस अधिकारी इम्तियाज ने संकेत दिया कि वह साक्षी (येचुरी) को उनके साथी तारिगामी से मिलाने ले जाएंगे और इसके बाद उन्हें वह एयरपोर्ट वापस लाएंगे 5 बजे के करीब दिल्ली की फ्लाइट से विदा कर देंगे. साक्षी ने इम्तियाज को बताया कि वह उसी शाम लौटेंगे या नहीं यह तारिगामी की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करेगा.”
“साक्षी (सीपीएम नेता) और उनके निजी सहायक को एक उच्च सुरक्षा मानकों वाली कार में बैठने के लिए कहा गया था, जिसके सामने और पीछे दोनों तरफ सुरक्षाकर्मियों की एक टुकड़ी थी. कारों का यह काफिला फिर श्रीनगर शहर में गुप्कर रोड पर तारिगामी के घर के लिए रवाना हुआ.”
अपने हलफनामे में उन्होंने आगे लिखा है, “तारिगामी के घर पर साढ़े 12 बजे पहुंचने के बाद सीताराम येचुरी ने उनसे मुलाकात की. इस दौरान वह (तारिगामी) साक्षी (येचुरी) को देखकर बेहद खुश और राहत महसूस कर रहे थे. वह तरिगामी के ड्राइंग रूम में बैठ गए. जहां पहले घंटे के लिए संबंधित अधिकारी, एसएसपी इम्तियाज भी साक्षी और तरिगामी के साथ ड्राइंग रूम में बिन बुलाए बैठे थे, हालांकि उन्हें वहां उपस्थित होने की कोई आवश्यकता नहीं थी.”
इसके बाद जब येचुरी ने तारिगामी से उनके स्वास्थ्य के अलावा उन्हें नजरबंद किए जाने के घटनाक्रम और घाटी में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बातचीत शुरू करनी चाही तो उन्होंने येचुरी को वहां मौजूद पुलिस अधिकारी की ओर इशारा किया.
हलफनामें में आगे बताया गया है, “इसके बाद तारिगामी ने अधिकारी की मौजूदगी की तरफ इशारा किया. हालांकि, उन्हें हिरासत का कोई आदेश नहीं दिया गया था. उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पिछले 25 दिनों से अधिकारियों द्वारा घर के अंदर बाहरी लोगों के प्रवेश और तारिगामी तथा उनके परिजनों के घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई है. तारिगामी और उनका परिवार वास्तव में ‘हाउस अरेस्ट’ था.”
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सीताराम येचुरी को तारिगामी ने अपने स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और अस्पतालों के बारे में विस्तार से बताया.
हलफनामें में आगे कहा गया है, “सीपीएम नेता ने यह मान लिया कि वह तरिगामी के घर पर रात भर रह सकते हैं. लेकिन, संबंधित अधिकारी इम्तियाज ने संकेत दिया कि तारिगामी के घर में कोई भी बाहरी नहीं रह सकता है, लिहाजा साक्षी अपने मित्र के घर में रात भर नहीं रह सकते हैं.”
तारिगामी ने आगे संकेत देते हुए सीताराम युचेरी का ध्यान कुछ मुद्दों की तरफ खींचा है, जिसका जिक्र उनका हवाला देते हुए हलफनामे में दिया गया है. जिसके अनुसार,
• वह और उनके बच्चे तथा पोते-पोतियों को भी नजरबंद (de facto house arrest) करके रखा गया है.
• न किसी को घर से बाहर जाने की इजाजत है और न ही किसी बाहरी को घर के भीतर आने की अनुमति है.
• घरसे संबंधित तमाम जरूरतों की आपूर्ति सुरक्षा अधिकारियों के द्वारा की जाती है.
• उनके पास कश्मीर या भारत के बाकी हिस्सों में अपने परिजनों या दोस्तों के साथ संपर्क करने का कोई साधन नहीं है, क्योंकि न तो मोबाइल नेटवर्क और न ही लैंडलाइन नेटवर्क काम कर रहे हैं. यहां तक कि उनके घर में दोनों लैंडलाइन बंद हैं. ऐसे में आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना भी मुश्किल हो जाता है. वह अपने नियमित चिकित्सक से संपर्क करने में भी असमर्थ रहे हैं.
• अपने ही घर में नजरबंद और लॉकडाउन के मद्देनजर परिवार के पास पैसे और नकदी की भी कमी है.
सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से गये थे श्रीनगर
गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय की अनुमति से येचुरी ने गत 29 अगस्त को माकपा की जम्मू कश्मीर इकाई के नेता और बीमार चल रहे पूर्व विधायक यूसुफ तारीगामी से मुलाकात करने के लिये वहां का दौरा किया था.
उल्लेखनीय है कि येचुरी ने न्यायालय के समक्ष बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर श्रीनगर एम्स में इलाज करा रहे तारीगामी से मिलने की अनुमति मांगी थी.
पार्टी सूत्रों के अनुससार येचुरी ने रिपोर्ट में न सिर्फ तारीगामी की सेहत का विवरण दिया है, बल्कि पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद उत्पन्न स्थिति का ब्यौरा भी पेश किया है.
याद दिला दे किं येचुरी ने पांच अगस्त के बाद पार्टी की राज्य इकाई के नेताओं से मिलने की दो बार कोशिश की थी लेकिन स्थानीय प्रशासन ने उन्हें कानून व्यवस्था का हवाला देकर श्रीनगर हवाईअड्डे से ही वापस भेज दिया.
बाद में उच्चतम न्यायालय ने येचुरी को इस शर्त पर तारीगामी से मिलने की अनुमति दी थी कि वह इस दौरान राज्य में किसी राजनीतिक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे. शीर्ष अदालत ने येचुरी को हलफनामा पेश कर यात्रा विवरण देने का भी निर्देश दिया था.
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