
Ranchi : रांची में जमीन व मकान का सपना बेचकर करीब 500 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला करने वाले मास्टरमाइंड, और संजीवनी बिल्डकॉन के निदेशक जयंत दयाल नंदी पिछले 7 साल से फरार है. साल 2012 में संजीवनी बिल्डकॉन घोटाले का खुलासा हुआ था. सात साल के बाद भी ना तो पुलिस और ना ही सीबीआइ ही जयंती लाल को पकड़ पायी है.
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जयंत दयाल नंदी को पकड़ने में नाकाम रही जांच एजेंसी
साल 2018 में संजीवनी बिल्डकॉन घोटाला सामने आने के बाद से जयंत दयाल नंदी फरार हो गया. घोटाला के बाद विदेश भाग चुके नंदी को पकड़ने के लिए रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था. कभी उसके नेपाल तो कभी मलेशिया में होने की जानकारी मिलती रही, लेकिन उसे गिरफ्तार करने में सभी एजेंसी अबतक नाकाम रही है.
हजारीबाग की एक शिक्षिका के अपहरण का भी आरोपी है जयंत दयाल नंदी
जयंत दयाल नंदी के खिलाफ हजारीबाग के सदर थाना में हजारीबाग की एक शिक्षिका के अपहरण का मामला भी दर्ज है. गौरतलब है कि इस मामले में हजारीबाग पुलिस ने उसे मृत बताते हुए केस की फाइल ही बंद कर दी थी. ऐसे अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई कर चुका है.
गौरतलब है कि जयंत दयाल नंदी के खिलाफ हजारीबाग सदर थाना कांड संख्या 174/95 दर्ज कराया गया था. इस मामले में हजारीबाग एसपी को पुलिस मुख्यालय ने आदेश दिया था, कि वे नंदी को हाजिर कराएं.
जिसपर एसपी ने जवाबदेही सदर थाना को दी. इसपर अमल के बजाय एसआइ प्रमोद कुमार ने जेडी नंदी की पुत्री के बयान के आधार पर आरोपी जेडी नंदी की मृत्यु 28 जनवरी 2009 को हो जाने का प्रतिवेदन सुपुर्द कर दिया. लेकिन मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं दिया. उस वक्त एसपी कार्यालय में पदस्थापित लिपिक रामप्रवेश प्रसाद ने तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय-प्रथम नौशाद आलम के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था.
डीएसपी ने प्रतिवेदन स्वीकार करते हुए उसे कोर्ट को भेज दिया. बाद में जब मृत्यु प्रमाणपत्र सामने रखा गया तो उसमें आरोपी जेडी नंदी की जगह एडी नंदी लिखा हुआ था. जिसपर लिपिक ने डीएसपी का ध्यान दिलाया, लेकिन उन्होंने कोई संज्ञान नहीं लिया. उन्होंने हजारीबाग के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को भी इससे अवगत नहीं कराया था.
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घोटाले से संबंधित 33 कांड को सीबीआइ ने किया था टेकओवर
वहीं घोटाले के मुख्य आरोपितों में कंपनी के प्रबंध निदेशक जयंत दयाल नंदी, उनकी पहली पत्नी अनिता नंदी, दूसरी पत्नी अनामिका नंदी, निदेशक श्याम किशोर गुप्ता, निदेशक तकनीक अरविंद सिंह, ऑपरेशनल मैनेजर आरपी वर्मा शामिल हैं.
इस मामले में रांची सहित विभिन्न जिलों में कुल 33 कांड दर्ज हुए थे. इन 33 कांडों को आगे चलकर वर्ष 2014 में सीबीआइ ने टेकओवर किया था. अधिकतर मामलों में सीबीआइ चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है और कुछ में ट्रायल भी चल रहा है.
2012 में संजीवनी बिल्डकॉन के जमीन घोटाले का हुआ था खुलासा
साल 2012 में संजीवनी बिल्डकॉन के बैनर तले हो रहे जमीन घोटाले का खुलासा हुआ था. खुलासे के बाद रांची के अलग-अलग थानों में कुल 33 केस दर्ज हुए थे. एफआइआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने जयंत दयाल नंदी, अनामिका नंदी, अनिता नंदी, अरविंद सिंह, आरपी वर्मा, पीके गुप्ता, अब्दुल वहाब, मो. शमीम समेत कइयों को आरोपी बनाया था. साल 2014 में सीबीआइ ने सभी 33 केस टेकओवर कर अनुसंधान शुरू किया था.
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