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शाह ब्रदर्स मामले में सिर्फ लीज रद्द से नहीं होगा समाधान, महाधिवक्ता और अधिकारियों पर हो कार्रवाईः सरयू राय

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Ranchi: शाद ब्रदर्स मामले पर खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि शाह ब्रदर्स का खनन पट्टा रद्द करना ही खान विभाग में वर्षों से चल रही समस्या का समाधान नहीं है. शाह ब्रदर्स और कई अन्य खनन पट्टे तो विकास आयुक्त की अध्यक्षता में बनी समिति के आदेश से 2016 में ही रद्द हो गये थे. इन्हें पुनर्जीवित करने में नियम विरुद्ध भूमिका निभानेवाले खान विभाग के तत्कालीन और वर्तमान अधिकारियों तथा महाधिवक्ता के विरुद्ध भी कार्रवाई होनी चाहिए. खान विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत और कानूनी प्रक्रिया का सत्यानाश करनेवालों की साज़िश परत दर परत उजागर होगी तो सरकार के लिये परेशानी भी पैदा होगी और सरकार का चेहरा भी विकृत होगा. काफी दिनों से खान विभाग में नियम और कानून की धज्जियां उड़ाने वाले ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई होने से ही विभाग की कार्य संस्कृति सुधरेगी. अभी भी कतिपय गंभीर अनियमितताएं खान विभाग में हुई हैं जिन पर हाल तक अधिकारियों ने पर्दा डालने का प्रयास किया है.

महाधिवक्ता ने दी थी जानकारी- रद्द हुआ शाह ब्रदर्स का खनन पट्टा

हाइकोर्ट में शुक्रवार को अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई थी. चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस डीएन पटेल की खंडपीठ ने राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद सुनवाई स्थगित कर दी थी. इसके पहले राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता अजीत कुमार ने बताया था कि पश्चिमी सिंहभूम स्थित शाह ब्रदर्स के आयरन ओर माइंस की लिस्ट को सरकार ने रद्द कर दिया है. लीज रद्द हो जाने के बाद अब प्रार्थी ने शाह ब्रदर्स की अवमानना याचिका पर सुनवाई का कोई औचित्य नहीं रह गया. प्रार्थी की याचिका पर सुनवाई करते हुए पूर्व में एकल पीठ ने किस्तों में राशि जमा करने की छूट दी थी. दो किस्त के भुगतान के बाद परिवहन चालान जारी करने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने शाह ब्रदर्स के खनन पर रोक लगा दी थी. लगभग 250 करोड़ रुपए जमा करने का आदेश दिया था. एकल पीठ के आदेश के आलोक में मैसर्स शाह ब्रदर्स 90 करोड़ रुपए जमा किए, लेकिन राज्य सरकार की ओर से जारी नहीं किया गया.

मंत्री ने बार काउंसिल को भी लिखी थी चिट्ठी

खाद्य और आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने झारखंड स्टेट बार काउंसिल के सदस्यों को चिट्ठी लिखकर 23 नवंबर 2018 को उनके खिलाफ पारित किया गया प्रस्ताव को वापस लेने का आग्रह किया था. उन्होंने कहा है कि उनका पक्ष सुने बिना प्रस्ताव पारित किया गया. वह उचित नहीं है. महाअधिवक्ता बार काउंसिल के चेयरमैन अजीत कुमार पर शाह प्रदेश मामले में कोर्ट में तथ्य छुपाने संबंधित आरोप लगाए जा रहे हैं. उन्हें बैठक में शामिल नहीं होना चाहिए था. इसके बावजूद वह बैठक में शामिल हुए. जिसमें उनके खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया. श्री राय ने यह भी आग्रह किया है कि काउंसिल की पूर्ण बैठक शीघ्र बुलाई जाए और उन्हें भी बुलाया जाए, ताकि वह अपनी बात रख सके. बैठक में महाधिवक्ता चेयरमैन बार काउंसिल को बाहर रखा जाए.

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