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रोजगार मेला में आये युवा दिखे निराश, कहा- 10-12 हजार रुपये में दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद में कैसे करेंगे नौकरी

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Ranchi : 10 जनवरी को राज्य की रघुवर सरकार राज्य के युवाओं को निजी क्षेत्र की विभिन्न कंपनियों में नौकरी का नियुक्ति पत्र बांटनेवाली है. कंपनियां युवाओं का चयन कर सकें, इसके लिए खेलगांव में रोजगार मेला लगाया गया है. लेकिन, राज्य के युवा ही इससे खुश नहीं हैं. नौकरी की उम्मीद लिये शनिवार को मेले में आये युवाओं से बात करने पर उन्होंने न्यूज विंग के साथ अपना दर्द साझा किया. युवाओं ने बताया कि सरकार विज्ञापन के माध्यम से तरह-तरह के प्रलोभन देकर युवाओं को रोजगार मेले में आने को विवश करती है, लेकिन यहां आकर सच्चाई का पता चलता है. यहां आने के बाद न सिर्फ निराशा हाथ लगती है, बल्कि युवाओं की उम्मीद भी टूटती है. नौकरी की उम्मीद में आये अभिषेक कुमार ने कहा कि नौकरी के नाम पर बायोडेटा ले लिया गया और सोमवार को कॉल करने की बात कही गयी. जब पूछा गया कि आज ही अंतिम दिन है, ऐसे में सोमवार-मंगलवार को कॉल कैसे किया जायेगा. इस पर नियोक्ताओं ने कहा कि नौकरी हम दे रहे हैं कि तुम. इतना कहकर भगा दिया गया. मेले में आये युवक-युवतियों ने बताया कि बायोडेटा जमा कर लिया जा रहा है और वीडियो कॉल के माध्यम से इंटरव्यू की बात कही जा रही है. ज्यादातर जॉब रांची से बाहर के लिए है और सिर्फ 10 से 15 हजार रुपये तक ही सैलेरी है.

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10 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी हैदराबाद, बेंगलुरु में : रविरंजन

मेले में आये युवा रविरंजन ने कहा, “यह मेला झारखंड में झारखंड के युवाओं के लिए लगाया गया है, तो फिर हैदराबाद, बेंगलुरु क्यों ले जाया जा रहा है? वह भी सिर्फ 10 हजार रुपये प्रतिमाह के वेतन पर? इतने कम वेतन में कहां से गुजारा हो पायेगा. सरकार सिर्फ रोजगार मेला लगाकर युवाओं को नौकरी देने का खोखला दावा कर रही है. लेकिन, जमीनी हकीकत कुछ और ही है.” रवि रंजन ने बताया कि बीते वर्ष 12 जनवरी को जेबीएम कंपनी में उनका चयन हुआ था. काम करने के लिए गुजरात ले जाया गया. यहां चयन के समय में तो 9700 रुपये प्रतिमाह पर बात करके ले गये थे, लेकिन वहां जाकर डेली वेजेज में कर दिया गया. पैसे भी समय पर नहीं मिलते थे. पांच महीने काम करने के बाद वह वापस रांची आ गये. इस बार नया और अच्छा जॉब मिलने की आस में वह फिर रोजगार मेला में आये थे.

इससे तो अच्छा होता कि हम चाय बेच लेते : अभिषेक

अभिषेक कुमार ने कहा, “रोजगार मेला लगाकर नौजवनों को बेवकूफ बनाया जा रहा है. सरकार विज्ञापन में कुछ और कहती है, लेकिन यहां आकर कुछ और ही मालूम पड़ता है. रोजगार देनेवाली कंपनियां युवाओं को बाहर ले जाकर बेवकूफ बनाती है. इससे अच्छा तो होता कि हम युवा खेती-बारी करें, ठेला में चाय बेचें, उससे अच्छी कमाई हो जायेगी. आज के बाद अब ऐसे मेले में कभी नहीं आऊंगा.”

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यहां आकर डिससैटिस्फाइड हुई हूं : मेघा

जॉब की उम्मीद से आयी मेघा कुमारी ने कहा, “यहां आकर डिससैटिस्फाइड हुई हूं. सिर्फ सेल्स से रिलेटेड सेक्टर में ही जॉब दिया जा रहा है. न मार्केट और न ही एचआर से रिलेटेड कोई जॉब है. जिस जॉब के लिए ऑफर किया गया, वह भी दिल्ली और बेंगलुरु में है. इसके लिए सिर्फ 12 से 15 हजार रुपये पेमेंट की बात कही गयी, जो बहुत ही कम है. ऐसे में इस रोजगार मेला को लगाने का कोई औचित्य ही नहीं बनता.”

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